अदरक और सेंधा नमक से बना तेल कानों के दर्द से आराम दिलाने में है प्रभावी, जान लें प्रयोग से पहले की सावधानी
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। कान के दर्द की समस्या के कई कारण हो सकते हैं लेकिन आज के समय में हेडफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल कानों को अधिक क्षति पहुंचाता है।
सुनने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण कानों के सुनने की क्षमता को भी प्रभावित करते हैं लेकिन आयुर्वेद मुख्यत इसे वात दोष का असंतुलन मानता है। आयुर्वेद में कानों के दर्द के लिए एक प्रभावी तरीका बताया गया है, जिसकी मदद से कानों हल्के और शुरुआती दर्द में आराम पाया जा सकता है।
आयुर्वेद में कानों के दर्द को वात की वृद्धि से जोड़ा गया है। वात की वृद्धि होने से कान में शुष्कता और जकड़न हो जाती है, जिससे कानों मे धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगता है। आयुर्वेद में हल्के दर्द के लिए प्रभावी तेल के बारे में बताया गया है, जिसका इस्तेमाल पुराने समय से किया जा रहा है। इसके लिए अदरक का रस, सेंधा नमक और दो बूंद नींबू को मिलाकर सरसों के तेल के साथ गर्म करें। अच्छे से पक जाने पर तेल को छानकर अलग कर लें। ठंडा होने पर तेल को प्रभावित कान में दो बूंद डालें। इससे धीरे-धीरे दर्द से राहत मिलेगी।
तेल में मौजूद अदरक को आयुर्वेद में दर्द निवारक माना जाता है। इसकी तासीर गर्म होती है और स्वभाव दर्द को कम करने वाला होता है। इसके साथ ही अदरक में वात को शांत करने वाले गुण भी होते हैं। वहीं सेंधा नमक भी दर्द में प्रभावी तरीके के काम करता है। ये दोनों पदार्थ मिलकर वात को संतुलित करने से लेकर दर्द को कम करने में मदद करते हैं।
तेल का इस्तेमाल करने से पहले कान को अच्छी तरह से साफ कर लें। कई बार गंदगी होने की वजह से कान में संक्रमण की वजह से भी दर्द हो जाता है। ऐसे में साफ करने के बाद ही तेल का इस्तेमाल करें। इस तेल के इस्तेमाल से पहले कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं। अगर कान में किसी तरह का घाव है, या फिर कान बह रहा है, तब इस तेल को डालने से बचे। इसके लिए चिकित्सक की सलाह है और आगे की प्रक्रिया जानें।
कान में दर्द होने पर कोशिश करें कि नहाते वक्त साबुन का पानी कान के भीतर न जाए। इससे कान में शुष्कता बढ़ती है और चिपचिपा होने की वजह से कान में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में हर दो दिन में कानों की सफाई जरूर करें।
--आईएएनएस
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एंबुलेंस चालक बना डॉक्टर, टेक्नीशियन कर रहे थे ऑपरेशन... कानपुर किडनी रैकेट में खुलती जा रहीं परतें
Kanpur Kidney Racket: कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट घोटाले ने पूरे स्वास्थ्य सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं. इस रैकेट में ऐसे लोग शामिल थे, जिनके पास डॉक्टर बनने की कोई डिग्री नहीं थी, लेकिन वे खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज और यहां तक कि ऑपरेशन भी कर रहे थे.
कब हुई थी मामले की शुरुआत
इस मामले की शुरुआत 31 मार्च को हुई, जब पुलिस ने एक अस्पताल पर छापा मारा. आरोप था कि यहां बिना सरकारी अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे. छापे के दौरान एक महिला मिली, जिसकी किडनी बदली जा चुकी थी, और एक युवक मिला जिसे डोनर बताया गया. दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया.
कार्रवाई में कितनी गिरफ्तारी?
इस कार्रवाई में डॉक्टर दंपती डॉ. सुरजीत सिंह और डॉ. प्रीति आहूजा के साथ कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. जांच में सामने आया कि यह कोई छोटा मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क था, जो अलग-अलग राज्यों से मरीजों को लाकर अवैध ट्रांसप्लांट करता था.
जब एंबुलेंस चालक बन गया ‘डॉक्टर’
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि एक एंबुलेंस चालक, शिवम, खुद को “डॉक्टर शिवम” बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था. पुलिस को उसके मोबाइल में कई वीडियो और फोटो मिले हैं, जिनमें वह मरीजों की जांच करता दिख रहा है. एक वीडियो में वह एक विदेशी महिला से अंग्रेजी में बात करते हुए उसका चेकअप करता नजर आ रहा है, जैसे वह कोई प्रशिक्षित डॉक्टर हो.
विदेशी मरीज भी बने शिकार
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं था. इसने विदेशी नागरिकों को भी निशाना बनाया. दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का भी यहां किडनी ट्रांसप्लांट किया गया. ऑपरेशन के बाद जब उसकी तबीयत बिगड़ी, तो वही एंबुलेंस चालक ‘डॉक्टर’ बनकर उसका इलाज करता दिखा. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.
टेक्नीशियन कर रहे थे ऑपरेशन
जांच का दूसरा बड़ा खुलासा यह है कि ऑपरेशन करने वाले लोग भी असली डॉक्टर नहीं थे. पुलिस के मुताबिक, मुदस्सर अली सिद्दीकी नाम का व्यक्ति, जिसे डॉक्टर बताया जा रहा था, असल में एक ओटी टेक्नीशियन निकला. उसके परिवार ने भी पुष्टि की कि वह डॉक्टर नहीं है.
गाजियाबाद कनेक्शन भी आया सामने
इसके अलावा गाजियाबाद के कुलदीप और राजेश नाम के दो और टेक्नीशियन को गिरफ्तार किया गया है. ये सभी लोग डॉक्टर बनकर ऑपरेशन कर रहे थे. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी सिर्फ आठवीं पास थे, लेकिन मरीजों का इलाज कर रहे थे. एक अन्य आरोपी रोहित, जो कन्नौज का रहने वाला है, पहले गांव में झोलाछाप डॉक्टर था. बाद में उसने नर्सिंग होम खोल लिया और इस गिरोह से जुड़ गया.
अब तक 8 गिरफ्तार, जांच जारी
पुलिस अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. पहले दिन 6 लोगों को पकड़ा गया था, जिनमें डॉक्टर दंपती और एंबुलेंस चालक शामिल थे. बाद में दो और टेक्नीशियन को गिरफ्तार किया गया. पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं. जांच अब लखनऊ, मेरठ, दिल्ली और कन्नौज तक फैल चुकी है.
कैसे चलता था पूरा रैकेट?
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह मरीजों और डोनर्स को अलग-अलग राज्यों से लाता था. उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता और फिर बिना किसी वैध अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया जाता. इस पूरे नेटवर्क में हर व्यक्ति की भूमिका तय थी जैसे कि कोई मरीज लाता था. किसी के ऊपर कागजी काम संभालने की जिम्मेदारी थी और कोई ऑपरेशन करता था.
स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल
इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं जैसे कि-
बिना अनुमति के ट्रांसप्लांट कैसे हो रहे थे?
बिना डिग्री वाले लोग ऑपरेशन कैसे कर रहे थे?
इतने लंबे समय तक यह सब बिना पकड़े कैसे चलता रहा?
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, मामले की गहराई से जांच की जा रही है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. आरोपियों के मोबाइल और दस्तावेजों से कई अहम सुराग मिले हैं.
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