खाद्य सहायता में कटौती से बांग्लादेश के रोहिंग्या शिविरों में गहराया संकट: रिपोर्ट
ढाका, 3 अप्रैल (आईएनएस)। बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। खाद्य सहायता में कटौती के बाद हजारों रोहिंग्या शरणार्थी जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिससे तेजी से बिगड़ती मानवीय स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ब्रिटेन के अखबार द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन खराब हालात वाले शिविरों में रहने वाले 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थियों को प्रति व्यक्ति हर महीने केवल 12 डॉलर मिलते हैं “एक ऐसी राशि जिसे म्यांमार से आए इस उत्पीड़ित समुदाय ने लंबे समय से अपर्याप्त बताया है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में म्यांमार की सेना के क्रूर हमलों से बचकर भागे अधिकांश रोहिंग्या को बांग्लादेश में कानूनी रूप से काम करने की अनुमति नहीं है, जिससे वे जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता पर पूरी तरह निर्भर हैं।
संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) की ओर से लागू की गई नई स्तरीय प्रणाली के तहत अब मिलने वाली सहायता परिवार की जरूरतों के आधार पर तय होगी, जिसमें लगभग 17 प्रतिशत लाभार्थियों को केवल सात डॉलर प्रति माह मिलेंगे।
लगभग एक-तिहाई आबादी, जिसे “भोजन के मामले में अत्यधिक असुरक्षित” श्रेणी में रखा गया है, उन्हें 12 डॉलर मिलते रहेंगे।
शिविर निवासी मोहम्मद रहीम ने कहा, “यह समझना बहुत मुश्किल है कि हम अब केवल 7 डॉलर में कैसे जीवित रहेंगे। हमारे बच्चों को सबसे ज्यादा कष्ट होगा।” उन्होंने बताया कि कटौती से पहले भी वह और उनकी पत्नी अपने तीन बच्चों को भोजन देने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
उन्होंने आगे कहा, “मुझे गहरी चिंता है कि लोग गंभीर भूख का सामना कर सकते हैं और कुछ लोग भोजन की कमी के कारण मर भी सकते हैं।”
रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि 2025 में विदेशी सहायता में हुई कटौती ने भी शिविरों में संकट को और गहरा कर दिया है, खासकर बच्चों के लिए। स्कूलों के बंद होने से बच्चों के अपहरण, बाल विवाह और बाल श्रम की घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहां 2025 में रोहिंग्या लोगों के लिए मिलने वाली फंडिंग लगभग आधी रह गई थी, वहीं इस साल यह घटकर सिर्फ़ 19 प्रतिशत रह गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है, “भूखे, थके हुए और निराश हो चुके शिविर निवासी यह सोच रहे हैं कि आगे कैसे जिएंगे। मंगलवार को दर्जनों रोहिंग्या ने नए सिस्टम के खिलाफ प्रदर्शन किया और पूर्ण राशन बहाल करने की मांग की। कई लोगों ने ‘भोजन हमारा अधिकार है, विकल्प नहीं’ जैसे नारे लिखे पोस्टर उठाए।”
--आईएएनएस
एवाई/डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होर्मुज स्ट्रेट खोलकर तेल से बड़ा मुनाफा कमाने का मौका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
वॉशिंगटन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। खाड़ी क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि तेल से लाभ कमाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और इसे भारी मुनाफा कमाने का अवसर बताया, क्योंकि समुद्री यातायात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज स्ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। यह दुनिया के लिए ‘गशर’ साबित होगा।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब नए आंकड़े इस रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही में सतर्क वापसी का संकेत दे रहे हैं, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के अनुसार, एक अप्रैल को 16 जहाज इस स्ट्रेट से गुजरे, जो गंभीर व्यवधान के बाद लगातार तीसरा दिन था जब आवाजाही दर्ज की गई।
एक अलग आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को 16 मालवाहक जहाज यहां से गुजरे, जो एक दिन पहले 11 थे। यह धीरे-धीरे सुधार का संकेत है, हालांकि यह अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर से काफी कम है।
यह व्यवधान मार्च के मध्य में शुरू हुआ था, जब ईरान ने अनिवार्य नेविगेशन कॉरिडोर लागू किया, जिसकी निगरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कर रहा था। इसके चलते जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े और ईरानी निगरानी में संचालन करना पड़ा।
हाल के जहाजों की आवाजाही से संकेत मिलता है कि कुछ ऑपरेटर इन प्रतिबंधों को परखने लगे हैं।
विंडवर्ड के अनुसार, दो अप्रैल तक अरब की खाड़ी में लगभग 656 जहाज मौजूद थे, जिनमें 55 प्रतिशत मालवाहक जहाज और 45 प्रतिशत टैंकर थे। यातायात असंतुलित बना हुआ है, जहां केवल एक जहाज अंदर आया जबकि आठ बाहर गए। इनमें कंटेनर कार्गो और तेल टैंकरों का दबदबा रहा।
ओमान के नियंत्रण वाले तीन जहाज ईरान नियंत्रित कॉरिडोर को दरकिनार करते हुए अंतरराष्ट्रीय मार्गों से जलसंधि से बाहर निकले।
इनमें से एक एलएनजी टैंकर सोहार मस्कट के पास पहुंचा, जो संघर्ष बढ़ने के बाद स्ट्रेट से गुजरने वाला पहला एलएनजी जहाज बना।
फ्रांसीसी लॉजिस्टिक्स कंपनी सीएमए सीजीएम से जुड़ा एक कंटेनर जहाज भी इस स्ट्रेट से गुजरा, जो प्रतिबंध कड़े होने के बाद पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों में से एक शुरुआती उदाहरण है।
विंडवर्ड रिपोर्ट इस इलाके में तथाकथित फ्लैग-ऑफ-कन्वीनियंस रजिस्ट्री के दबदबे को दिखाती है। पनामा 142 जहाजों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद लाइबेरिया (95), मार्शल आइलैंड्स (93), और ईरान (37) हैं, जो कमर्शियल और ज़्यादा रिस्क वाले शिपिंग प्रोफ़ाइल का मिक्स दिखाता है।
जहाजों के स्वामित्व पैटर्न अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के वास्तविक मालिक चीन, भारत, तुर्की और ईरान से जुड़े हैं, जबकि लगभग 25 प्रतिशत जहाजों का स्वामित्व अज्ञात है, जो निगरानी और नियंत्रण को जटिल बनाता है।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
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