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महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर NDA को मिला इस दल का समर्थन, क्या फिर बढ़ने वाली है ताकत?

Women Reservation and Delimitation Bill:पंजाब की राजनीति में एक बार फिर पुराने सियासी समीकरणों के लौटने की चर्चा तेज हो गई है. शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों के समर्थन का ऐलान किया है. यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम मुलाकात हुई. बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसके बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को अकाली दल का समर्थन

अकाली दल का महिला आरक्षण और परिसीमन बिल के समर्थन का फैसला राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी के इस रुख को पंजाब की आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.

खास बात यह है कि यह घोषणा सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात के तुरंत बाद हुई. हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात को पंजाब के आगामी चुनावी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं.

क्या फिर साथ आएंगे अकाली दल और बीजेपी?

अकाली दल और बीजेपी लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं. दोनों दलों का गठबंधन करीब ढाई दशक तक चला. हालांकि, वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों पार्टियों के बीच मतभेद बढ़ गए और अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया.

इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनावी रास्ता अपनाया. अब पंजाब की राजनीति में बदले समीकरणों के बीच एक बार फिर दोनों दलों के करीब आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं.

हालांकि, अभी तक न तो अकाली दल और न ही बीजेपी ने किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा की है. इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक समझौते के संकेत के तौर पर ही देखा जा रहा है.

AAP और कांग्रेस के सामने चुनौती बनने की कोशिश

पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस प्रमुख राजनीतिक ताकतों में शामिल हैं. ऐसे में अकाली दल और बीजेपी के संभावित साथ आने की स्थिति में राज्य की चुनावी लड़ाई और दिलचस्प हो सकती है.

अकाली दल का पारंपरिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों और सिख मतदाताओं के बीच माना जाता है, जबकि बीजेपी को शहरी क्षेत्रों में समर्थन हासिल है. दोनों दलों के समर्थक आधार एक-दूसरे के पूरक साबित होते हैं तो गठबंधन को चुनाव में इसका फायदा मिल सकता है.

लोकसभा में अकाली दल की स्थिति

वर्तमान में लोकसभा में अकाली दल की संख्या काफी सीमित है और पार्टी के पास केवल एक सांसद है. इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का संख्याबल बहुत बड़ा नहीं है. यही वजह है कि सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री की मुलाकात को पंजाब की राजनीति के संदर्भ में ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव दोनों दलों के लिए अहम हैं. ऐसे में सीटों के बंटवारे, वोट बैंक और चुनावी रणनीति को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.

पहले भी सफल रहा है गठबंधन

अकाली दल और बीजेपी की जोड़ी पंजाब में पहले काफी प्रभावी रही है. दोनों दलों के गठबंधन ने 1997, 2007 और 2012 में राज्य में सरकार बनाई थी. लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण दोनों दलों के बीच संगठनात्मक और चुनावी तालमेल भी मजबूत रहा.

लेकिन 2020 में गठबंधन टूटने के बाद दोनों पार्टियों को अलग-अलग चुनावी मैदान में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. ऐसे में अब पुराने सहयोगी फिर साथ आते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर है.

आगे क्या होगा?

फिलहाल गठबंधन को लेकर आधिकारिक तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन अकाली दल का नए विधेयकों पर समर्थन और शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है. यदि दोनों पार्टियां दोबारा साथ आती हैं, तो इसका सीधा असर पंजाब के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है. आने वाले दिनों में सीटों के बंटवारे, साझा रणनीति और नेतृत्व स्तर की बैठकों से इस संभावित गठजोड़ की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के बड़े मॉड्यूल का खुलासा, पांच जिलों में मारी रेड, 5000 से पूछताछ

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का नया मॉड्यूल देखने को मिल रहा है. यह अब पहाड़ियों से निकलकर मोबाइल स्क्रीन्स तक पहुंच चुका है. काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर ने इसके बड़े मॉड्यूल का खुलासा किया है. इटेलिजेंस विंग ने शनिवार को सुबह ही उत्तर और दक्षिणी कश्मीर के पांच जिलों में रेड मारी है. ऐसे आरोप हैं कि ऑनलाइन माध्यमों से आतंकवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा था. युवाओं को ब्रेनवॉश कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर धकलने का प्रयास हो रहा था. इसके साथ आतंकियों की भर्ती की तैयारी थी. ये रेड आतंकियों के स्लीपर सेल और ओवरग्राउंड वर्कर्स को लेकर मारी गई थी. इस अभियान के तहत बारामूला, शोपियां, अनंतनाग, कुपवाड़ा और बांदीपोरा में छापेमारी की गई है. 

आतंकी ट्रेनिंग को लेकर भर्ती  

छापेमारी की कार्रवाई एक एफआईआर के बाद सामने आई है. इसमें आतंकवाद फैलाने, कट्टरता की ओर युवाओं को धकेलने का प्रयास हो रहा है. उन्हें आतंकी ट्रेनिंग को लेकर भर्ती किए जाने के आरोप का केस दर्ज किया है. 

टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद से कार्रवाई तेज

अधिकारियों के अनुसार, FIR में दर्ज है कि लोग सोशल मीडिया का उपयोग आतंकवाद को ग्लोरिफाई करने के​ लिए किया जा रहा था. इसके साथ युवाओं को आतंकी संगठन से जुड़ने के लिए लुभाया गया था. सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल में टारगेट किलिंग की घटनाओं के बाद से कार्रवाई तेज हो चुकी है. उनकी घटनाओं के बाद से पुलिस अब तक पूरी कश्मीर घाटी में करीब 5000 लोगों से इस मामले में पूछताछ हो रही है. 

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