होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने रख दी ये शर्त, कहां फंसा ओमान संग बातचीत में पेंच?
Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में अभी भी तनाव बना हुआ है. अमेरिका और ईरान की जंग के चलते दुनिया का सबसे बड़ा तेल सप्लाई रूट होर्मुज भी बंद पड़ा है. जिसके चलते समंदर में सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच इस जलमार्ग को मैनेज करने के लिए एक डील पर बातचीत हो रही है.
- इस डील के तहत ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी और इजरायली जहाजों के प्रवेश पर रोक लगाने और वहां से गुजरने की इजाजत देने से पहले विरोधी देशों से मुआवजा मांगने की कोशिश करेगा.
- ईरान होर्मुज को अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. वहीं दूसरी और ट्रंप ने इसे छुड़ाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है. जिससे ईरान की सभी चाल अब तक नाकाम साबित हुई हैं.
- ऐसे में मजबूरन ईरान ने ओमान को टेबल पर बिठाया है. इस वार्ता से कुछ सकारात्म संकेत भी मिले हैं. हालांकि इसमें पेंच फंस गया है. क्योंकि ईरान ने होर्मुज को खोलने के बदले में 3 बड़ी शर्तें रखी हैं.
होर्मुज को लेकर ईरान-ओमान की बात बढ़ी आगे
बता दें कि अमेरिका और ईरान की जंग के चलते होर्मुज पिछले पांच महीनों से बंद है. अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए पर्दे के पीछे सौदेबाजी लगातार हो रही है. ईरान और ओमान के बीच समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ गई है.
- ईरान का कहना है कि ओमान के साथ होर्मुज को फिर से खोलने का खाका लगभग तैयार हो चुका है लेकिन वाशिंगटन से हरी झंडी मिलना अभी भी बाकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटाने के लिए ईरान ने जो तीन मांगें रखी हैं वो क्या-क्या हैं. साथ ही अमेरिका इस डील पर हस्ताक्षर करने से क्यों कतरा रहा है.
ईरान ने होर्मुज को लेकर रखी ये तीन शर्त
ईरान अमेरिका के साथ जंग का पूरा फायदा उठाना चाहता है. ऐसे में तेहरान होर्मुज के पूरे इलाके पर सिर्फ अपना दबदबा कायम रखना चाहता है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने वार्ता की मेज पर तीन बड़ी शर्तें रखी हैं. इनमें पहली शर्त भारी-भरकम टोल टैक्स लगाना है.
- दरअसल, ईरान की पहली मांग है कि होर्मुज से गुजरने वाले हर कमर्शियल और कार्गो जहाज से उसके माल की कुल कीमत का 5 से 7 प्रतिशत तक शुल्क लिया जाएगा. हालांकि यहां ईरान को इस बात की याद दिलाना जरूरी है कि इस जंग से पहले इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से सभी देश बिना किसी शुल्क के व्यापार करते रहे है.
- इसके साथ ही ईरान होर्मुज पर अपना ट्रैफिक कंट्रोल चाहता है. ईरान चाहता है कि इस पूरे समुद्री रास्ते से कौन सा जहाज गुजरेगा और किसे रोका जाएगा, इसका अंतिम फैसला करने का कानूनी और सैन्य अधिकार सिर्फ तेहरान के पास ही होना चाहिए.
इसके साथ ही ईरान की संसद में एक कड़ा बिल लाया जा रहा है. इसके तहत अमेरिका, इजरायल या फिर ईरान-विरोधी रुख रखने वाले देशों के जहाजों के प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी लगाना चाहता है. यही नहीं ईरान नियम तोड़ने वाले जहाजों के माल का 20 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के रूप में जब्त करने की भी तैयारी कर रहा है.
वहीं होर्मुज को लेकर आ रही नई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान शुल्क लेने वाली अपनी शर्त को छोड़ भी सकता है. हालांकि, वो इस पूरे समुद्री रास्ते पर अपना दबदबा और मिलिट्री कंट्रोल हासिल करने की शर्तों को कम नहीं करना चाहता.
'राष्ट्रपति व्हाइट हाउस का केवल किरायेदार', अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के 400 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट पर लगाई रोक
Trump Ballroom Project: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक माने जाने वाले व्हाइट हाउस के नए बॉलरूम निर्माण पर कानूनी संकट गहरा गया है. शुक्रवार को एक संघीय अपील अदालत ने 400 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम लागत वाले इस प्रोजेक्ट के काम को रोकने का आदेश दिया है. अदालत का यह फैसला ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति 'मालिक' नहीं, बल्कि 'अस्थायी किरायेदार' हैं
वाशिंगटन स्थित 'यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट' ने दो-एक के बहुमत से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया. अदालत ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के अधिकारों की सीमा तय करते हुए स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस ऐतिहासिक इमारत के स्थायी मालिक नहीं होते, बल्कि उनकी हैसियत महज एक अस्थायी किरायेदार की होती है. जजों ने अपने आदेश में कहा कि वाइट हाउस के बुनियादी ढांचे में इतने बड़े स्तर का बदलाव या री-डिजाइनिंग बिना अमेरिकी कांग्रेस की विधायी मंजूरी के नहीं की जा सकती. अदालत का स्पष्ट रूप से यह मानना था कि इतना बड़ा बॉलरूम बनना चाहिए या नहीं, यह तय करना कांग्रेस का अधिकार है, न कि कार्यपालिका खुद ही अकेले इसका फैसला ले सकती है.
ऐतिहासिक हिस्से को गिराने से शुरू हुआ विवाद
इस पूरी कानूनी लड़ाई की नींव तब पड़ी थी जब ट्रंप प्रशासन ने इस बॉलरूम प्रोजेक्ट का रास्ता साफ करने के मकसद से व्हाइट हाउस के ऐतिहासिक 'ईस्ट विंग' को ढहा दिया था. इस कदम के तुरंत बाद ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था 'नेशनल ट्रस्ट फॉर हिस्टोरिक प्रिजर्वेशन' ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. अपील कोर्ट के इस ताजा फैसले ने उसी संस्था के पक्ष में दी गई शुरुआती रोक को ही बरकरार रखा है.
ट्रंप की सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी और तीखी प्रतिक्रिया
हालांकि, अपील कोर्ट ने अपने इस फैसले को तुरंत लागू करने के बजाय ट्रंप प्रशासन को 14 दिन की मोहलत दी है, ताकि वे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील कर सकें. इस फैसले से नाराज डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने कोर्ट के आदेश को भयानक और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि उनका प्रशासन इसके खिलाफ शीर्ष अदालत जाएगा. ट्रंप ने अपने बचाव में इस बॉलरूम को एक आयोजन स्थल मानने से इनकार करते हुए इसे एक सैन्य ढांचा करार दिया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रोजेक्ट के रुकने से उनकी, व्हाइट हाउस के अन्य अधिकारियों और वहां आने वाले आगंतुकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है.
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