सप्लाई चेन पर असर कम करने के लिए काम कर रही सरकार, फार्मा सेक्टर पर कोई असर नहीं : वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने शनिवार को कहा कि सरकार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आपूर्ति श्रृंखलाओं में कम से कम रुकावट सुनिश्चित करने पर काम कर रही है, और साथ ही निर्यात और आयात में संभावित गिरावट के लिए भी तैयार है।
हैदराबाद में एक चिंतन शिविर सत्र के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि इस पहल का उद्देश्य सरकारी और औद्योगिक हितधारकों को एक साथ लाना है, ताकि चुनौतियों की पहचान की जा सके और एक स्पष्ट रूपरेखा तैयार की जा सके।
अधिकारी ने यह भी कहा कि भारत फार्मास्यूटिकल निर्यात की विकास गति को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से निर्देशित यह प्रयास, विस्तृत परामर्शों के माध्यम से सभी हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को परिभाषित करना चाहता है।
अग्रवाल ने बताया कि चर्चाएं बायोसिमिलर, बायोलॉजिक्स और नवीन दवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत के नेतृत्व को बनाए रखने पर केंद्रित थीं, साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी कि निर्यात और आयात दोनों की आपूर्ति श्रृंखलाएं लचीली बनी रहें और बाहरी झटकों से सुरक्षित रहें।
भारत का फार्मास्यूटिकल उद्योग, जिसका मूल्य 60 बिलियन डॉलर से अधिक है, निर्यात और वैश्विक स्वास्थ्य सेवा आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक प्रमुख योगदानकर्ता बना हुआ है।
मध्य पूर्व में चल रहे संकट पर, अधिकारी ने कहा कि इसका ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है, जो इस क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उन्होंने उद्योग की अनुकूलन क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, भारत का उद्योग बहुत ही अनुकूलनशील और लचीला है। हम भविष्य में इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होंगे। साथ ही यह भी जोड़ा कि फिलहाल कीमतों पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ा है।
अग्रवाल ने कहा कि सरकार किसी भी उभरती चुनौती का समाधान करने के लिए औद्योगिक हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेगी कि आपूर्ति अप्रभावित रहे।
इस सप्ताह की शुरुआत में, पीएम मोदी ने कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की एक बैठक की अध्यक्षता की, ताकि पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति की समीक्षा की जा सके और भारत के राष्ट्रीय हितों पर इसके संभावित प्रभाव का आकलन किया जा सके।
28 फरवरी, 2026 को तनाव बढ़ने के बाद से यह दूसरी सीसीएस बैठक थी; यह तनाव अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों के बाद ईरानी ठिकानों पर हुए हमलों और उसके बाद की जवाबी कार्रवाइयों के कारण बढ़ा था, जिसके चलते इस क्षेत्र में, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में, व्यवधान उत्पन्न हुए हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता आई है।
--आईएएनएस
एससीएच
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान का दावा: इजरायल से जुड़े जहाज पर ड्रोन हमला, पोत में लगी आग
तेहरान, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने शनिवार को दावा किया कि उसने इजरायल से जुड़े एक वाणिज्यिक जहाज पर ड्रोन हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया।
आईआरजीसी नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि यह हमला हॉर्मुज स्ट्रेट में किया गया। वहीं, अपनी आधिकारिक न्यूज एजेंसी ‘सेपाह न्यूज’ के जरिए जारी बयान में कहा गया कि बहरीन के खलीफा बिन सलमान पोर्ट पर “एमसीएस इशिका” नामक इजरायल-स्वामित्व वाले जहाज को निशाना बनाया गया।
ईरान के अनुसार, यह जहाज किसी तीसरे देश के झंडे के तहत चल रहा था और उस पर “शक्तिशाली प्रोजेक्टाइल” से हमला किया गया। इसे पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर किए जा रहे हमलों की 95वीं कड़ी बताया गया।
इस बीच, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने भी शनिवार को दावा किया कि उसने तेहरान में कई अहम सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। आईडीएफ के मुताबिक, इन हमलों में आईआरजीसी के एयर डिफेंस सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण केंद्र और हथियार अनुसंधान व उत्पादन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
आईडीएफ ने कहा कि ये हमले ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया घटनाक्रम से पहले शुक्रवार को अमेरिकी सेना के दो लड़ाकू विमान भी ईरानी हमले की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। इनमें से एक पायलट को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा लापता है।
उधर, ईरान की अर्ध-आधिकारिक तसनीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिमी प्रांत खुजेस्तान में पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर अमेरिका-इजरायल के हमलों में कम से कम पांच लोग घायल हुए हैं।
इन कंपनियों में फजर-1 और 2, रेगल, अमीरकबीर, बंदर इमाम और बुअली सिना शामिल हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। खोर्रमशहर शहर का शलामचेह सीमा व्यापार टर्मिनल भी हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।
बताया गया कि माहशहर स्पेशल पेट्रोकेमिकल जोन को एहतियातन खाली करा लिया गया है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेहरान समेत कई ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान लगातार इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है।
--आईएएनएस
डीएससी
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