पाकिस्तान नहीं कर पा रहा राज कपूर की हवेली की देखभाल, भूकंप के झटकों से ढह गया एक हिस्सा
Raj Kapoor Old Haveli in Pakistan: पाकिस्तान के पेशावर में राज कपूर के पैतृक घर कपूर हवेली से जुड़ी एक अहम और चिंताजनक खबर सामने आई है. जी हां, पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, पेशावर में हाल ही में हुई भारी बारिश और भूकंप के झटकों के कारण इस ऐतिहासिक इमारत का एक हिस्सा ढह गया है, जिससे इसके प्रोटेक्शन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
बारिश और भूकंप का दोहरा असर
स्थानीय अधिकारियों और निवासियों के मुताबिक, लगातार हो रही तेज बारिश ने पहले से ही जर्जर हालत में मौजूद हवेली को और कमजोर कर दिया था. इसी दौरान शुक्रवार रात आए भूकंप के झटकों ने इमारत को और अस्थिर बना दिया, जिसके चलते इसकी एक दीवार ढह गई. खैबर पख्तूनख्वा विरासत परिषद के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने इस नुकसान की पुष्टि करते हुए बताया कि भूकंप के बाद हवेली का हिस्सा गिर गया है और रमैनिंग ढांचे की स्थिति भी सुरक्षित नहीं है. हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के हताहत या घायल होने की कोई सूचना नहीं मिली है.
प्रोटेक्शन को लेकर बढ़ती चिंता
शकील वहीदुल्लाह ने पुरातत्व विभाग और प्रांतीय सरकार से अपील की है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते प्रोटेक्शन नहीं किया गया, तो यह इमारत पूरी तरह नष्ट हो सकती है, जिससे हमारे एरिया की सांस्कृतिक विरासत को भारी नुकसान पहुंचेगा.
कपूर परिवार की ऐतिहासिक धरोहर
कपूर हवेली भारतीय सिनेमा के मशहूर कपूर परिवार से जुड़ी हुई है. यहां महान एक्टर पृथ्वीराज कपूर रहते थे, जो इस परिवार के पहले सदस्य थे जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा. इस हवेली का निर्माण उनके पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918 से 1922 के बीच करवाया था. इसी ऐतिहासिक घर में दिग्गज अभिनेता राज कपूर और उनके चाचा त्रिलोक कपूर का जन्म हुआ था.
हवेली की खासियत और आर्किटेक्चर
अपने समय में यह हवेली शानदार आर्किटेक्चर का उदाहरण मानी जाती थी. इस इमारत में लगभग 40 कमरे थे, जो इसकी भव्यता को दर्शाते हैं. हवेली का मुख्य हिस्सा फूलों की नक्काशी और ट्रेडिशनल विंडोज से सजा हुआ था. लंबे समय से वीरान रहने के बावजूद इसकी आर्टिस्टिक सुंदरता आज भी झलकती है. ये वही स्थान है जहां कपूर परिवार के कई सदस्यों का जन्म और बचपन बीता.
विभाजन के बाद वीरान हुई हवेली
भारत का विभाजन 1947 के दौरान कपूर परिवार को ये हवेली छोड़नी पड़ी. राज कपूर सहित परिवार के कई सदस्य भारत आ गए और अपने पीछे इस ऐतिहासिक घर और उससे जुड़ी यादें छोड़ गए. बाद के सालों में ऋषि कपूर और रणधीर कपूर ने 1990 के दशक में इस हवेली का दौरा किया था, जिससे इसकी ऐतिहासिक पहचान एक बार फिर चर्चा में आई.
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