सिबी जॉर्ज ने अजरबैजान विदेश मंत्री से द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की
नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बाकू में अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव से मुलाकात की और भारत-अजरबैजान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। साथ ही, उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
बाकू में भारत-अजरबैजान विदेश कार्यालय परामर्श का छठा दौर भी आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) और विदेश मामलों के उप मंत्री एलनुर मम्मादोव ने की।
इस मुलाकात के दौरान आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई। चर्चा किए गए मुद्दों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, संस्कृति, लोगों के बीच आदान-प्रदान और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई शामिल थे।
सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने अजरबैजान के राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार हिकमत हाजियेव से भी मुलाकात की।
दोनों पक्ष नई दिल्ली में आपसी सुविधा की किसी तारीख पर विदेश कार्यालय परामर्श का अगला दौर आयोजित करने पर सहमत हुए।
एक दिन पहले भारत के राजदूत अभय कुमार ने बुधवार को अजरबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बैरामोव से मुलाकात की और औपचारिक तौर पर अपने परिचय पत्र की एक प्रति प्रस्तुत की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर सार्थक चर्चा की।
अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में अजरबैजान-भारत के बीच संबंधों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और आगे के सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
दोनों पक्षों ने मध्य पूर्व में जारी तनाव पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारतीय राजदूत ने ईरान से भारतीय नागरिकों को निकालने के दौरान दिए गए सहयोग के लिए अजरबैजान सरकार के प्रति गहरी कृतज्ञता भी व्यक्त की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, बाकू में भारत-अजरबैजान विदेश कार्यालय परामर्श का छठा दौर भी आयोजित किया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता सचिव (पश्चिम) और विदेश मामलों के उप मंत्री, एलनुर मम्मादोव ने की। उन्होंने आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करते हुए द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति की व्यापक समीक्षा की।
--आईएएनएस
एवाई/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
काबुल एयरस्ट्राइक पर पाकिस्तान सरकार की देश में घेराबंदी, नेताओं ने बताया अघोषित युद्ध
एथेंस, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में हालिया एयरस्ट्राइक को लेकर पाकिस्तान सरकार को अपने ही देश में तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तान के कई राजनीतिक नेताओं और विधायकों ने संयुक्त बयान जारी कर इन हमलों को “अघोषित युद्ध” करार दिया है, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और घायल होने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, 16 मार्च को पाकिस्तान ने काबुल स्थित 2000 बेड वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की मौत और कई लोग घायल हुए।
‘ग्रीक सिटी टाइम्स’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस “अविवेकपूर्ण सैन्य कार्रवाई” को लेकर इस्लामाबाद सरकार की देश के भीतर कड़ी आलोचना हो रही है।
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि अफगान सरकार को अस्थिर करने की पाकिस्तान की कोशिशें “भ्रमित और अप्रभावी” हैं। वहीं, अवामी नेशनल पार्टी के नेता मियां इफ्तिखार हुसैन ने चेतावनी दी कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “युद्ध शुरू तो किया जा सकता है, लेकिन उसका अंत शुरू करने वाले के हाथ में नहीं होता।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पाकिस्तान की कार्रवाई को मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन मानते हुए “संभावित युद्ध अपराध” बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक गुल मोहम्मदुद्दीन मोहम्मदी ने हमलों की निंदा करते हुए कहा कि युद्ध में महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों की हत्या संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों, मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों के खिलाफ है।
पाकिस्तान का दावा है कि एयरस्ट्राइक आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर की गई थी और इसमें किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग और भयावह बताई जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमलों में स्कूल, घर और मेडिकल सुविधाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
संयुक्त राष्ट्र मिशन की अधिकारी जॉर्जेट गैनन ने बताया कि प्रभावित केंद्र एक प्रसिद्ध पुनर्वास केंद्र था, जिसे अफगान सरकार संचालित करती थी। उन्होंने कहा कि मौके पर भारी तबाही देखी गई, जिसमें एक पूरा ब्लॉक नष्ट हो गया, जहां किशोरों का इलाज चल रहा था।
इस बीच, ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी इन हमलों को “गैरकानूनी” बताते हुए कहा कि यह संभावित रूप से युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ह्यूमन राइट्स वॉच की एशिया निदेशक पेट्रिशिया गोसमैन ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि नागरिकों से भरे चिकित्सा केंद्र को निशाना क्यों बनाया गया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
--आईएएनएस
डीएससी
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