'गंभीर होना सीखें ट्रंप': ईरान युद्ध और NATO पर अमेरिकी राष्ट्रपति के बदलते बयानों पर भड़के मैक्रों, लगाई फटकार
Emmanuel Macron vs Donald Trump: दक्षिण कोरिया की राजकीय यात्रा पर पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी नसीहत दी है। मैक्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गंभीरता जरूरी है और ट्रंप को हर दिन अपने बयान बदलकर दुनिया में भ्रम पैदा करना बंद करना चाहिए।
मैक्रों का ट्रंप पर तंज
मैक्रों ने ट्रंप के विरोधाभासी बयानों पर तंज कसते हुए कहा, "जब आप गंभीर होना चाहते हैं, तो आप वह नहीं कहते जो आपने एक दिन पहले कहा था। शायद आपको हर दिन बात करने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने जोर दिया कि रोज-रोज बदलते बयानों से अमेरिका की प्रतिबद्धता कमजोर हो रही है।
MACRON LE RESPONDE A TRUMP Y ELEVA EL TONO DEL DEBATE
— Mario Moray (@Mario_Moray) April 2, 2026
Emmanuel Macron, respondió a las declaraciones de Donald Trump con un mensaje crítico:
“Trump habla demasiado. Sus declaraciones no son elegantes ni están a la altura de un presidente” y señaló que Trump tiene malos modales. pic.twitter.com/VKkcmAn2wa
NATO को 'कागजी शेर' बताने पर विवाद
विवाद की जड़ ट्रंप का वह बयान है जिसमें उन्होंने नाटो (NATO) को 'कागजी शेर' करार दिया और गठबंधन से हटने के संकेत दिए। ट्रंप इस बात से नाराज हैं कि नाटो सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इजरायल का साथ देने से इनकार कर दिया है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य कार्रवाई 'अवास्तविक'
मैक्रों ने स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को बलपूर्वक खोलने की अमेरिकी योजना को 'अवास्तविक' बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलें और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) जैसे मजबूत संसाधन हैं, जिनसे तटीय इलाकों को बड़ा खतरा हो सकता है।
दुनिया भर में तेल संकट गहराया
28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध के बाद से हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद है। यह तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है, जिसके बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप ने इसे खोलने के लिए सहयोगियों पर दबाव बनाया है।
ट्रंप की 'पत्थर युग' वाली धमकी
जवाब में ट्रंप ने ईरान को 'पत्थर युग' में वापस भेजने की धमकी दी है और क्षेत्र में हजारों सैनिक तैनात कर दिए हैं। ट्रंप ने युद्ध खत्म करने के लिए दो से तीन हफ्ते की समयसीमा तय की है, जबकि मैक्रों ने तत्काल युद्धविराम और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
पेंटागन की कुर्सी खाली: ट्रंप ने बदला अपना सेनापति! ईरान के खिलाफ सुस्त रणनीति के चलते ट्रंप ने सेना प्रमुख पर चलाया हंटर
दुनिया जब ईरान और अमेरिका के बीच छिड़े भीषण युद्ध के नतीजों पर नजरें गड़ाए बैठी है, उसी दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को तत्काल प्रभाव से 'जबरन रिटायर' करने का आदेश जारी कर दिया है।
व्हाइट हाउस की ओर से आए इस आदेश के बाद पेंटागन में हड़कंप की स्थिति है। जनरल रैंडी जॉर्ज, जिन्होंने कई महत्वपूर्ण मिशनों का नेतृत्व किया था, उनकी इस तरह अचानक विदाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
US Army Chief of Staff Randy George has been asked to step down by Defense Secretary Pete Hegseth and take immediate retirement, two defense officials and a source familiar with the matter told Reuters https://t.co/TfHoDcbEcG
— Reuters (@Reuters) April 2, 2026
आधिकारिक तौर पर इसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे युद्ध की रणनीतियों को लेकर गहरे मतभेद छिपे हो सकते हैं।
क्या रणनीतिक विफलता या ट्रंप की नाराजगी है असली वजह?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि राष्ट्रपति ट्रंप जनरल रैंडी जॉर्ज की कार्यशैली से खुश नहीं थे। ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों की गति और कुछ रणनीतिक फैसलों को लेकर ट्रंप और जनरल जॉर्ज के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी।
ट्रंप चाहते थे कि ईरान के परमाणु ठिकानों और नेतृत्व पर अधिक आक्रामक प्रहार किए जाएं, जबकि जनरल जॉर्ज संतुलित और सतर्क दृष्टिकोण अपनाने के पक्ष में थे।
ट्रंप का मानना है कि युद्ध के इस नाजुक मोड़ पर उन्हें एक ऐसे सेनापति की जरूरत है जो उनके 'प्रचंड प्रहार' के विजन को बिना किसी हिचकिचाहट के धरातल पर उतार सके।
पेंटागन में बड़े फेरबदल और 'मिलिट्री क्लीनअप' के संकेत
जनरल रैंडी जॉर्ज की विदाई केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं है, बल्कि यह पेंटागन में होने वाले बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वे ओबामा और बाइडन काल के दौरान नियुक्त किए गए शीर्ष सैन्य अधिकारियों को बदल सकते हैं। ट्रंप का आरोप रहा है कि पुरानी सैन्य लीडरशिप बहुत अधिक 'राजनीतिक' हो गई थी।
अब सेना प्रमुख को हटाकर ट्रंप ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे अपनी पसंद की नई टीम तैयार करेंगे जो पूरी तरह से उनके 'अमेरिका फर्स्ट' और आक्रामक सैन्य सिद्धांत के प्रति समर्पित होगी।
नए सेना प्रमुख की तलाश और युद्ध पर पड़ने वाला असर
जनरल जॉर्ज के हटने के बाद अब सवाल यह है कि अमेरिकी सेना की कमान किसके हाथों में होगी? फिलहाल उप-सेना प्रमुख को कार्यवाहक जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन ट्रंप जल्द ही किसी नए 'फायरब्रांड' जनरल के नाम का ऐलान कर सकते हैं।
इस बदलाव का सीधा असर ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध पर पड़ेगा। सैन्य विश्लेषकों का डर है कि कमान में इस अचानक बदलाव से कमांड चेन में अस्थायी अस्थिरता आ सकती है, जिसका फायदा ईरान उठा सकता है।
हालांकि, ट्रंप के समर्थकों का दावा है कि एक नई और ऊर्जावान लीडरशिप से युद्ध को निर्णायक मोड़ पर पहुँचाया जा सकेगा और अमेरिका को जल्द ही इस संघर्ष में पूर्ण विजय प्राप्त होगी।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi















.jpg)







