अमेरिका के इस प्लान से शुरू हो सकता है वर्ल्ड वॉर-3, अमेरिकी सैनिकों के लिए भी ईरान में इस मिशन कोे अंजाम देना होगा जानलेवा
ईरान के खिलाफ अमेरिका बहुत बड़ा गैंबल खेलने जा रहा है. इसमें दुनिया की किस्मत भी दांव पर लगने वाली है. जंग में ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने पहले से हमलों के निशाने पर हैं. लेकिन अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टंप का टारगेट नंबर वन है…ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम है, जिसे हासिल करने के लिए ट्रंप बूट ऑन ग्राउंड से भी परहेज नहीं करने वाले हैं.
ईरान के यूरेनयिम को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप की रहस्यमयी प्लानिंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इस वक्त मंथन चल रहा है. ये प्लानिंग क्या है, आइये जानते हैं पर उससे पहले सुनिए कि कैसे डोनाल्ड ट्रंप ईरान को यूरेनियम के लिए किस तरह वॉर्निंग दे रहे हैं...
???? US President Donald Trump on Iran's enriched uranium
— War Victor (@WarVictor_2630) April 2, 2026
We have it under intense satellite surveillance and control.
If we see them make a move — even a move for it — we will hit them with missiles, very hard.
We have all the cards, they have none. pic.twitter.com/YFePYincxy
ईरान में सेना भेजना पड़ेगा
ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम के लिए ट्रंप हाई रिस्क मिशन के मूड में हैं. जाहिर है ये केवल हवाई हमलों से मुमकिन नहीं है. यानि ट्रंप ईरान का यूरेनियम चाहते हैं और इसे हासिल करने के लिए ईरान के अंदर सेना भेजने के लिए भी अब वे तैयार हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान ने जिस जगह यूरेनियम का ठिकाना बनाया हुआ है, वह अमेरिका के सैनिकों के लिए किसी परमाणु की काल कोठरी से कम नहीं होने वाला है.
???????? SECRETARY RUBIO:
— Prime (@nucleusprime) April 1, 2026
The only reason to have 60% enriched uranium is to be able to enrich it to 90% and put it into a bomb. Iran has NO reason to have it. They need to give it up. https://t.co/ZdjxQUwgMr pic.twitter.com/f6cVoFX577
ईरान ने दबा रखा है यूरेनियम भंडार
दरअसल ट्रंप का ये प्लान ईरान के इस्फहान और नतांज जैसी न्यूक्लियर साइट के लिए है, जो ग्रेनाइट के कठोर चट्टान वाले पहाड़ों में 500 मीटर की गहराई में बना हुआ है. माना जा रहा है कि ऐसी ही किसी बेहद खुफिया किलेबंदी के बीच ईरान ने अपना यूरेनियम का खजाना दबा रखा है. ट्रंप की मंशा है कि अमेरिकी सैनिक ईरान में इस मौत के कुएं तक जाएं और न्यूक्लियर मलबों को खोदकर यूरेनियम निकाल लाएं.
पैराशूट से ईरान में सैनिक उतार सकती है अमेरिका
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका इसके लिए स्पेशल फोर्स की तैनाती करने वाला है. मुमकिन है कि इसके लिए 82वीं एयरबोर्न डिवीजन और रेंजर्स को पैराशूट के जरिए ईरान की न्यूक्लियर साइट पर उतारा जाए. जाहिर है ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान ईरान की मिसाइलों और ड्रोन का भी कहर अमेरिकी सैनिकों पर बरपेगा. हमलों के बीच सैनिकों की घेराबंदी को सुरक्षित रखना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.
अमेरिकी सैनिकों को इसकी भी चुनौती
अगर अमेरिकी सैनिकों को यहां तक पहुंचने में कामयाबी मिलती है तो इसके बाद उन्हें संवर्धित सामग्री के 40-50 सिलेंडरों का पता लगाना होगा. उन्हें फिर कंटेनर में भरना होगा. ईरान की एटमी साइट के पास कोई अस्थायी हवाईअड्डा मौजूद नहीं है, जिस वजह से अमेरिकी सैनिकों को उसे भी बनाना होगा. उन्हें यूरेनियम को हवाई मार्ग से ही निकालना होगा.
जहरीला एसिड बन जाता है
अमेरिका के लिए ये मिशन आसान नहीं होगा. अमेरिकी सैनिकों को कई सप्ताह तक ईरान में ही रहना होगा. वहां एक छोटी सी गलती भी उनकी मौत का रास्ता खोल देगी. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि ईरान के यूरेनियम, यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड गैस के रूप में हैं, जो हवा की नमी के साथ संपर्क में आने पर हाइड्रोफ्लोरिक एसिड बन जाता है. ये एसिड जहरीला होता है, जो इंसान की हड्डी तक को गला देती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि 60 फीसद संवर्धित यूरेनियम एक जगह इकट्ठा होता है तो खुद से न्यूक्लियर चेन रिएक्शन का खतरा पैदा हो जाता है. इससे विस्फोट का भी डर रहता है.
क्या वाकई अमेरिका ईरान में इस मिशन को अंजाम दे पाएगा, ये तो अब समय ही बताएगा. अब डर सिर्फ बात का है कि अगर अमेरिका यूरेनियम मिशन शुरू करता है तो ये दुनिया के लिए किलिंग मशीन यानी वर्ल्ड वॉर-3 बन सकता है.
खाद्य सहायता में कटौती से बांग्लादेश के रोहिंग्या शिविरों में गहराया संकट: रिपोर्ट
ढाका, 3 अप्रैल (आईएनएस)। बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। खाद्य सहायता में कटौती के बाद हजारों रोहिंग्या शरणार्थी जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे तेजी से बिगड़ती मानवीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ब्रिटेन के अखबार द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन खराब हालात वाले शिविरों में रहने वाले 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को प्रति व्यक्ति हर महीने केवल 12 डॉलर मिलते हैं “एक ऐसी राशि जिसे म्यांमार से आए इस उत्पीड़ित समुदाय ने लंबे समय से अपर्याप्त बताया है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में म्यांमार की सेना के क्रूर हमलों से बचकर भागे अधिकांश रोहिंग्या को बांग्लादेश में कानूनी रूप से काम करने की अनुमति नहीं है, जिससे वे जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता पर पूरी तरह निर्भर हैं।
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) की ओर से लागू की गई नई स्तरीय प्रणाली के तहत अब मिलने वाली सहायता परिवार की जरूरतों के आधार पर तय होगी, जिसमें लगभग 17 प्रतिशत लाभार्थियों को केवल सात डॉलर प्रति माह मिलेंगे।
लगभग एक-तिहाई आबादी, जिसे “भोजन के मामले में अत्यधिक असुरक्षित” श्रेणी में रखा गया है, उन्हें 12 डॉलर मिलते रहेंगे।
शिविर निवासी मोहम्मद रहीम ने कहा, “यह समझना बहुत मुश्किल है कि हम अब केवल 7 डॉलर में कैसे जीवित रहेंगे। हमारे बच्चों को सबसे ज्यादा कष्ट होगा।” उन्होंने बताया कि कटौती से पहले भी वह और उनकी पत्नी अपने तीन बच्चों को भोजन देने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
उन्होंने आगे कहा, “मुझे गहरी चिंता है कि लोग गंभीर भूख का सामना कर सकते हैं और कुछ लोग भोजन की कमी के कारण मर भी सकते हैं।”
रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि 2025 में विदेशी सहायता में हुई कटौती ने भी शिविरों में संकट को और गहरा कर दिया है, खासकर बच्चों के लिए। स्कूलों के बंद होने से बच्चों के अपहरण, बाल विवाह और बाल श्रम की घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां 2025 में रोहिंग्या लोगों के लिए मिलने वाली फंडिंग लगभग आधी रह गई थी, वहीं इस साल यह घटकर सिर्फ़ 19 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है, “भूखे, थके हुए और निराश हो चुके शिविर निवासी यह सोच रहे हैं कि आगे कैसे जिएंगे। मंगलवार को दर्जनों रोहिंग्या ने नए सिस्टम के खिलाफ प्रदर्शन किया और पूर्ण राशन बहाल करने की मांग की। कई लोगों ने ‘भोजन हमारा अधिकार है, विकल्प नहीं’ जैसे नारे लिखे पोस्टर उठाए।”
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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