कश्मीरी लाल जाकिर : बंटवारे के दर्द और पीड़ा को शब्दों में समेटने वाले कलमकार
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। कश्मीर की पीड़ा, बंटवारे के घाव और समाज की असमानताओं को अपनी कलम के जरिए बयां करने वाले साहित्यकार थे कश्मीरी लाल जाकिर। शायर से लेखक बने जाकिर साहब ने अपनी रचनाओं में सिर्फ कहानियों को ही शामिल नहीं किया, बल्कि उस दौर की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय पीड़ा को भी दर्ज किया जो आज भी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है।
कश्मीरी लाल जाकिर : बंटवारे के दर्द और पीड़ा को शब्दों में समेटने वाले कलमकार
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। कश्मीर की पीड़ा, बंटवारे के घाव और समाज की असमानताओं को अपनी कलम के जरिए बयां करने वाले साहित्यकार थे कश्मीरी लाल जाकिर। शायर से लेखक बने जाकिर साहब ने अपनी रचनाओं में सिर्फ कहानियों को ही शामिल नहीं किया, बल्कि उस दौर की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय पीड़ा को भी दर्ज किया जो आज भी पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है।
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