बारिश का मौसम है बेस्ट! किसान की तरह घर में उगाएं लौकी-गिलकी, बाजार की सब्जियों से मिलेगी छुट्टी
Gardening Tips: छतरपुर जिले के देवता प्रसाद बताते हैं कि बैंगन, टमाटर और मिर्च की सब्जियां तो बारह महीने लगाते हैं. लेकिन अभी बारिश का सीजन है तो भिंडी, गिलकी, करेला, लौकी, तोरई और खीरा जैसी सब्जियां भी लगा रखी हैं. साथ ही वह हर साल हल्दी भी लगाते हैं.
Sawan 2026: शिवजी को कौन-से फूल हैं सबसे प्रिय? जानें बेलपत्र, धतूरा और शमी का महत्व
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से शिवलिंग पर जल अर्पित करने और प्रिय पुष्प चढ़ाने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
सावन में क्यों बढ़ जाता है शिव पूजा का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण मास में कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण अविवाहित युवक-युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से सावन में शिव पूजा और व्रत करते हैं। इसके अलावा इस महीने में कांवड़ यात्रा और शिवरात्रि का भी विशेष महत्व माना जाता है।
शिव जी को कौन-से फूल हैं प्रिय?
शिव पूजा में सफेद रंग के फूलों को विशेष महत्व दिया जाता है। यदि विस्तृत पूजा संभव न हो तो केवल श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल अर्पित करना भी शुभ माना गया है। इसके साथ बेलपत्र, धतूरा, आक, शमी और अन्य पूजन सामग्री भी भगवान शिव को अर्पित की जाती है।
इन फूलों का विशेष महत्व
- आक का एक फूल चढ़ाने से स्वर्ण दान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
- हजार आक के फूलों से अधिक पुण्य एक कनेर का फूल अर्पित करने से मिलता है।
- हजार कनेर के फूलों से श्रेष्ठ एक बेलपत्र माना गया है।
- हजार बेलपत्रों के बराबर एक द्रोण (गूमा) का फूल फलदायी माना जाता है।
- हजार गूमा फूलों से अधिक एक चिचिड़ा (लटजीरा) का फूल श्रेष्ठ माना गया है।
- हजार चिचिड़ा फूलों के बराबर एक कुश का फूल बताया गया है।
- हजार कुश के फूलों से अधिक पुण्य एक शमी का पत्ता देता है।
- हजार शमी के पत्तों से बढ़कर एक नीलकमल का महत्व माना गया है।
- हजार नीलकमलों से अधिक फलदायी एक धतूरा माना गया है।
- वहीं हजार धतूरों से भी अधिक शुभ फल एक शमी का फूल अर्पित करने से प्राप्त होने की मान्यता है।
धार्मिक मान्यताओं में पूजा सामग्री का महत्व अवश्य बताया गया है, लेकिन भगवान शिव की आराधना में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा और सच्ची भक्ति का माना जाता है। यदि सभी पूजन सामग्री उपलब्ध न हो तो भी भक्त केवल जल अर्पित कर, 'ॐ नमः शिवाय' का जप करते हुए शिवजी की उपासना कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि निष्कपट भाव से की गई पूजा भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News18
Haribhoomi









