US-Iran War: ‘मैं बहुत नाराज हूं, ईरान को इसकी कीमत चुकानी होगी’, अल्टीमेटम खत्म होने से पहले बोले डोनाल्ड ट्रंप
अगले 24 घंटे अमेरिका और ईरान के लिए ही नहीं पूरी दुनिया के लिए अहम है. क्या जंग थमेगी, क्या सीजफायर लागू हो पाएगा, क्या ट्रंप अपनी डेडलाइन से पहले नरम पड़ेंगे? ये कई सवाल हैं जिनका अगले 24 घंटे में जवाब मिलना अहम है. क्योंकि अगर बात नहीं बनी तो जंग का नया दौर शुरू हो जाएगा, तबाही की नई तस्वीर सामने आने लगेगी. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को होर्मुज खोलने के लिए मंगलवार तक का टाइम दिया है, उसके बाद ईरान को दोजख बनाने की धमकी दे चुके हैं.
इस बीच ट्रंप ने एक बार फिर से सख्ती के संकेत दिए हैं. ट्रंप ने कहा है कि मंगलवार की डेडलाइन आखिरी डेडलाइन है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं होगा. ट्रंप का ये बयान तब आया है जब ईरान ने पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की की ओर से की गई मध्यस्थता को खारिज कर दिया है और 15 प्वाइंट प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.
ईरान के तेल के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह तेल कब्जा करने के लिए ही है और वे यानी कि ईरान की सरकार इसके बारे में कुछ भी नहीं कर सकती. ट्रंप ने आगे कहा, "दुर्भाग्य से अमेरिकी लोग चाहते हैं कि हम घर लौट आएं. अगर यह मेरे हाथ में होता, तो मैं तेल ले लेता. मैं तेल अपने पास रखता. मैं इससे खूब पैसा कमाता."
भारत की मजबूत राजकोषीय स्थिति आरबीआई को ज्यादा नीतिगत गुंजाइश देती है: वित्त मंत्री सीतारमण
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत की मजबूत राजकोषीय स्थिति और ठोस विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक को ज्यादा नीतिगत लचीलापन देते हैं।
वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पास राजकोषीय गुंजाइश है, जिसमें सरकार के पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को बनाए रखने की जगह है, आरबीआई के लिए दरें घटाने की जगह है, और प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता देने की जगह है। यह एक दशक के राजकोषीय अनुशासन का नतीजा है, जिसके अब अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।
उनका यह बयान बुधवार को आरबीआई द्वारा घोषित की जाने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले आया है।
सीतारमण ने यह भी बताया कि भारत का ऋण-से-जीडीपी अनुपात वैश्विक स्तर पर सबसे कम अनुपातों में से एक है, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का अनुमान है कि 2030 तक इसमें और गिरावट आएगी।
उन्होंने आगे कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार देश के आयात को 11 महीने तक वित्तपोषित करने के लिए पर्याप्त है, जो बाहरी झटकों से बचाव का काम करता है।
उन्होंने कहा कि समझदारी भरे राजकोषीय प्रबंधन ने सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे उपाय लागू करने में सक्षम बनाया है। इससे उपभोक्ताओं को ईरान युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के असर से बचाया जा सके। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितताओं के बीच रोजगार की सुरक्षा के लिए, महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों और घरेलू टैरिफ क्षेत्र में सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र) के संचालन के लिए लक्षित छूट दी गई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष एक प्रणालीगत झटके के रूप में उभरा है, जो पहले से ही अस्थिरता, अनिश्चितता और अस्पष्टता से भरे विश्व में और चुनौतियां जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मुद्रा पर दबाव मुद्रास्फीति के परिदृश्य को जटिल बना सकते हैं, जिससे नीतिगत समायोजन और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
दरअसल, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने सोमवार को अपनी समीक्षा बैठक शुरू कर दी है, और वह उन मौद्रिक नीतिगत उपायों पर विचार-विमर्श करेगी। इनकी घोषणा बुधवार को की जानी है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा (उन्हें स्थिर रखेगा), क्योंकि ईरान युद्ध के परिणामों के कारण मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ गया है। इस युद्ध के चलते पेट्रोलियम उत्पादों, उर्वरकों और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में भारी उछाल आया है।
पिछले महीने, सरकार ने आरबीआई के परामर्श से, अगले वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के लिए अपना उधार कार्यक्रम घोषित किया था, जिसके तहत छह महीनों में 8.2 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। यह पूरे साल के बजट में तय की गई उधारी का लगभग 51 प्रतिशत है।
आधिकारिक उधारी कैलेंडर (बारोइंग कैलेंडर) के मुताबिक, सालाना कुल उधारी को पहले के अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 16.09 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। उधारी कार्यक्रम में इस तरह की क्रमिक कमी से बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी (नकदी) बने रहने की उम्मीद है, जिससे कारोबार अपने निवेश जारी रख सकेंगे और अर्थव्यवस्था में रोज़गार के अवसर पैदा कर सकेंगे।
--आईएएनएस
एएसएच/डीएससी
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