भारत की मजबूत राजकोषीय स्थिति आरबीआई को ज्यादा नीतिगत गुंजाइश देती है: वित्त मंत्री सीतारमण
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत की मजबूत राजकोषीय स्थिति और ठोस विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रिजर्व बैंक को ज्यादा नीतिगत लचीलापन देते हैं।
वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पास राजकोषीय गुंजाइश है, जिसमें सरकार के पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को बनाए रखने की जगह है, आरबीआई के लिए दरें घटाने की जगह है, और प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित सहायता देने की जगह है। यह एक दशक के राजकोषीय अनुशासन का नतीजा है, जिसके अब अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।
उनका यह बयान बुधवार को आरबीआई द्वारा घोषित की जाने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले आया है।
सीतारमण ने यह भी बताया कि भारत का ऋण-से-जीडीपी अनुपात वैश्विक स्तर पर सबसे कम अनुपातों में से एक है, और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का अनुमान है कि 2030 तक इसमें और गिरावट आएगी।
उन्होंने आगे कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार देश के आयात को 11 महीने तक वित्तपोषित करने के लिए पर्याप्त है, जो बाहरी झटकों से बचाव का काम करता है।
उन्होंने कहा कि समझदारी भरे राजकोषीय प्रबंधन ने सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे उपाय लागू करने में सक्षम बनाया है। इससे उपभोक्ताओं को ईरान युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों के असर से बचाया जा सके। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितताओं के बीच रोजगार की सुरक्षा के लिए, महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों और घरेलू टैरिफ क्षेत्र में सेज (विशेष आर्थिक क्षेत्र) के संचालन के लिए लक्षित छूट दी गई है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष एक प्रणालीगत झटके के रूप में उभरा है, जो पहले से ही अस्थिरता, अनिश्चितता और अस्पष्टता से भरे विश्व में और चुनौतियां जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मुद्रा पर दबाव मुद्रास्फीति के परिदृश्य को जटिल बना सकते हैं, जिससे नीतिगत समायोजन और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।
दरअसल, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने सोमवार को अपनी समीक्षा बैठक शुरू कर दी है, और वह उन मौद्रिक नीतिगत उपायों पर विचार-विमर्श करेगी। इनकी घोषणा बुधवार को की जानी है। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा (उन्हें स्थिर रखेगा), क्योंकि ईरान युद्ध के परिणामों के कारण मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ गया है। इस युद्ध के चलते पेट्रोलियम उत्पादों, उर्वरकों और पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में भारी उछाल आया है।
पिछले महीने, सरकार ने आरबीआई के परामर्श से, अगले वित्तीय वर्ष की पहली छमाही के लिए अपना उधार कार्यक्रम घोषित किया था, जिसके तहत छह महीनों में 8.2 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। यह पूरे साल के बजट में तय की गई उधारी का लगभग 51 प्रतिशत है।
आधिकारिक उधारी कैलेंडर (बारोइंग कैलेंडर) के मुताबिक, सालाना कुल उधारी को पहले के अनुमान 17.2 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 16.09 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। उधारी कार्यक्रम में इस तरह की क्रमिक कमी से बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी (नकदी) बने रहने की उम्मीद है, जिससे कारोबार अपने निवेश जारी रख सकेंगे और अर्थव्यवस्था में रोज़गार के अवसर पैदा कर सकेंगे।
--आईएएनएस
एएसएच/डीएससी
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Haryana: शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी पर अनुराग ढांडा ने उठाए सवाल, कहा- इससे बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
Haryana: देश में जनगणना शुरू हो गई है. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा में शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाए जाने को लेकर सवाल किया है. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों और स्टाफ की भयंकर कमी है. ऐसे में शिक्षकों को जनगणना के काम में लगाना छात्रों की पढ़ाई और उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है. ढांडा ने दावा किया है कि कई स्कूलों के सभी शिक्षकों को जनगणना की ड्यूटी पर भेज दिया गया है, जिससे स्कूल बंद जैसे हालात खड़े हो गए हैं.
प्रदेश में शिक्षकों के 15,451 पद खाली
आकंड़ों का हवाला देते हुए अनुराग ढांडा ने कहा कि राज्य में शिक्षकों के कुल 15,451 पद खाली हैं, जिसमें पीजीटी, टीजीटी और प्राथमिक शिक्षकों के हजारों पद शामिल हैं. विभिन्न जिलों में स्थिति गंभीर बनी हुई है. राज्य के सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जिनमें या तो एक ही शिक्षक हैं या फिर कोई भी शिक्षक नहीं हैं.
छात्रों को समय पर नहीं मिल रही किताब
ढांडा ने आरोप लगाया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है, बावजूद इसके छात्रों को समय पर किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई. इस वजह से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. ढांडा ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को जनगणना कार्य से तुरंत मुक्त किया जाए और जनगणना के लिए अलग स्टाफ की नियुक्ति की जाए.
जनगणना कार्य करवाना सेवा नियमों का उल्लंघन
ढांडा का कहना है कि छात्रों को छोड़कर अध्यापकों की ड्यूटी जनगणना में लगवाना प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित है. ये सेवा नियमों का उल्लंघन करता है. अध्यापकों के मनोबल और आत्मसम्मान को इससे ठेस पहुंची है. सरकार को इस काम के लिए संबंधित विभाग के लोगों को तैनात करना चाहिए और जरुरत पड़ने पर नई भर्तियां करनी चाहिए. अध्यापकों और छात्रों के अधिकारों से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.
ढांडा ने दी आंदोलन की चेतावनी
ढांडा ने कहा कि आम आदमी पार्टी शिक्षा और छात्रों के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द जनगणना पर अध्यापकों को भेजने के आदेश को कैंसिल किया जाए, जिससे शिक्षक वह काम कर सकें, जिसके लिए उनकी भर्ती हुई है. छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए. ढांडा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने ये आदेश वापस नहीं लिया तो आम आदमी पार्टी शिक्षकों और अभिभावकों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन कर सकते हैं.
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