डेब्यू फिल्म में ही फ्लॉप हो गया था 'पुष्पा' का ये एक्टर, सब छोड़-छाड़ के चला गया था अमेरिका, फिर ऐसे चमकी किस्मत
Fahadh Faasil Birthday: साउथ सिनेमा के सबसे बेहतरीन स्टार्स में गिने जाने वाले फहाद फासिल आज अपनी शानदार एक्टिंग और अलग तरह के किरदारों के लिए दुनियाभर में पहचान बना चुके हैं. फिल्मों में उनकी एक्टिंग की जितनी तारीफ होती है, उतनी ही चर्चा उनके किरदारों की भी होती है. लेकिन आज जिस मुकाम पर फहाद फासिल हैं वहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. 8 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाने वाले फहाद फासिल की जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया था, जब पहली ही फिल्म की असफलता ने उन्हें इतना तोड़ दिया कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला कर लिया. वो भारत छोड़कर अमेरिका चले गए थे. हालांकि, किस्मत ने उन्हें दूसरा मौका दिया और उन्होंने जब वापसी की तो अपनी मेहनत और एक्टिंग के दम पर खुद को भारतीय सिनेमा के सबसे भरोसेमंद कलाकारों में शामिल कर लिया.
फिल्मी परिवार से होने के बावजूद आसान नहीं था सफर
फहाद फासिल का जन्म 8 अगस्त 1982 को केरल में हुआ. उनके पिता फाजिल मलयालम सिनेमा के जाने-माने फिल्ममेकर हैं, जिन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया है. फिल्मी परिवार से होने के कारण फहाद के लिए इंडस्ट्री में एंट्री आसान जरूर थी लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं थी. फाजिल ने अपने बेटे को साल 2002 में फिल्म 'Kaiyethum Doorath' से लॉन्च किया. इस रोमांटिक फिल्म में फहाद ने सचिन नाम के युवक का किरदार निभाया था, जबकि उनके साथ एक्ट्रेस निकिता ठुकराल नजर आई थीं. फिल्म रिलीज से पहले इसे लेकर काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सिनेमाघरों में ये दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई.
पहली फिल्म की नाकामी से टूट गए थे फहाद
पहली ही फिल्म के फ्लॉप होने के बाद फहाद फासिल को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. कई लोगों ने उनकी एक्टिंग पर सवाल उठाए और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के लिए अनफिट तक कह दिया. एक इंटरव्यू में फहाद ने स्वीकार किया था कि उस वक्त वो मानसिक रूप से काफी टूट गए थे. उनका मानना था कि बिना पूरी तैयारी के फिल्मों में कदम रखना उनकी सबसे बड़ी गलती थी. उन्होंने कहा था कि अपनी असफलता के लिए वो किसी और को नहीं, बल्कि खुद को जिम्मेदार मानते हैं.
सब कुछ छोड़कर चले गए अमेरिका
पहली फिल्म की असफलता के बाद फहाद ने फिल्मी दुनिया से दूरी बनाने का फैसला किया. वो करीब 20 साल की उम्र में भारत छोड़कर अमेरिका चले गए. वहां उन्होंने कई साल बिताए. इस दौरान उन्होंने खुद को समझने, सीखने और जीवन को नए नजरिए से देखने की कोशिश की. अमेरिका में बिताया गया ये समय उनके लिए आत्ममंथन का दौर साबित हुआ. फहाद ने फिल्मों से पूरी तरह दूरी बना ली थी, लेकिन एक्टिंग के प्रति उनका जुनून कभी खत्म नहीं हुआ.
शानदार वापसी ने बदल दी किस्मत
कई साल बाद फहाद भारत लौटे और साल 2009 में मलयालम एंथोलॉजी फिल्म 'Kerala Cafe' से वापसी की. भले ही फिल्म में उनका रोल छोटा था, लेकिन दर्शकों और समीक्षकों ने उनकी परफॉर्मेंस को नोटिस किया. इसके बाद वह 'Pramani' और 'Cocktail' जैसी फिल्मों में नजर आए. इन फिल्मों ने उन्हें धीरे-धीरे इंडस्ट्री में फिर से पहचान दिलानी शुरू कर दी.
'Chaappa Kurishu' ने बना दिया स्टार
साल 2011 फहाद फासिल के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. वो फिल्म 'Chaappa Kurishu' में नजर आए, जिसमें उनके एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई. फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और फहाद को केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का सम्मान मिला. यहीं से उनके करियर ने नई उड़ान भरनी शुरू कर दी. 'Chaappa Kurishu' की सफलता के बाद फहाद फासिल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने लगातार ऐसी फिल्मों का चुनाव किया जिनमें चुनौती हो.
'पुष्पा' ने दिलाई पैन इंडिया पहचान
हालांकि फहाद फासिल मलयालम सिनेमा में पहले से ही बड़ा नाम बन चुके थे, लेकिन उन्हें देशभर में सबसे ज्यादा पहचान 'Pushpa: The Rise' में आईपीएस अधिकारी भंवर सिंह शेखावत के किरदार से मिली. इसके बाद 'Pushpa 2: The Rule' में भी उनका दमदार किरदार चर्चा का विषय बना. अल्लू अर्जुन के सामने उनका निगेटिव किरदार दर्शकों को खूब पसंद आया. वहीं 'Aavesham' में उनका अलग अंदाज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ. दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और फहाद की लोकप्रियता को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया.
होर्मुज खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने रख दी ये शर्त, कहां फंसा ओमान संग बातचीत में पेंच?
Middle East Tension: मिडिल ईस्ट में अभी भी तनाव बना हुआ है. अमेरिका और ईरान की जंग के चलते दुनिया का सबसे बड़ा तेल सप्लाई रूट होर्मुज भी बंद पड़ा है. जिसके चलते समंदर में सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच इस जलमार्ग को मैनेज करने के लिए एक डील पर बातचीत हो रही है.
- इस डील के तहत ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी और इजरायली जहाजों के प्रवेश पर रोक लगाने और वहां से गुजरने की इजाजत देने से पहले विरोधी देशों से मुआवजा मांगने की कोशिश करेगा.
- ईरान होर्मुज को अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए एक बड़े हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. वहीं दूसरी और ट्रंप ने इसे छुड़ाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है. जिससे ईरान की सभी चाल अब तक नाकाम साबित हुई हैं.
- ऐसे में मजबूरन ईरान ने ओमान को टेबल पर बिठाया है. इस वार्ता से कुछ सकारात्म संकेत भी मिले हैं. हालांकि इसमें पेंच फंस गया है. क्योंकि ईरान ने होर्मुज को खोलने के बदले में 3 बड़ी शर्तें रखी हैं.
होर्मुज को लेकर ईरान-ओमान की बात बढ़ी आगे
बता दें कि अमेरिका और ईरान की जंग के चलते होर्मुज पिछले पांच महीनों से बंद है. अब इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए पर्दे के पीछे सौदेबाजी लगातार हो रही है. ईरान और ओमान के बीच समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ गई है.
- ईरान का कहना है कि ओमान के साथ होर्मुज को फिर से खोलने का खाका लगभग तैयार हो चुका है लेकिन वाशिंगटन से हरी झंडी मिलना अभी भी बाकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटाने के लिए ईरान ने जो तीन मांगें रखी हैं वो क्या-क्या हैं. साथ ही अमेरिका इस डील पर हस्ताक्षर करने से क्यों कतरा रहा है.
ईरान ने होर्मुज को लेकर रखी ये तीन शर्त
ईरान अमेरिका के साथ जंग का पूरा फायदा उठाना चाहता है. ऐसे में तेहरान होर्मुज के पूरे इलाके पर सिर्फ अपना दबदबा कायम रखना चाहता है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान ने वार्ता की मेज पर तीन बड़ी शर्तें रखी हैं. इनमें पहली शर्त भारी-भरकम टोल टैक्स लगाना है.
- दरअसल, ईरान की पहली मांग है कि होर्मुज से गुजरने वाले हर कमर्शियल और कार्गो जहाज से उसके माल की कुल कीमत का 5 से 7 प्रतिशत तक शुल्क लिया जाएगा. हालांकि यहां ईरान को इस बात की याद दिलाना जरूरी है कि इस जंग से पहले इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से सभी देश बिना किसी शुल्क के व्यापार करते रहे है.
- इसके साथ ही ईरान होर्मुज पर अपना ट्रैफिक कंट्रोल चाहता है. ईरान चाहता है कि इस पूरे समुद्री रास्ते से कौन सा जहाज गुजरेगा और किसे रोका जाएगा, इसका अंतिम फैसला करने का कानूनी और सैन्य अधिकार सिर्फ तेहरान के पास ही होना चाहिए.
इसके साथ ही ईरान की संसद में एक कड़ा बिल लाया जा रहा है. इसके तहत अमेरिका, इजरायल या फिर ईरान-विरोधी रुख रखने वाले देशों के जहाजों के प्रवेश पर पूरी तरह से पाबंदी लगाना चाहता है. यही नहीं ईरान नियम तोड़ने वाले जहाजों के माल का 20 प्रतिशत हिस्सा जुर्माने के रूप में जब्त करने की भी तैयारी कर रहा है.
वहीं होर्मुज को लेकर आ रही नई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान शुल्क लेने वाली अपनी शर्त को छोड़ भी सकता है. हालांकि, वो इस पूरे समुद्री रास्ते पर अपना दबदबा और मिलिट्री कंट्रोल हासिल करने की शर्तों को कम नहीं करना चाहता.
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