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जंग के बीच 7 दोस्त देशों को तेल भेजेगा भारत, विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का जो इस वक्त वैश्विक संकट की स्थिति के बीच पड़ोसी देशों की ओर से ऊर्जा आपूर्ति के लिए भारत को किए जा रहे अनुरोध पर बात कर रहे हैं। जहां रणधीर जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया उन्होंने कहा कि इन सभी अनुरोधों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। दरअसल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत एक बार फिर क्षेत्र सहयोग का केंद्र बनकर उभर रहा है। जहां इस संकट के इस घड़ी में पड़ोसी देश भारत की ओर मदद के लिए देख रहे हैं। खास करके पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर और इसी मुद्दे पर जब एमईए के प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने बांग्लादेश को सप्लाई किए जा रहे ईंधन से जुड़ा सवाल पूछा तो रणधीर जायसवाल ने जवाब देते हुए बताया कि भारत किन-किन पड़ोसी देशों की मदद इस संकट के समय कर रहा है और इसके साथ ही किन-किन देशों से भारत की ओर मदद मांगी गई। 

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स्टेट ऑफ हार्मोंस जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर तनाव दिखना जहां जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बहुत प्रभावित हुई है और तेल संकट और भी ज्यादा गहराता हुआ दिख रहा है। अब पड़ोसी देश भारत की तरफ मदद के लिए इस संकट की स्थिति में देख रहे हैं। जैसा कि रणधीर जायसवाल ने बताया भारत अपने पड़ोसी देशों की मदद भी कर रहा है। जहां उसने बांग्लादेश और श्रीलंका को आपूर्ति की है। इसके साथ ही नेपाल भूटान को भी आपूर्ति कर रहा है। कुल मिलाकर वैश्विक संकट के इस दौर में भारत ना सिर्फ अपनी ऊर्जा सुनिश्चित कर रहा है बल्कि अपने पड़ोसी देशों की मदद के लिए भी आगे आ रहा है। यह भारत की नेबरहुड फर्स्ट की नीति को दिखाता है। जहां भारत अपने पड़ोसियों की मदद करता है। 

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Vishwakhabram: दुनिया की नजर Iran पर लगी रही, उधर Putin ने कर दिया बड़ा खेल, Ukraine के Luhansk क्षेत्र पर Russia का कब्जा

एक ओर दुनिया की नजरें ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच भड़कते टकराव पर टिकी हैं, तो दूसरी ओर यूरोप की धरती पर रूस और यूक्रेन का युद्ध लगातार लंबा और खतरनाक होता जा रहा है। वैश्विक राजनीति के इस दोहरे विस्फोट ने हालात को ऐसा मोड़ दे दिया है जहां हर दिन नए दावे, नए हमले और नई धमकियां सामने आ रही हैं। इस बीच रूस ने एक बड़ा दावा ठोककर पूरे समीकरण को हिला दिया है।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने ऐलान किया है कि उसकी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के लुहांस्क क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया है। यह वही इलाका है जिस पर 2022 में हमले की शुरुआत के बाद से रूस की नजर थी लेकिन वह इसे हासिल नहीं कर पाया था। अब मॉस्को का कहना है कि उसके पश्चिमी सैन्य समूह की इकाइयों ने लुहांस्क को पूरी तरह मुक्त करा लिया है। हालांकि यूक्रेन ने इस दावे की तुरंत पुष्टि नहीं की है, जिससे जमीन पर वास्तविक स्थिति को लेकर संदेह बना हुआ है।

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रूस ने सिर्फ लुहांस्क ही नहीं बल्कि खारकीव क्षेत्र के एक गांव और जापोरिजिया इलाके के एक अन्य गांव पर भी कब्जे का दावा किया है। लुहांस्क और दोनेत्स्क मिलकर डोनबास क्षेत्र बनाते हैं, जो इस युद्ध का सबसे बड़ा रणक्षेत्र है। पहले ही लुहांस्क का निन्यानबे प्रतिशत हिस्सा रूस के कब्जे में था और अब वह इसे पूरी तरह अपना बताने की कोशिश कर रहा है।

इसी के साथ क्रेमलिन ने यूक्रेन पर दबाव और तेज कर दिया है। रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने साफ कहा कि यूक्रेन को डोनबास से अपनी सेना तुरंत हटा लेनी चाहिए। उनका कहना है कि यह फैसला पहले ही ले लिया जाना चाहिए था ताकि युद्ध का गर्म दौर खत्म हो सके। लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

जेलेंस्की ने दावा किया कि रूस ने अमेरिका के सामने अल्टीमेटम रखा है कि अगर यूक्रेन ने दो महीने में डोनबास से सेना नहीं हटाई तो वह शांति वार्ता की शर्तें और सख्त कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि रूस का यह सोचना ही गलत है कि वह इतने कम समय में पूरे डोनबास पर कब्जा कर सकता है। यूक्रेन ने साफ किया है कि वह कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन युद्धविराम केवल मौजूदा मोर्चों की स्थिति पर ही संभव है।

इस बीच जमीनी हालात और भी भयावह होते जा रहे हैं। रूस ने रात भर में सैकड़ों ड्रोन से हमला किया। खेरसोन क्षेत्र में एक नागरिक कार पर हमले में दो महिलाओं की मौत हो गई। लुत्स्क शहर में एक गोदाम में आग लग गई और आसमान में धुएं का गुबार छा गया। जेलेंस्की के मुताबिक रूस ने तीन सौ से ज्यादा ड्रोन दागे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हमने ईस्टर पर युद्धविराम का प्रस्ताव दिया था, जवाब में हमें ड्रोन हमले मिले।

दूसरी ओर यूक्रेन भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसने रूस के बाल्टिक सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह उस्त लुगा पर ड्रोन हमला किया, जिससे रूस के कच्चे तेल निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यूक्रेन के ड्रोन अब दूसरे देशों की सीमाओं तक पहुंच रहे हैं। एस्टोनिया, फिनलैंड और लातविया में ड्रोन के मलबे मिलने से पूरे यूरोप में चिंता बढ़ गई है। हालांकि यूक्रेन ने कहा है कि उसका इरादा इन देशों को निशाना बनाना नहीं था।

दूसरी ओर, इस युद्ध का दायरा अब और खतरनाक हो गया है क्योंकि इसमें उत्तर कोरिया भी खुलकर कूद चुका है। प्योंगयांग ने रूस की मदद के लिए हजारों सैनिक भेजे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब दो हजार उत्तर कोरियाई सैनिक मारे जा चुके हैं। अब उत्तर कोरिया अपने मारे गए सैनिकों के लिए स्मारक बना रहा है और उनके अवशेषों को दफनाने की तैयारी कर रहा है। किम जोंग उन ने इसे देशभक्ति की मिसाल बताया है। बदले में रूस उत्तर कोरिया को आर्थिक मदद, सैन्य तकनीक और ऊर्जा दे रहा है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहा है।

दिलचस्प बात यह भी है कि मार्च महीने में रूस को मोर्चे पर कोई बड़ी सफलता नहीं मिली। ढाई साल में पहली बार ऐसा हुआ जब उसकी सेना आगे नहीं बढ़ सकी। उल्टा यूक्रेन ने कुछ इलाकों पर दोबारा कब्जा कर लिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन के जवाबी हमले और संचार व्यवस्था में दिक्कतों ने रूस की रफ्तार धीमी कर दी है।

उधर, रूस अपने ही देश में नियंत्रण और सख्ती बढ़ा रहा है। खबर है कि सरकार पंद्रह अप्रैल तक वीपीएन सेवाओं को बंद करने की तैयारी में है ताकि लोग सेंसरशिप से बच न सकें। साथ ही एक नया कानून लागू किया गया है जिसके तहत सुरक्षा एजेंसी को बिना अनुमति किसी भी संस्था का डाटा हासिल करने का अधिकार मिल गया है। इसका मतलब है कि अब आम नागरिक से लेकर कंपनियों तक सभी की जानकारी सरकार की सीधी पहुंच में होगी। साथ ही इस युद्ध के बीच एक और चौंकाने वाली खबर आई जब रूस के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की विमान दुर्घटना में मौत हो गई। यह 2022 के बाद से मारे गए रूसी जनरलों की संख्या को और बढ़ाता है।

दूसरी ओर, यूरोप के देश यूक्रेन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। रोमानिया और यूक्रेन मिलकर ड्रोन उत्पादन की नई परियोजना शुरू कर रहे हैं, जिसमें यूरोपीय संघ की बड़ी आर्थिक मदद शामिल है। इससे साफ है कि यह युद्ध सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन की लड़ाई बन चुका है।

बहरहाल, इन सभी घटनाओं के बीच एक बात साफ है कि दुनिया का ध्यान भले ही पश्चिम एशिया की आग पर हो, लेकिन यूक्रेन की जमीन पर जल रही यह जंग अब और भी खतरनाक मोड़ ले रही है। हर दिन नए मोर्चे खुल रहे हैं, नए देश इसमें खिंचते जा रहे हैं और शांति की उम्मीद लगातार धुंधली होती जा रही है।

-नीरज कुमार दुबे

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