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मजबूत लोन ग्रोथ और फीस से आय में बढ़ोतरी के चलते चौथी तिमाही में बैंकों के मुनाफे में हो सकता है सुधार: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में बैकों के मुनाफे में सालाना आधार पर सुधार हो सकता है। इसकी वजह एडवांस में मजबूत ग्रोथ, फीस से आय में बढ़ोतरी और कम क्रेडिट लागत होना है। यह जानकारी रविवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि मार्जिन पर दबाव जारी रहने के बावजूद, बैंकों से चौथी तिमाही में बेहतर आय प्रदर्शन की उम्मीद है।

मुनाफे में यह सुधार मुख्य रूप से क्रेडिट पोर्टफोलियो के लगातार विस्तार, फीस आधारित आय में वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में स्थिरता आने के साथ क्रेडिट लागत में कमी के कारण हो रहा है।

सिस्टमैटिक्स के अनुसार, दिसंबर तिमाही के अंत में देखी गई लोन वृद्धि की मजबूत गति वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में भी जारी रही है।

खुदरा, सेवा और उद्योग सहित सभी क्षेत्रों में मजबूत मांग के चलते समग्र बैंकिंग प्रणाली ने मजबूत क्रेडिट वृद्धि बनाए रखी है।

रिपोर्ट के अनुसार, क्रेडिट में यह निरंतर वृद्धि आय का एक प्रमुख चालक बनी रहने की उम्मीद है।

साथ ही, उच्च व्यावसायिक मात्रा के कारण फीस आय में क्रमिक वृद्धि होने की संभावना है।

हालांकि, तिमाही के दौरान बढ़ते बॉन्ड यील्ड के कारण ट्रेजरी लाभ पर दबाव बना रह सकता है, जो मुख्य परिचालन से होने वाले लाभ को आंशिक रूप से कम कर सकता है।

वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में मार्जिन के काफी हद तक सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) में क्रमिक रूप से मामूली गिरावट आ सकती है या यह स्थिर रह सकता है, क्योंकि पहले की ब्याज दरों में कटौती के प्रभाव से एडवांस पर यील्ड में गिरावट जारी है।

इस दबाव की कुछ हद तक भरपाई सावधि जमा दरों में कमी के लाभों से होने की संभावना है, जिनका असर अभी भी कुछ समय बाद दिखना शुरू हुआ है।

परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर, असुरक्षित लोन सेगमेंट में तनाव में कमी के संकेत मिले हैं और मार्च तिमाही में इसके नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।

स्थिर रिकवरी और रेटिंग अपग्रेड के कारण अधिकांश बैंकों के लिए डिफॉल्ट नियंत्रण में रहने की संभावना है। इस ट्रेंड से लोन लागत नियंत्रण में रहने की उम्मीद है, जिससे समग्र मुनाफे को समर्थन मिलेगा।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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सरकार ने मिशन 'कर्मयोगी' के तहत वैज्ञानिकों को शासन में प्रशिक्षित करने के लिए कार्यक्रम शुरू किया

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को मिशन कर्मयोगी ढांचे के तहत वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण पर पहला विशेष कार्यक्रम शुरू किया, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक और शैक्षणिक लीडर्स को शासन और निर्णय लेने के कौशल से लैस करना है।

इस पहल की घोषणा साधना सप्ताह के एक विशेष सत्र के दौरान की गई, जहां मंत्री ने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक प्रशिक्षण में लंबे समय से चली आ रही कमी को उजागर किया।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों से जुड़े कई पेशेवर अक्सर शासन प्रक्रियाओं के औपचारिक अनुभव के बिना ही नेतृत्व की भूमिकाएं निभाते हैं, इसलिए संरचित प्रशिक्षण आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नया कार्यक्रम इस समस्या का व्यवस्थित रूप से समाधान करने के लिए बनाया गया है, जिससे अनौपचारिक या स्व-अध्ययन विधियों पर निर्भरता कम हो सके, जो अनियमित और समय लेने वाली हो सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण मॉड्यूल समय के साथ विकसित होते रहेंगे ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ तालमेल बिठाया जा सके, साथ ही प्रौद्योगिकी और मानवीय निर्णय के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

मंत्री ने क्षमता निर्माण आयोग के लिए नई प्राथमिकताओं की भी रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें विशिष्ट प्रशासनिक कार्यों के लिए विशेष मॉड्यूल का निर्माण शामिल है।

उन्होंने अधिकारियों के बीच प्रक्रियात्मक समझ को बेहतर बनाने के लिए संसदीय प्रश्नों के संचालन पर एक केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।

इसके अतिरिक्त, नव-नियुक्त सिविल सेवकों और सहायक सचिवों के लिए शासन प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता हेतु संक्षिप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं।

दृष्टिकोण में बदलाव पर जोर देते हुए सिंह ने कहा कि क्षमता निर्माण को नियम-आधारित प्रणालियों से आगे बढ़कर अधिक लचीले, भूमिका-आधारित मॉडल की ओर ले जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शासन में निजी क्षेत्र की प्रथाओं को एकीकृत करना आवश्यक हो गया है, क्योंकि आज के तेजी से बदलते परिवेश में पारंपरिक पृथक्करण अब प्रभावी नहीं रह गया है।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मिशन कर्मयोगी के अगले चरण में सार्वजनिक संस्थानों को अधिक अनुकूलनीय और मानवीय बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है, फिर भी शासन व्यवस्था नागरिक-केंद्रित रहनी चाहिए।

उन्होंने क्षमता निर्माण आयोग और विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली के बीच क्षमता निर्माण में वैश्विक ज्ञान साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर का भी निरीक्षण किया।

--आईएएनएस

एमएस/

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