Vastu Tips: घर में कहां रखें मिट्टी का घड़ा? नोट कर लें वास्तु नियम और लाभ
Vastu Shastra: वास्तु शास्त्र में दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है। घर में किस वस्तु को किस स्थान पर रखा जाए, यह समझने से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको मिट्टी का घड़ा या मटका चीजों को रखने की सही दिशा के बारे में बता रहे हैं।
Bab-el-Mandeb Crisis: लाल सागर की चाबी अब ईरान के पास? होर्मुज के बाद दूसरे सबसे बड़े समुद्री रास्ते पर मंडराया खतरा
Bab-el-Mandeb Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है। ईरान ने पहले ही होर्मुज को बंद कर वैश्विक तेल आपूर्ति का गला घोंट दिया है, और अब उसकी नजर 'बाब-अल-मंदेब' पर है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने समर्थित हूती विद्रोहियों के जरिए लाल सागर के इस मुहाने को बंद करने की योजना बना रहा है।
यदि ऐसा होता है, तो स्वेज नहर से होने वाला व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए एक 'चेकमेट' जैसी स्थिति होगी, क्योंकि दुनिया का लगभग 12 से 15 प्रतिशत व्यापार इसी पतले समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।
JUST IN ????????????????: Iran Hints at CLOSING the Bab-el-Mandeb Strait Next
— Ryan Rozbiani (@RyanRozbiani) April 3, 2026
This would be with the help of Yemen, and would further hurt the global economy
Iran’s Parliament Speaker Ghalibaf:
What share of global oil, LNG, wheat, rice, and fertilizer shipments transits the Bab-el-Mandeb… https://t.co/Q7AFCajL1G pic.twitter.com/iefOaPOf0r
क्या है बाब-अल-मंदेब? इसे 'दुखों का द्वार' क्यों कहते हैं?
बाब-अल-मंदेब एक रणनीतिक जलडमरूमध्य है जो अरब प्रायद्वीप पर यमन और अफ्रीका के सींग (Horn of Africa) पर जिबूती और इरिट्रिया के बीच स्थित है। अरबी भाषा में इसका अर्थ होता है "दुखों का द्वार" (Gate of Tears), इसके नाम के पीछे कई प्राचीन कथाएं हैं, जिनमें से एक यह है कि पुराने समय में यहां आने वाले भीषण तूफानों और समुद्री डाकुओं के कारण कई जहाज डूब जाते थे।
यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसकी चौड़ाई महज 26 से 30 किलोमीटर है, जिससे यहां से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना बेहद आसान हो जाता है।
ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रास्ता?
ईरान सीधे तौर पर बाब-अल-मंदेब की सीमा पर नहीं है, लेकिन यमन में सक्रिय हूती विद्रोही ईरान के इशारे पर काम करते हैं। बाब-अल-मंदेब पर नियंत्रण का मतलब है स्वेज नहर के प्रवेश द्वार पर नियंत्रण। अगर ईरान इसे बंद करने में सफल रहता है, तो भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते जाना होगा।
इससे न केवल यात्रा का समय 15 से 20 दिन बढ़ जाएगा, बल्कि शिपिंग लागत और ईंधन की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आएगा, जो वैश्विक महंगाई को बेकाबू कर देगा।
भारत और दुनिया पर पड़ने वाला असर
भारत का यूरोप के साथ होने वाला अधिकांश व्यापार इसी रास्ते से होता है। अगर ईरान इसे बंद करता है, तो भारत में कच्चा तेल, एलपीजी और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। ट्रंप प्रशासन ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे बाब-अल-मंदेब को 'इंटरनेशनल वाटर्स' के रूप में सुरक्षित रखने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
पेंटागन इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक उपस्थिति बढ़ा रहा है, लेकिन हूतियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 'ड्रोन और एंटी-शिप मिसाइलें' अमेरिकी युद्धपोतों के लिए भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
बाब-अल-मंदेब की भौगोलिक स्थिति: तीन महाद्वीपों का संगम
बाब-अल-मंदेब एक संकरा जलमार्ग है, इसकी कुल चौड़ाई मात्र 30 किलोमीटर है, जबकि इसका मुख्य शिपिंग चैनल केवल 3 किलोमीटर चौड़ा है। यही कारण है कि यहां से गुजरने वाले विशालकाय जहाजों को जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलों या ड्रोनों से निशाना बनाना बेहद आसान है।
यह जलमार्ग उत्तर में लाल सागर और स्वेज नहर को दक्षिण में अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। इसकी इसी स्थिति के कारण इसे एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच का 'जंक्शन' माना जाता है।
वैश्विक व्यापार का 'गला': क्यों अहम है यह रास्ता?
दुनिया का लगभग 12% से 15% वैश्विक व्यापार इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। स्वेज नहर से होकर गुजरने वाला हर जहाज अनिवार्य रूप से बाब-अल-मंदेब से गुजरता है।
तेल और गैस की सप्लाई: प्रतिदिन लगभग 45 से 50 लाख बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में एलएनजी (LNG) यहां से गुजरती है। खाड़ी देशों से यूरोप और अमेरिका जाने वाला तेल इसी रास्ते पर निर्भर है।
उपभोक्ता सामान: चीन, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया से यूरोप जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और मशीनरी का अधिकांश हिस्सा इसी रूट से जाता है।
वैकल्पिक मार्ग का अभाव: यदि यह रास्ता बंद होता है, तो जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाकर 'केप ऑफ गुड होप' से जाना होगा। इससे यात्रा में 10 से 15 दिन की देरी और ईंधन लागत में लाखों डॉलर की बढ़ोतरी होती है।
बाब-अल-मंदेब: सामरिक तथ्य
- लंबाई: लगभग 110 किलोमीटर।
- सबसे संकरा बिंदु: पेरिम द्वीप (Perim Island) के पास, जहाँ से रास्ता दो हिस्सों में बंट जाता है।
- प्रमुख तटवर्ती देश: यमन, जिबूती, इरिट्रिया और सोमालिया (निकटवर्ती)।
- वैश्विक हिस्सेदारी: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 10% इसी जलमार्ग से।
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