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Israel ने Majid Khademi को उड़ाने के बाद South Pars में Iran की Petrochemical Facility पर किया हमला

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब सीमाओं को तोड़कर पूरे क्षेत्र को निगलने पर आमादा दिख रही है। ताजा घटनाक्रम ने इस संघर्ष को और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर बयान धमकी है और हर हमला युद्ध की नई परत खोल रहा है। हम आपको बता दें कि सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की खुफिया इकाई के प्रमुख मेजर जनरल मजीद खादेमी मारे गए। ईरान ने इसे खुला आतंकी हमला बताया है, जबकि इजराइल ने बिना किसी लाग लपेट के साफ कहा कि वह आतंक के सरगनाओं को एक एक कर खत्म करेगा। इजराइली रक्षा मंत्री ने यहां तक कह दिया कि ईरान के नेता अब खुद को निशाने पर समझें क्योंकि शिकार शुरू हो चुका है।

यह बयान सिर्फ बयान नहीं, बल्कि आने वाले और बड़े हमलों का संकेत है। इसी बीच लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में इजराइल ने जोरदार हमला किया। यह इलाका हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है और पहले ही कई बार तबाह हो चुका है। धुएं के गुबार और खाली पड़े मकान इस बात के गवाह हैं कि युद्ध अब शहरों के दिल तक पहुंच चुका है।

इसे भी पढ़ें: Trump की डेडलाइन से पहले ईरान का कड़ा रुख, US के 15 सूत्री Peace Plan को बताया 'अतार्किक'

इस बीच, ईरानी मीडिया के हवाले से दी गई खबर में कहा गया है कि दक्षिण पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र में स्थित सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इजराइल के रक्षा मंत्री ने भी ईरान के असलुयेह में साउथ पार्स पेट्रोकेमिकल संयंत्र पर हमला करने की पुष्टि की है।

उधर, ईरान भी चुप नहीं बैठा। उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने साफ चेतावनी दी कि अगर अमेरिका या इजराइल ने किसी भी तरह की आक्रामकता दिखाई तो उसका जवाब ऐसा होगा जिसे दुनिया याद रखेगी। उन्होंने अमेरिकी धमकियों को युद्ध अपराध तक करार दिया और कहा कि बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।

इस बीच, तनाव की आग खाड़ी देशों तक फैल चुकी है। कुवैत में ईरानी हमले के बाद एक रिहायशी इलाके में मिसाइलों के मलबे गिरे, जिसमें छह लोग घायल हो गए। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली लगातार सक्रिय है, लेकिन यह साफ हो चुका है कि यह जंग अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रही।

सबसे खतरनाक मोर्चा है होर्मुज जलडमरूमध्य। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। यहां ईरान समर्थित इराकी गुट कताइब हिजबुल्लाह ने धमकी दी है कि अगर इसे जबरन खोलने की कोशिश की गई तो तेल और गैस के हर ठिकाने को राख बना दिया जाएगा। यह चेतावनी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सीधे खतरे की घंटी है।

उधर, ईरान के अलग अलग शहरों में हवाई हमलों ने तबाही मचा दी है। इस्लामशहर में एक रिहायशी इमारत पर हमले में कम से कम तेरह लोगों की मौत हो गई। तेहरान, शिराज, अहवाज और करज जैसे शहर भी हमलों की चपेट में हैं। इन हमलों की जिम्मेदारी भले किसी ने खुले तौर पर नहीं ली, लेकिन उंगलियां साफ तौर पर इजराइल और अमेरिका की ओर उठ रही हैं।

इस बीच, इजराइल के शहर हाइफा में ईरानी मिसाइल गिरने से मौतें हुई हैं। यह दिखाता है कि जवाबी कार्रवाई भी उतनी ही घातक है। दोनों तरफ से आम नागरिक सबसे ज्यादा कीमत चुका रहे हैं। साथ ही ईरान ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए एक व्यक्ति को फांसी दे दी, जिस पर अमेरिका और इजराइल के लिए जासूसी करने का आरोप था। यह कदम बताता है कि ईरान अंदरूनी मोर्चे पर भी सख्ती बढ़ा रहा है और किसी भी तरह की बगावत को कुचलने के मूड में है।

उधर, रूस ने साफ कहा है कि पूरा मध्य पूर्व आग में जल रहा है। यह बयान सिर्फ चिंता नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती बेचैनी का संकेत है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब युद्ध रोकने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की की पहल पर पैंतालीस दिन के युद्ध विराम का प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात भी शामिल है। लेकिन ईरान ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वह दबाव में कोई समझौता नहीं करेगा।

देखा जाये तो इस तनाव का असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिख रहा है। कतर के गैस जहाज होर्मुज के पास पहुंचकर वापस लौट गए। इससे साफ है कि यह संघर्ष सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि आर्थिक युद्ध भी बन चुका है। बताया जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका के पंद्रह सूत्री शांति प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है और उसे अव्यावहारिक बताया है। तेहरान का कहना है कि वह अपनी शर्तों पर ही बात करेगा, किसी की धमकी पर नहीं।

बहरहाल, आज हालात यह हैं कि हर मोर्चे पर टकराव है। आसमान में मिसाइलें हैं, जमीन पर मलबा है और समुद्र में जहाज ठहरे हुए हैं। यह सिर्फ एक युद्ध नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के संतुलन को हिला देने वाला संकट बन चुका है। अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो यह आग और भड़केगी और इसकी चपेट में सिर्फ पश्चिम एशिया नहीं बल्कि पूरी दुनिया आ सकती है।

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Best Flour For Summer: जौ, ज्वार, रागी... पेट को ठंडा रखने के लिए गर्मी में खाएं इन आटे से बनी रोटियां

Best Flour For Summer: गेहूं का आटा. भारतीय घरों में ज्यादातर इसी अनाज की बनी रोटियां खाई जाती हैं. क्योंकि यह कीमत में थोड़ा सस्ता होता है और सुपाच्य होता है. यानी जिसे आसानी से पचाया जा सकता है. लेकिन अगर आप चाहते हैं कि गर्मी के मौसम में आपका शरीर ठंडक महसूस करे. पेट में जलन न हो. पाचन तंत्र तंदरूस्त रहे और एनर्जी लेवल मेंटेन रहे, तो आप गेहूं के आटे की जगह ठंडी तासीर वाले अनाजों से बनी रोटियां खा सकते हैं. आयुर्वेद में जौ, ज्वार, चना, सिंघारा को ठंडी तासीर वाला अनाज बताया गया है. इन अनाजों से बनी रोटियों को खाने से बॉडी हीट कम होती है, एसिडिटी से छुटकारा मिलता है, डिहाइड्रेशन और स्लगिश डाइजेशन जैसे प्रॉब्लम कम हो सकते हैं. तो आइए इस लाइफस्टाइल गाइड में गर्मियों में रोटी के लिए बेस्ट आटे कौन से हैं, इसके बारे में जानते हैं. 

1. जौ का आटा

जौ जिसे हम आम बोलचाल की भाषा में बार्ली कहते हैं. इसके अंदर कूलिंग प्रॉपर्टीज बहुत अधिक पाई जाती हैं. पेट को ठंडा करने के लिए लोग इसका पानी या सत्तू बनाकर पीते हैं. यह बॉडी हीट और इंफ्लेमेशन कम करने का काम करता है. इसमें बीटा-ग्लूकेन नाम का सॉल्यूबल फाइबर होता है जो गट हेल्थ, बेटर डाइजेशन और ब्लड शुगर रेगुलेशन के लिए बेहद फायदेमंद है. डायबिटीज मैनेजमेंट में भी इसे असरदार माना गया है. रिसर्च बताती हैं कि जौ स्टार्च डाइजेशन स्लो करता है, गट माइक्रोबायोटा को मॉड्यूलेट करता है और एंटीऑक्सिडेंट बेनिफिट्स देता है.

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2. ज्वार का आटा

ज्वार यानी सोरघम का आटा ग्लूटेन-फ्री होता है. हल्का और पोषण से भरपूर होने की वजह से इसे गर्मी के मौसम में खासतौर पर खाने की सलाह दी जाती है. 100 ग्राम ज्वार के आटे में प्रोटीन, B-कॉम्प्लेक्स विटामिन, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम मिलता है. इसकी कूलिंग प्रॉपर्टीज बॉडी हीट कम करने में मददगार हैं. लो-टू-मॉडरेट ग्लाइसेमिक इंडेक्स की वजह से यह डायबिटीज फ्रेंडली भी है और इसी वजह से न्यूट्रिशनिस्ट इसे Best Flour For Summer की लिस्ट में शामिल करते हैं. हाई फाइबर और लो कैलोरी की वजह से यह वेट लॉस में भी असरदार है. हालांकि जिन्हें वात दोष की समस्या है, वो इसे रेगुलर यूज करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

3. सिंघाड़े का आटा 

सिंघाड़े का आटा भी पचाने में आसान और ग्लूटेन-फ्री है. इसमें विटामिन B6, पोटैशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो इसे पौष्टिक बनाते हैं. आटे की नेचुरल कूलिंग प्रॉपर्टीज बॉडी टेम्परेचर को बैलेंस रखने में मदद करती हैं. गर्मी के मौसम में पूरे दिन एनर्जेटिक और हाइड्रेटेड रहने के लिए आप इसे अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं. सिंघारे में मैंगनीज, कॉपर और पोटैशियम जैसे मिनरल्स भी होते हैं जो हड्डियों और मसल्स को मजबूत बनाने का काम करते हैं. जिन लोगों को मसल्स कमजोर होने या मसल्स क्रैम्प्स की प्रॉब्लम है, उनके लिए सिंघारे का आटा काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

4. चने का आटा

चने का आटा प्रोटीन से भरपूर कूलिंग मिलेट्स है. इसे लोग सत्तू के रूप में खूब पीते हैं. चने के न्यूट्रिशनल गुणों की बात करें, तो एक कप चना में लगभग 20-22 ग्राम प्रोटीन होता है. मसल्स को मजबूत करने में यह बेहद मददगार है. इसमें रिच फाइबर होता है, जो डाइजेशन बेहतर करता है और वेट कंट्रोल में असरदार माना जाता है. ब्लड शुगर स्पाइक किए बिना एनर्जेटिक महसूस करने के लिए आप इसे अपने खानपान में शामिल कर सकते हैं. 

5. गेहूं का आटा

गेहूं का आटा किचन का सबसे कॉमन इंग्रीडिएंट है और गर्मियों में इसकी हल्की कूलिंग प्रॉपर्टीज की वजह से यह खासतौर पर सूटेबल है. आयुर्वेद के अनुसार साबुत गेहूं हेवी, ऑयली, स्वीट और कूलिंग होता है जो पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है. इसमें हाई डायटरी फाइबर होता है जो स्मूद डाइजेशन और ब्लड प्यूरिफिकेशन में मददगार है. यह लगातार एनर्जी लेवल बनाए रखता है और वेट मैनेजमेंट में भी असरदार है. 

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वरुण चक्रवर्ती और सुनील नरेन को मिली सजा, केकेआर का चला चाबूक, टीम से हुई छुट्टी

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