सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। यह पावन महीना भगवान शिव की आराधना, कांवड़ यात्रा, हरियाली और श्रृंगार से सजा बेहद खास होता है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करते हैं और उनसे मनचाहा वर मांगते हैं।
सावन के महीने में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं। खासकर सावन में शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। आइए आपको बताते हैं सावन की शिवरात्रि कब है और इस दिन का क्या महत्व है।
कब है सावन की शिवरात्रि?
श्रावण मास की चतुर्दशी तिथि को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार सावन शिवरात्रि की 11 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी है। शिवरात्रि की तिथि 4 बजकर 43 मिनट पर शुरु होगी और समापन 12 अगस्त को रात 01 बजकर 51 मिनट पर होगा। उदया तिथि और निशिता मुहूर्त के आधार पर 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाना काफी शुभ माना जाएगा। वहीं, 11 अगस्त की मध्यरात्रि को भोलेनाथ का पूजन बहुत फलदाई माना जाता है।
सावन शिवरात्रि का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़िये पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर मुख्य शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से भोलेनाथ की पूजा करने से भगवान शिव अधिक प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है जो कि इस प्रकार है, समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विष ग्रहण किया था, तो देवताओं ने गंगाजल अर्पित किया था।
सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम
- पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
- जल अर्पित करते समय मुंह उत्तर दिशा में रखें।
- जब आप जल अर्पित करें, तो उस समय 'ॐ नमः शिवाय' या 'बम बम भोले' का जाप करें।
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भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर को संवेदनशील रक्षा संबंधी सूचनाएं कथित तौर पर लीक करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने 31 मई की रात गिरफ्तार किया था। आरोपी अधिकारी के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह मामला किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं, बल्कि रणनीतिक सैन्य खुफिया जानकारी जुटाने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी विंग कमांडर एक फील्ड यूनिट में तैनात था और पिछले कुछ समय से भारतीय वायुसेना की खुफिया इकाई की निगरानी में था। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, अधिकारी पहले से ही संदेह के दायरे में था और उस पर सक्रिय निगरानी रखी जा रही थी। बाद में उसकी गतिविधियों से संबंधित विशिष्ट जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा की गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।
सोशल मीडिया के जरिए बनाया गया निशाना
जांच में सामने आया है कि अधिकारी को कथित तौर पर ‘हनी ट्रैप’ के जरिए निशाना बनाया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, निजी जीवन में कठिन दौर से गुजर रहे अधिकारी से सोशल मीडिया पर एक महिला ने संपर्क किया। दोनों के बीच चैट और वीडियो कॉल के जरिए लगातार बातचीत होने लगी। धीरे-धीरे महिला ने अधिकारी का विश्वास हासिल किया और इसके बाद उससे सैन्य गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां मांगनी शुरू कर दीं।
सूत्रों के अनुसार, महिला ने सैन्य इकाइयों की आवाजाही और तैनाती से संबंधित जानकारी के साथ-साथ फोटो, वीडियो और अन्य गोपनीय सामग्री उपलब्ध कराने को कहा। आरोप है कि विंग कमांडर ने डिजिटल माध्यमों के जरिए महत्वपूर्ण दस्तावेज और डेटा उसके साथ साझा किए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस दौरान कितनी और किस स्तर की संवेदनशील जानकारी बाहर गई।
सहकर्मी के मोबाइल में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल कराने का आरोप
मामले में एक और गंभीर पहलू तब सामने आया जब कथित तौर पर अधिकारी को अपने एक सहकर्मी के मोबाइल फोन में एक विशेष ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह ऐप लक्षित स्पाइवेयर या रिमोट-एक्सेस मालवेयर की तरह काम कर सकता था। ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल मोबाइल से डेटा चोरी करने, लोकेशन ट्रैक करने या बातचीत और संचार को इंटरसेप्ट करने के लिए किया जा सकता है।
पुलिस को संदेह है कि इस माध्यम से विदेशी ऑपरेटरों को दूसरे अधिकारी के डिवाइस तक भी पहुंच दिलाने का प्रयास किया गया। इससे जांच का दायरा केवल कथित दस्तावेज लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सैन्य कर्मियों के डिजिटल उपकरणों और संचार नेटवर्क की संभावित जासूसी तक पहुंच गया है।
पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की भूमिका की जांच
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सोशल मीडिया पर महिला की पहचान कथित तौर पर फर्जी थी और वह पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रही थी। जांच एजेंसियां अब अधिकारी और महिला के बीच हुई डिजिटल बातचीत, साझा की गई फाइलों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। साथ ही, कथित विदेशी हैंडलर्स और पूरे संचार नेटवर्क की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन रणनीतिक सैन्य खुफिया जानकारी जुटाने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जांच एजेंसियां यह भी आकलन कर रही हैं कि कथित रूप से लीक हुई जानकारी से राष्ट्रीय सुरक्षा को कितना नुकसान पहुंचा और क्या इसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी शत्रुतापूर्ण गतिविधि में किया जा सकता था।
इस बीच, भारतीय वायुसेना ने मामले की जांच जारी होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि अधिकारी पहले से निगरानी में था और उसे उपयुक्त कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया। फिलहाल दिल्ली पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और विदेशी कड़ियों की जांच कर रही है, जबकि अधिकारी के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई जारी है।
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