Delhi Govt ने CPA व्यवस्था की निलंबित, अस्पताल अब स्वयं खरीदेंगे दवाएं
नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली सरकार ने अंतरिम उपाय के रूप में केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के खरीद कार्यों को निलंबित कर दिया है और सरकारी अस्पतालों को नई व्यवस्था लागू होने तक दवाएं और चिकित्सा उपकरण स्वयं खरीदने का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक आदेश में यह जानकारी दी गई है। आदेश में कहा गया है कि सीपीए द्वारा शुरू की गई सभी लंबित और अधूरी निविदाएं रद्द कर दी जाएंगी और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अस्पतालों को लौटा दी जाएंगी।
इसमें कहा गया है कि पिछले साल जून में जारी सरकारी आदेशों के तहत केंद्रीय खरीद व्यवस्था शुरू की गई थी जो एक नीतिगत निर्णय था और नियमों के तहत इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाना चाहिए था। साल 1994 में स्थापित सीपीए दिल्ली सरकार के सभी संस्थानों के लिए दवाएं और सर्जिकल वस्तुएं खरीदने के लिए जिम्मेदार एजेंसी है। आदेश के मुताबिक, मौजूदा अनुबंध और खरीद समझौते तब तक जारी रहेंगे जबतक उनकी अवधि पूर्ण नहीं हो जाती या उन्हें रद्द नहीं किया जाता।
आदेश में कहा गया है कि जब तक सीपीए ऐसी दवाओं के लिए पूर्व-निर्धारित दरों वाले अनुबंध को अंतिम रूप नहीं दे देता, तब तक अस्पताल भी आवश्यक दवाएं खुद ही खरीदेंगे। इससे पहले सरकारी अस्पतालों में घटिया मेडिकल और सर्जिकल सामग्रियों की कथित आपूर्ति को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी थी।
CJI Surya Kant ने कहा: भारत Global Arbitration Hub बनने में पूरी तरह सक्षम है
नयी दिल्ली, सात अगस्त भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र न बन सके। सीजेआई ने कहा कि ‘मध्यस्थता अधिनियम, 2023’ ने पहली बार विवाद सुलझाने के इस वैकल्पिक तरीके के लिए एक अलग कानूनी ढांचा तैयार किया है। साथ ही, संस्थान अब जटिल और सीमा-पार मध्यस्थता के मामलों को उसी भरोसे के साथ संभालने में सक्षम हो रहे हैं, जैसा भरोसा दुनिया भर में वाणिज्यिक विवाद सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पक्ष दिखाते हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय न्यायपालिका, अदालत से जुड़े मध्यस्थता केंद्रों और इसी तरह की अन्य संस्थाओं के लगातार और सोच-समझकर दिए गए सहयोग की वजह से संभव हो पाई। सीजेआई सूर्यकांत, ‘माध्यम इंटरनेशनल काउंसिल फॉर कॉन्फ्लिक्ट रिजॉल्यूशन’ द्वारा यहां आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय एडीआर सम्मेलन, 2026’ के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। सीजेआई ने कहा, “ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत वैश्विक समुदाय के लिए मध्यस्थता के एक असली केंद्र के तौर पर खुद को स्थापित न कर सके।
जिस तेजी से हमारी अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, उसे देखते हुए सिर्फ विवाद सुलझाने का पर्याप्त बुनियादी ढांचा होना ही काफी नहीं है; बल्कि यह जरूरी है कि हम इसे एक ऐसे अत्याधुनिक ढांचे में बदलें जो हमारी जबरदस्त विकास दर के साथ कदम मिलाकर चल सके।” उन्होंने आगे कहा, “इसलिए, यह खुशी की बात है कि भारत में ऐसे संस्थान आकार लेने लगे हैं, जो इस लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम हैं। साथ ही, यह मानने की पूरी वजह है कि वे उसी भरोसे के साथ जटिल और सीमा-पार मध्यस्थता में मदद कर सकते हैं, जैसा भरोसा अंतरराष्ट्रीय पक्ष दुनिया भर में वाणिज्यिक विवादों को सुलझाने में दिखाते हैं।” सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें “पूरी उम्मीद” है कि कानूनी बिरादरी विवाद सुलझाने के मौजूदा वैकल्पिक तंत्र को और मजबूत करेगी तथा “भारत को दुनियाभर में इस क्षेत्र के असली अगुआ देशों में अपनी जगह बनाने में मदद करेगी”।
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