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Gmail यूजर्स अपना ईमेल एड्रेस बदल सकेंगे:गूगल लाया नया फीचर; पुराने इनबॉक्स में ही आएंगे नए मेल, जानें पूरी प्रोसेस

गूगल ने अपने ईमेल प्लेटफॉर्म जीमेल में नया फीचर लॉन्च किया है, जिससे अब आप अपनी ईमेल आईडी का यूजरनेम (@gmail.com से पहले वाला हिस्सा) बदल सकेंगे। कंपनी के मुताबिक, यह आपकी डिजिटल पहचान को अपग्रेड करने का एक तरीका है। फिलहाल यह अपडेट अमेरिकी यूजर्स के लिए है, जो उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो अपना 'अजीब' यूजरनेम बदलना चाहते थे। आगे हम आपको इसे बदलने का पूरा प्रोसेस और पुराने एड्रेस से जुड़ी जरूरी बातें बताएंगे। गूगल के CEO सुंदर पिचाई ने X पर पोस्ट कर लिखा, 2004 एक अच्छा साल था, लेकिन आपके Gmail एड्रेस को उसमें फंसे रहने की जरूरत नहीं है। अब यूजर्स को अपने पुराने या 'शर्मिंदा' करने वाले ईमेल एड्रेस (जैसे- coolboy123) के साथ रहने की जरूरत नहीं है। गूगल अब इसे बदलने की सुविधा दे रहा है।' यूजरनेम बदलने पर पुराना ईमेल एड्रेस भी बना रहेगा जैसे ही आप अपना नया Gmail एड्रेस चुनते हैं, आपका पुराना ईमेल एड्रेस पूरी तरह डिलीट नहीं होगा। बदलाव से पहले इन बातों का ध्यान रखें ईमेल बदलना आसान है, लेकिन गूगल ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने को कहा है। Gmail यूजरनेम बदलने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस 12 महीने में एक बार ही बदल सकेंगे यूजरनेम गूगल ने इस सुविधा के साथ कुछ सीमाएं भी तय की हैं।

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अमेरिका के इस प्लान से शुरू हो सकता है वर्ल्ड वॉर-3, अमेरिकी सैनिकों के लिए भी ईरान में इस मिशन कोे अंजाम देना होगा जानलेवा

ईरान के खिलाफ अमेरिका बहुत बड़ा गैंबल खेलने जा रहा है. इसमें दुनिया की किस्मत भी दांव पर लगने वाली है. जंग में ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने पहले से हमलों के निशाने पर हैं. लेकिन अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टंप का टारगेट नंबर वन है…ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम है, जिसे हासिल करने के लिए ट्रंप बूट ऑन ग्राउंड से भी परहेज नहीं करने वाले हैं.

ईरान के यूरेनयिम को लेकर राष्ट्रपति  ट्रंप की रहस्यमयी प्लानिंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इस वक्त मंथन चल रहा है. ये प्लानिंग क्या है, आइये जानते हैं पर उससे पहले सुनिए कि कैसे डोनाल्ड ट्रंप ईरान को यूरेनियम के लिए किस तरह वॉर्निंग दे रहे हैं...

ईरान में सेना भेजना पड़ेगा

ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम के लिए ट्रंप हाई रिस्क मिशन के मूड में हैं. जाहिर है ये केवल हवाई हमलों से मुमकिन नहीं है. यानि ट्रंप ईरान का यूरेनियम चाहते हैं और इसे हासिल करने के लिए ईरान के अंदर सेना भेजने के लिए भी अब वे तैयार हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान ने जिस जगह यूरेनियम का ठिकाना बनाया हुआ है, वह अमेरिका के सैनिकों के लिए किसी परमाणु की काल कोठरी से कम नहीं होने वाला है.

ईरान ने दबा रखा है यूरेनियम भंडार

दरअसल ट्रंप का ये प्लान ईरान के इस्फहान और नतांज जैसी न्यूक्लियर साइट के लिए है, जो ग्रेनाइट के कठोर चट्टान वाले पहाड़ों में 500 मीटर की गहराई में बना हुआ है. माना जा रहा है कि ऐसी ही किसी बेहद खुफिया किलेबंदी के बीच ईरान ने अपना यूरेनियम का खजाना दबा रखा है. ट्रंप की मंशा है कि अमेरिकी सैनिक ईरान में इस मौत के कुएं तक जाएं और न्यूक्लियर मलबों को खोदकर यूरेनियम निकाल लाएं.

पैराशूट से ईरान में सैनिक उतार सकती है अमेरिका

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका इसके लिए स्पेशल फोर्स की तैनाती करने वाला है. मुमकिन है कि इसके लिए 82वीं एयरबोर्न डिवीजन और रेंजर्स को पैराशूट के जरिए ईरान की न्यूक्लियर साइट पर उतारा जाए. जाहिर है ग्राउंड ऑपरेशन के दौरान ईरान की मिसाइलों और ड्रोन का भी कहर अमेरिकी सैनिकों पर बरपेगा. हमलों के बीच सैनिकों की घेराबंदी को सुरक्षित रखना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.

अमेरिकी सैनिकों को इसकी भी चुनौती

अगर अमेरिकी सैनिकों को यहां तक पहुंचने में कामयाबी मिलती है तो इसके बाद उन्हें संवर्धित सामग्री के 40-50 सिलेंडरों का पता लगाना होगा. उन्हें फिर कंटेनर में भरना होगा. ईरान की एटमी साइट के पास कोई अस्थायी हवाईअड्डा मौजूद नहीं है, जिस वजह से अमेरिकी सैनिकों को उसे भी बनाना होगा. उन्हें यूरेनियम को हवाई मार्ग से ही निकालना होगा.

जहरीला एसिड बन जाता है

अमेरिका के लिए ये मिशन आसान नहीं होगा. अमेरिकी सैनिकों को कई सप्ताह तक ईरान में ही रहना होगा. वहां एक छोटी सी गलती भी उनकी मौत का रास्ता खोल देगी. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि ईरान के यूरेनियम, यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड गैस के रूप में हैं, जो हवा की नमी के साथ संपर्क में आने पर हाइड्रोफ्लोरिक एसिड बन जाता है. ये एसिड जहरीला होता है, जो इंसान की हड्डी तक को गला देती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि 60 फीसद संवर्धित यूरेनियम एक जगह इकट्ठा होता है तो खुद से न्यूक्लियर चेन रिएक्शन का खतरा पैदा हो जाता है. इससे विस्फोट का भी डर रहता है. 

क्या वाकई अमेरिका ईरान में इस मिशन को अंजाम दे पाएगा, ये तो अब समय ही बताएगा. अब डर सिर्फ बात का है कि अगर अमेरिका यूरेनियम मिशन शुरू करता है तो ये दुनिया के लिए किलिंग मशीन यानी वर्ल्ड वॉर-3 बन सकता है. 

 

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