वैश्विक चुनौतियों के बीच फार्मा सेक्टर का निर्यात और सप्लाई चेन मजबूत करने पर सरकार का जोर: अधिकारी
हैदराबाद, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना की राजधानी में फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर पर चिंतन शिविर का आयोजन किया गया, जिसको लेकर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश अग्रवाल ने मीडिया से बात की। इस दौरान राजेश अग्रवाल ने कहा कि चिंतन शिविर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर गहन मंथन करना है। इस पहल के तहत सेक्टर से जुड़ी चुनौतियों को समझते हुए उनके समाधान और भविष्य की स्पष्ट दिशा तय की जा रही है।
उन्होंने बताया कि यह मंच केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकार, उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए ठोस रणनीति तैयार की जाती है। खासतौर पर फार्मा सेक्टर के लिए यह अहम है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और तेजी से विकसित होता क्षेत्र है।
अमेरिका द्वारा फार्मास्युटिकल सेक्टर पर लगाए गए संभावित टैरिफ को लेकर अग्रवाल ने कहा कि शुरुआती समझ के मुताबिक भारतीय जेनेरिक दवाएं इन टैरिफ से बाहर हैं। ऐसे में भारत के फार्मा निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, कुछ इनोवेटिव या पेटेंटेड दवाओं पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है। यदि किसी भी सेगमेंट में भारतीय उद्योग को दिक्कत आती है, तो उसे इस समझौते के तहत उठाया जाएगा और समाधान खोजा जाएगा।
अग्रवाल ने आगे कहा कि भारत का फार्मा सेक्टर मजबूत स्थिति में है, और केंद्र सरकार इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए लगातार नए बाजारों और उत्पादों पर ध्यान दे रही है। पिछले 5-6 वर्षों में भारत ने 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किए हैं, जो करीब 38 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। इनका कुल आर्थिक आकार 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।
अग्रवाल के मुताबिक, ये समझौते भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेंगे, बाजारों में विविधता लाएंगे और घरेलू उद्योग को मजबूत करेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट अभी कुछ ही हफ्तों पुराना है, इसलिए इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है।
उन्होंने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी बाहरी चुनौतियां समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन भारत ने हर बार इनसे निपटते हुए आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई है।
अग्रवाल के अनुसार, करीब 60 अरब डॉलर के आकार वाला भारत का फार्मा उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, आधुनिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि बायोसिमिलर, बायोलॉजिक्स और इनोवेटिव दवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।
अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल दवाओं की कीमतों पर किसी बड़े असर के संकेत नहीं हैं। लेकिन अगर भविष्य में कोई समस्या आती है, तो सरकार और उद्योग मिलकर उसका समाधान निकालेंगे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि दवाओं की सप्लाई किसी भी हाल में बाधित न हो। सरकार और उद्योग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर दवाओं की उपलब्धता बनी रहे और भारत का फार्मा सेक्टर अपनी विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
चीन-श्रीलंका संबंध आपसी सम्मान पर आधारित आदर्श बनेंगे: श्रीलंकाई प्रधानमंत्री
बीजिंग, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। हाल ही में श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरासुरिया ने चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि आपसी सम्मान और विश्वास पर आधारित चीन-श्रीलंका संबंध द्विपक्षीय सहयोग का एक आदर्श बनेगा, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा।
चीन की अपनी हालिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री अमरासुरिया ने पेइचिंग में फॉरबिडन सिटी और ग्रेट वॉल जैसे प्रमुख सांस्कृतिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने विशेष रूप से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के इतिहास संग्रहालय का भी भ्रमण किया। उन्होंने कहा, “चीन की उपलब्धियों को देखकर ऐसा लगता है मानो यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। आज चीन की वैश्विक स्थिति केवल उत्पादन और निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नवाचार और प्रगति के प्रति भी प्रतिबद्ध है। वैश्विक मंच पर चीन लगभग हर क्षेत्र में खोज और नेतृत्व करता दिखाई देता है।”
राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बारे में बात करते हुए अमरासुरिया ने कहा कि वह एक अत्यंत करिश्माई नेता हैं और उनसे मिलना तथा विचारों का आदान-प्रदान करना उनके लिए सम्मान की बात थी। उन्होंने “मानव जाति के साझा भविष्य वाले समुदाय” की अवधारणा का समर्थन करते हुए कहा, “हमें मिलकर काम करना चाहिए और अलगाववादी सोच को त्याग देना चाहिए।” उनका मानना है कि मौजूदा अशांत वैश्विक माहौल में विभिन्न देशों के नेताओं को शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए, क्योंकि एक देश के कदमों का प्रभाव अन्य देशों और समाजों पर भी पड़ता है।
अमरासुरिया ने चीन-श्रीलंका संबंधों के भविष्य को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि दोनों देशों के विचार और दृष्टिकोण में काफी समानता है। उनका मानना है कि यह संबंध एक मजबूत और स्थिर द्विपक्षीय साझेदारी का उदाहरण बनेगा। उन्होंने हरित ऊर्जा, शिक्षा के आधुनिकीकरण, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की उम्मीद जताई। बेल्ट एंड रोड पहल में शामिल होने वाले शुरुआती देशों में से एक होने के नाते श्रीलंका इस साझा विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी जारी रखेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि श्रीलंका एक द्वीप राष्ट्र है, फिर भी यहां समृद्ध और विविध पर्यटन संसाधन मौजूद हैं और लोग बेहद गर्मजोशी से अतिथियों का स्वागत करते हैं। उन्होंने अधिक से अधिक चीनी पर्यटकों के श्रीलंका आने की आशा जताई। उनका विश्वास है कि पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ेगा, जिससे दोनों देशों के लोगों को लाभ मिलेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
--आईएएनएस
डीकेपी/
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