Geopolitics Update: क्या बदल जाएगा मिडिल ईस्ट का समीकरण? रियाद और मॉस्को की दोस्ती ने उड़ाई वॉशिंगटन की नींद
Saudi-Russia Relations: दशकों तक अमेरिका के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे सऊदी अरब और वॉशिंगटन के बीच अब दरार साफ दिखाई देने लगी है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया 'टैरिफ नीतियों' और खाड़ी युद्ध को लेकर उनके सख्त रुख ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को अपनी विदेश नीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही दोनों देशों के बीच संबंधों में वह पुरानी गर्मजोशी नहीं दिखी, जिसका फायदा अब रूस उठा रहा है। सऊदी अरब अब अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता, यही वजह है कि क्राउन प्रिंस ने अब मॉस्को की ओर अपने कदम बढ़ाए हैं।
पुतिन और मोहम्मद बिन सलमान की दोस्ती के मायने
सऊदी क्राउन प्रिंस और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बढ़ती नजदीकियां वैश्विक राजनीति में एक नया ध्रुव तैयार कर रही हैं। दोनों नेताओं की फोन पर बातचीत में न केवल तेल उत्पादन (OPEC+) को लेकर सहमति जताई, बल्कि रक्षा और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
???????????????????? On April 2, President Putin & HRH Crown Prince Mohammed bin Salman spoke over the phone.
— MFA Russia ???????? (@mfa_russia) April 2, 2026
Both Sides stressed the need for intensified diplomatic efforts toward a lasting Middle East settlement that takes into account the interests of all parties.https://t.co/RlpmPsTlFo pic.twitter.com/wd3oZhjpxF
रूस के लिए सऊदी अरब जैसा अमीर पार्टनर मिलना एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, खासकर तब जब वह पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। वहीं, सऊदी अरब के लिए रूस एक ऐसा सहयोगी साबित हो रहा है जो बिना किसी 'मानवाधिकार' या 'लोकतंत्र' की शर्त के आधुनिक हथियार और तकनीक देने को तैयार है।
तेल और हथियार सौदों ने वॉशिंगटन की उड़ाई नींद
सऊदी अरब और रूस के बीच होने वाले संभावित सैन्य समझौतों ने पेंटागन और व्हाइट हाउस में खलबली मचा दी है। खबर है कि सऊदी अरब अब अमेरिका के 'पैट्रियट' मिसाइल सिस्टम के विकल्प के तौर पर रूस के S-400 या उससे भी उन्नत रक्षा प्रणालियों में दिलचस्पी दिखा रहा है।
इसके अलावा, वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सऊदी और रूस का एक सुर में बोलना अमेरिका की 'एनर्जी पॉलिसी' को सीधा चैलेंज दे रहा है। ट्रंप प्रशासन के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है कि वह कैसे अपने इस पुराने साथी को वापस अपने पाले में लाए, क्योंकि सऊदी का रूस के करीब जाना सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में अमेरिकी प्रभाव को कम करना है।
क्या मिडिल ईस्ट में खत्म हो जाएगा अमेरिकी प्रभुत्व?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोहम्मद बिन सलमान का यह कदम 'मल्टी-पोलर वर्ल्ड' की ओर इशारा करता है। सऊदी अरब अब अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता है। ब्रिक्स (BRICS) में शामिल होने की इच्छा और अब रूस के साथ बढ़ते रक्षा संबंध यह दर्शाते हैं कि सऊदी अब किसी एक महाशक्ति के दबाव में काम नहीं करेगा।
यदि सऊदी अरब पूरी तरह से रूस और चीन के खेमे में चला जाता है, तो यह डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति की सबसे बड़ी विफलता मानी जाएगी।
फिलहाल, रियाद और मॉस्को की यह नई केमिस्ट्री आने वाले समय में वैश्विक बाजार और युद्ध की स्थितियों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।
'गंभीर होना सीखें ट्रंप': ईरान युद्ध और NATO पर अमेरिकी राष्ट्रपति के बदलते बयानों पर भड़के मैक्रों, लगाई फटकार
Emmanuel Macron vs Donald Trump: दक्षिण कोरिया की राजकीय यात्रा पर पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी नसीहत दी है। मैक्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गंभीरता जरूरी है और ट्रंप को हर दिन अपने बयान बदलकर दुनिया में भ्रम पैदा करना बंद करना चाहिए।
मैक्रों का ट्रंप पर तंज
मैक्रों ने ट्रंप के विरोधाभासी बयानों पर तंज कसते हुए कहा, "जब आप गंभीर होना चाहते हैं, तो आप वह नहीं कहते जो आपने एक दिन पहले कहा था। शायद आपको हर दिन बात करने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने जोर दिया कि रोज-रोज बदलते बयानों से अमेरिका की प्रतिबद्धता कमजोर हो रही है।
MACRON LE RESPONDE A TRUMP Y ELEVA EL TONO DEL DEBATE
— Mario Moray (@Mario_Moray) April 2, 2026
Emmanuel Macron, respondió a las declaraciones de Donald Trump con un mensaje crítico:
“Trump habla demasiado. Sus declaraciones no son elegantes ni están a la altura de un presidente” y señaló que Trump tiene malos modales. pic.twitter.com/VKkcmAn2wa
NATO को 'कागजी शेर' बताने पर विवाद
विवाद की जड़ ट्रंप का वह बयान है जिसमें उन्होंने नाटो (NATO) को 'कागजी शेर' करार दिया और गठबंधन से हटने के संकेत दिए। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि नाटो सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इजरायल का साथ देने से इनकार कर दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य कार्रवाई 'अवास्तविक'
मैक्रों ने स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को बलपूर्वक खोलने की अमेरिकी योजना को 'अवास्तविक' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) जैसे मजबूत संसाधन हैं, जिनसे तटीय इलाकों को बड़ा खतरा हो सकता है।
दुनिया भर में तेल संकट गहराया
28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध के बाद से हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। यह तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसके बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप ने इसे खोलने के लिए सहयोगियों पर दबाव बनाया है।
ट्रंप की 'पत्थर युग' वाली धमकी
जवाब में ट्रंप ने ईरान को 'पत्थर युग' में वापस भेजने की धमकी दी है और क्षेत्र में हजारों सैनिक तैनात कर दिए हैं। ट्रंप ने युद्ध खत्म करने के लिए दो से तीन हफ्ते की समयसीमा तय की है, जबकि मैक्रों ने तत्काल युद्धविराम और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
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