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हृदय को रखें स्वस्थ और रक्तचाप को नियंत्रित, शलभासन के नियमित अभ्यास के फायदे

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में योग का महत्व दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। योग न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि, मानसिक शांति भी प्रदान करता है। इसी क्रम में शलभासन एक ऐसा प्रभावी योगासन है, जो शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं नहीं होती हैं।

शलभासन एक संस्कृत शब्द है। इसमें शलभ का अर्थ टिड्डा और आसन का अर्थ मुद्रा होता है। यानी की यह आसन टिड्डे की तरह उड़ान भरने वाली मुद्रा है। इसके नियमित अभ्यास से पीठ, कमर और पैरों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। रक्तचाप नियंत्रित और हृदय संबंधी समस्याओं में सुधार होता है। यह हृदय की क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने में भी मदद करता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, शलभासन एक महत्वपूर्ण हठयोग आसन है, जो मुख्य रूप से पीठ के निचले हिस्से, रीढ़ की हड्डी, जांघों और नितंबों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। यह कमर दर्द में राहत, पाचन में सुधार, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने और पेट की चर्बी कम करने में अत्यंत प्रभावी है, जो शरीर को स्थिरता और मन को शांति प्रदान करता है।

शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए यह योगासन थोड़ा सा चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसमें पीठ, कंधों और पैरों की ताकत और संतुलन तीनों की जरूरत होती है, लेकिन जब आप इसे धीरे-धीरे सीखते हैं और रोज सिर्फ 5 मिनट देते हैं, तो शरीर खुद आपका साथ देने लगता है।

इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेटकर सामान्य शलभासन की स्थिति में आए, फिर पैरों को ऊपर उठाएं और शरीर का संतुलन कंधों, ठोड़ी और भुजाओं पर बनाए रखें। शुरुआत में पैरों को ज्यादा ऊपर ले जाना जरूरी नहीं है, जितना आराम से हो सके उतना करें। धीरे-धीरे आपकी पीठ की मांसपेशियां मजबूत होंगी और पैरों में लचीलापन बढ़ेगा। जब शरीर थोड़ा अभ्यस्त हो जाए, तब पैरों को ऊपर ले जाकर संतुलन बनाने की कोशिश करें और घुटने मोड़कर पंजों से सिर छूने का प्रयास करें।

गंभीर पीठ दर्द, स्लिप डिस्क या हर्निया वाले लोग इससे बचें। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, या पेट के अल्सर की समस्या होने पर न करें। गर्भवती महिलाएं इस आसन को न करें।

--आईएएनएस

एनएस/एएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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अहमदाबाद में जहरीला डोसा बैटर बना मौत का कारण, दो बहनों की मौत, माता-पिता गंभीर

Ahmedabad News: गुजरात के चांदखेड़ा इलाके से होश उड़ा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने फूड सेफ्टी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां बाजार से लाए गए डोसा के घोल (बैटर) ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया है. जहरीला डोसा खाने से परिवार की दो मासूम बहनों की मौत हो गई जबकि उनके माता-पिता का अब भी अस्पताल में इलाज चल रहा है. बताया जा रहा है कि उनकी हालत इस समय बहुत गंभीर है.

क्या है पूरी घटना?

यह घटना 1 अप्रैल 2026, बुधवार की है. विमलकुमार प्रजापति नामक शख्स ने परिवार के साथ बाहर के खाने के बजाय घर पर डोसा बनाने का फैसला किया और इसे बनाने के लिए बाजार से तैयार घोल मंगवाया. मृतक बहनों के दादा गौरीशंकर प्रजापति के अनुसार, रात 8 बजे सभी ने रेडीमेट बैटर से बना डोसा खाया. इसके बाद अगले दिन विमल की तबीयत बिगड़ गई. उसी शाम विमल की पत्नी भावना और बड़ी बेटी ने दोबारा वही डोसा खाया, जिसके बाद उनकी भी तबीयत खराब हो गई. यानी लगातार दो दिनों तक परिवार ने उस बैटर से बना डोसा खाया जिससे वह बीमार हो गए.

मासूम बहनों की मौत

जहरीला डोसा खाने से बाद 3 अप्रैल को दो बहनों की मौत हो गई. दरअसल, एक बहन तीन माह की बच्ची थी. जिसकी मौत मां का दूध पीने से हुई जबकि 5 अप्रैल को 4 वर्षीय मिष्टी, जो घर की बड़ी बेटी थी उसकी भी मौत हो गई. जहर का असर इतना ज्यादा था कि मां के दूध से भी बच्ची ने दम तोड़ दिया. इतना ही नहीं अब भी माता-पिता जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं. दिल दहलाने वाली इस घटना के बाद परिवार और प्रशासन ने न्यायिक गुहार लगाई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

पुलिस ने क्या कहा?

इस पूरी घटना में चांदखेड़ा पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर जेके मकवाना ने कहा कि 5 अप्रैल को शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर लिया गया है. अब तक की जांच से पता चला है कि1 अप्रैल को लाए गए डोसे के घोल से परिवार के सदस्य बीमार पड़े थे. पुलिस ने बताया कि मृतक के घर और जहां से घोल खरीदा गया था, उस दुकान की भी जांच हो रही है. हालांकि, अभी तक कोई सही कारण पता नहीं लगा है. खाद्य एवं औषधि विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ पता लगेगा. 

दुकानदार ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घनश्याम डेयरी, जहां से डोसा बैटर खरीदा गया था. उसके मालिक केतन पाटिल ने कहा कि उस शाम महिला और उनके पति डोसे का बैटर लेकर गए थे. गुजरात में डोसा बैटर को खीरा कहा जाता है. मालिक ने कहा कि हमारे कई ग्राहक हैं और हम रोजाना लगभग 100 से 125 किलो खीरा बेचते हैं.वहीं, खीरा हमारे रिश्तेदारों और अन्य ग्राहकों ने भी खाई और किसी और ने कोई समस्या नहीं बताई. हम खीरा घनश्याम डेयरी में ही बनाते हैं और अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है.

फिलहाल मामले की जांच चल रही है. साथ ही पुलिस उस दिन और किस-किस लोगों ने बैटर खरीदा है, इस बारे में भी पता लगा रही है. मृतक बच्चियों का पोस्टमार्टम कर मौत की वजह पताई लगाई जाएगी.

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