ईरान का दावा: इजरायल से जुड़े जहाज पर ड्रोन हमला, पोत में लगी आग
तेहरान, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने शनिवार को दावा किया कि उसने इजरायल से जुड़े एक वाणिज्यिक जहाज पर ड्रोन हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया।
आईआरजीसी नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि यह हमला हॉर्मुज स्ट्रेट में किया गया। वहीं, अपनी आधिकारिक न्यूज एजेंसी ‘सेपाह न्यूज’ के जरिए जारी बयान में कहा गया कि बहरीन के खलीफा बिन सलमान पोर्ट पर “एमसीएस इशिका” नामक इजरायल-स्वामित्व वाले जहाज को निशाना बनाया गया।
ईरान के अनुसार, यह जहाज किसी तीसरे देश के झंडे के तहत चल रहा था और उस पर “शक्तिशाली प्रोजेक्टाइल” से हमला किया गया। इसे पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर किए जा रहे हमलों की 95वीं कड़ी बताया गया।
इस बीच, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने भी शनिवार को दावा किया कि उसने तेहरान में कई अहम सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। आईडीएफ के मुताबिक, इन हमलों में आईआरजीसी के एयर डिफेंस सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण केंद्र और हथियार अनुसंधान व उत्पादन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
आईडीएफ ने कहा कि ये हमले ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया घटनाक्रम से पहले शुक्रवार को अमेरिकी सेना के दो लड़ाकू विमान भी ईरानी हमले की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। इनमें से एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है।
उधर, ईरान की अर्ध-आधिकारिक तसनीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिमी प्रांत खुजेस्तान में पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर अमेरिका-इजरायल के हमलों में कम से कम पांच लोग घायल हुए हैं।
इन कंपनियों में फजर-1 और 2, रेगल, अमीरकबीर, बंदर इमाम और बुअली सिना शामिल हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। खोर्रमशहर शहर का शलामचेह सीमा व्यापार टर्मिनल भी हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
बताया गया कि माहशहर स्पेशल पेट्रोकेमिकल जोन को एहतियातन खाली करा लिया गया है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान लगातार इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
इसरो प्रमुख ने नासा के 'आर्टेमिस II' मिशन की सराहना की, कहा- 'शानदार सफलता की उम्मीद'
तिरुवनंतपुरम, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन वी. नारायणन ने शनिवार को नासा के नवीनतम आर्टेमिस II मिशन की सराहना की और यह भी विश्वास व्यक्त किया कि यह मिशन शानदार रूप से सफल होगा।
नासा का आर्टेमिस II मून मिशन 2 अप्रैल को अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य से लॉन्च हुआ। यह 50 से ज्यादा सालों में चांद के चारों ओर इंसानों की पहली उड़ान है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं। यह अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत इंसानों वाला पहला मिशन है। चार सदस्यों वाले इस क्रू में नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच के साथ-साथ कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।
नारायणन ने पत्रकारों से कहा, 1969 में, पहली बार इंसान चांद पर उतरा था। अब, 57 साल बाद, वे आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए फिर से चांद पर उतरना चाहते हैं। यह उसी दिशा में एक कदम है। यह एक ऑर्बिटल मिशन है। मुझे लगता है कि वे चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे, और फिर वापस आ जाएंगे।
इसरो प्रमुख ने बताया कि उन्होंने भी टेलीविजन पर इस लॉन्च को देखा था, और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी की अपनी यात्रा के दौरान उन्हें इस मिशन के लॉन्च व्हीकल को देखने का भी मौका मिला था।
उन्होंने कहा, मुझे भी इस लॉन्च को देखने का सौभाग्य मिला, जो 2 अप्रैल की सुबह लगभग 4:05 बजे (आईएसटी) लॉन्च हुआ था। असल में, कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी की हमारी पिछली यात्रा के दौरान, यह व्हीकल अभी बन ही रहा था। हमें इसका पहला चरण देखने का मौका मिला था।
इसरो प्रमुख ने आर्टेमिस II लॉन्च व्हीकल की तकनीकी बारीकियों की भी खूब तारीफ की और कहा, यह इंसानी वैज्ञानिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। मुझे 100 प्रतिशत यकीन है कि यह मिशन जबरदस्त रूप से सफल होगा, और आगे चलकर (इंसानों को चांद पर) उतारने का रास्ता साफ करेगा। यह इंसानों के लिए एक बहुत ही अहम मिशन है।
नारायणन ने भारत के गगनयान मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में भी बात की, जो लद्दाख में मित्र मिशन के तहत ट्रेनिंग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, हमने परसों ही इस प्रोग्राम का उद्घाटन किया था। वे अभी लगभग 4 किलोमीटर की ऊंचाई पर हैं और गहन ट्रेनिंग ले रहे हैं। यह गगनयात्री ट्रेनिंग प्रोग्राम का ही एक हिस्सा है।
भारत के चुने हुए अंतरिक्ष यात्री, जिन्हें गगनयात्री भी कहा जाता है, और जिन्हें इसरो के पहले इंसानी अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया है, वे इस समय लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में ऊंचाई पर रहने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। इसके अलावा, भारत के मून मिशन और आने वाले लॉन्च के बारे में इसरो के चेयरमैन ने कहा, हम जल्द से जल्द लॉन्च करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह फाइनेंशियल ईयर अभी शुरू ही हुआ है। बहुत सी चीजें प्लान की गई हैं।
उन्होंने आगे कहा, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सभी प्रोग्राम पर काम कर रहे हैं। अंतरिक्ष गतिविधियों में देश के लिए जरूरी चीजें हासिल करने के लिए जो भी बेहतरीन कोशिश जरूरी है, हम वह कर रहे हैं।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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