भारत और बांग्लादेश के बीच एक बड़ी बैठक हुई। बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज हमीदुल्लाह ने भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की और आपको बता दें यह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं थी। यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई जब पहले से दुनिया भर में हालात खराब हैं और खुद बांग्लादेश मुसीबत में फंसा हुआ है। बैठक में दोनों पक्षों ने साफ तौर पर यह संकेत दिए कि भारत और बांग्लादेश अब अपने रक्षा संबंधों को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं। खासतौर पर संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, सैनिकों के आदान-प्रदान और नए रक्षा सहयोग के रस्ते पर गहन चर्चा हुई। इस मुलाकात के मायने इसलिए बड़े हैं क्योंकि यह मुलाकात ऐसे समय पर हो रही है जब पूरे क्षेत्र में भू-राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है। ऐसे में भारत और बांग्लादेश का एक साथ ताना क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।
एक तरफ रक्षा सहयोग मजबूत करने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ भारत लगातार मुश्किल वक्त में बांग्लादेश के साथ खड़ा भी नजर आ रहा है। हाल ही में ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश की मदद के लिए भारत ने कई कदम उठाए। भारत बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के जरिए हाई स्पीड डीजल की सप्लाई बढ़ाई गई। हजारों टन निधन भेजकर भारत ने यह दिखाया कि वह बांग्लादेश की मदद के लिए उसके साथ खड़ा है। दरअसल ईरान युद्ध के असर से बांग्लादेशी ऊर्जा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बिजली कटौती उद्योगों पर असर और आर्थिक दबाव इन सबके बीच भारत की मदद उसके लिए राहत बनकर आई है। अब अगर राजनीतिक एंगल देखें तो यह बदलाव और भी दिलचस्प हो जाता है। अगस्त 2024 में शेख हसीना के हटने के बाद मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की कमान संभाली। उनके आने के साथ-साथ भारत बांग्लादेश के रिश्तों में खटास भी देखने को मिली।
यूनुस के राज में बॉयकॉट इंडिया जैसे अभियान और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों ने भारत की चिंता बढ़ा दी थी। क्योंकि यूनुस आए दिन भारत के खिलाफ बयानबाजी करते नजर आते थे और उनके ही राज में बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों ने खूब उत्पात भी मचाया। लेकिन अब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने रुख बदलते हुए भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश की है और यही वजह है कि आज दोनों देशों के बीच बातचीत सहयोग और भरोसा फिर से पटरी पर लौटता दिखाई दे रहा है और इसी बीच बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम रियाज हमीदुल्लाह ने भारत की सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से मुलाकात की और देखा जाए तो यह मुलाकात भी एक बड़े बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का जो इस वक्त वैश्विक संकट की स्थिति के बीच पड़ोसी देशों की ओर से ऊर्जा आपूर्ति के लिए भारत को किए जा रहे अनुरोध पर बात कर रहे हैं। जहां रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया उन्होंने कहा कि इन सभी अनुरोधों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। दरअसल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत एक बार फिर क्षेत्र सहयोग का केंद्र बनकर उभर रहा है। जहां इस संकट के इस घड़ी में पड़ोसी देश भारत की ओर मदद के लिए देख रहे हैं। खास करके पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर और इसी मुद्दे पर जब एमईए के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने बांग्लादेश को सप्लाई किए जा रहे ईंधन से जुड़ा सवाल पूछा तो रणधीर जायसवाल ने जवाब देते हुए बताया कि भारत किन-किन पड़ोसी देशों की मदद इस संकट के समय कर रहा है और इसके साथ ही किन-किन देशों से भारत की ओर मदद मांगी गई।
स्टेट ऑफ हार्मोंस जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर तनाव दिखना जहां जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बहुत प्रभावित हुई है और तेल संकट और भी ज्यादा गहराता हुआ दिख रहा है। अब पड़ोसी देश भारत की तरफ मदद के लिए इस संकट की स्थिति में देख रहे हैं। जैसा कि रणधीर जायसवाल ने बताया भारत अपने पड़ोसी देशों की मदद भी कर रहा है। जहां उसने बांग्लादेश और श्रीलंका को आपूर्ति की है। इसके साथ ही नेपाल भूटान को भी आपूर्ति कर रहा है। कुल मिलाकर वैश्विक संकट के इस दौर में भारत ना सिर्फ अपनी ऊर्जा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि अपने पड़ोसी देशों की मदद के लिए भी आगे आ रहा है। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट की नीति को दिखाता है। जहां भारत अपने पड़ोसियों की मदद करता है।
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