बंगाल में वोटर लिस्ट पर महासंग्राम, मालदा से कूचबिहार तक सड़कों पर उतरे लोग, ममता बनर्जी ने बताया बड़ी साजिश
West Bengal Election 2026 SIR Protest: बंगाल चुनाव 2026 से पहले SIR प्रक्रिया पर बवाल मचा है. मालदा, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी में लोगों ने उग्र प्रदर्शन किये. वोटर लिस्ट से नाम कटने पर फूटा जनता का गुस्सा. ममता बनर्जी ने भाजपा को घेरा.
The post बंगाल में वोटर लिस्ट पर महासंग्राम, मालदा से कूचबिहार तक सड़कों पर उतरे लोग, ममता बनर्जी ने बताया बड़ी साजिश appeared first on Prabhat Khabar.
Delhi-NCR Groundwater Report: दिल्ली-एनसीआर बना 'डेंजर जोन', भूजल दोहन से सूख रहे हैं बोरवेल, पढ़ें पूरी रिपोर्ट
देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद) में पानी का संकट गहराता जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन क्षेत्रों में घरेलू उपयोग के लिए भूजल का दोहन उसकी पुनर्भरण क्षमता से कई गुना अधिक हो रहा है।
शहरीकरण की तेज रफ्तार और बढ़ती आबादी की प्यास बुझाने के लिए जमीन के नीचे से पानी निकालने की होड़ मची है। इसके परिणामस्वरूप, पिछले कुछ वर्षों में वाटर लेवल औसतन 0.5 से 2 मीटर प्रति वर्ष की दर से नीचे जा रहा है।
कई इलाकों में तो पानी का स्तर इतना गिर गया है कि सामान्य पंपों ने काम करना बंद कर दिया है, जिससे लोगों को और गहरे बोरवेल खोदने पड़ रहे हैं।
घरेलू उपयोग के नाम पर हो रही है सबसे अधिक बर्बादी
चौंकाने वाली बात यह है कि भूजल के दोहन में केवल औद्योगिक इकाइयां ही नहीं, बल्कि घरेलू उपयोग का सबसे बड़ा हिस्सा है। दिल्ली-एनसीआर की बड़ी-बड़ी सोसायटियों और रिहायशी कॉलोनियों में पानी की सप्लाई कम होने के कारण निजी बोरवेलों की बाढ़ आ गई है।
लोग न केवल पीने और नहाने, बल्कि गाड़ियां धोने और बगीचों में पानी देने के लिए भी शुद्ध भूजल का उपयोग कर रहे हैं। अवैध रूप से संचालित सबमर्सिबल पंपों के कारण जमीन के नीचे के जलभृत तेजी से खाली हो रहे हैं। एनजीटी (NGT) और केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) के कड़े नियमों के बावजूद, जमीनी स्तर पर निगरानी की कमी के कारण पानी की यह लूट बदस्तूर जारी है।
डार्क जोन में तब्दील हो रहे हैं दिल्ली और गुरुग्राम के कई इलाके
भूजल स्तर गिरने के कारण दिल्ली के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिले, साथ ही गुरुग्राम और फरीदाबाद के अधिकांश हिस्से 'डार्क जोन' घोषित किए जा चुके हैं। इन इलाकों में जमीन के नीचे पानी का भंडार लगभग समाप्ति की कगार पर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी रफ्तार से दोहन जारी रहा, तो भविष्य में इन क्षेत्रों में जमीन के धंसने का खतरा भी बढ़ सकता है। कंक्रीट के बढ़ते जंगलों के कारण बारिश का पानी जमीन के नीचे नहीं जा पा रहा है, जिससे प्राकृतिक जल पुनर्भरण की प्रक्रिया लगभग रुक गई है। तालाबों और बावड़ियों के अतिक्रमण ने इस संकट को और अधिक भयावह बना दिया है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जागरूकता ही एकमात्र समाधान
इस गंभीर संकट से निपटने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य रूप से लागू करना अब समय की मांग है। प्रशासन ने नियमों में तो इसे शामिल किया है, लेकिन इनका क्रियान्वयन अभी भी कमजोर है।
पर्यावरणविदों का मानना है कि जब तक हर घर और सोसाइटी में पानी के पुनर्भरण की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक केवल दोहन रोकने से काम नहीं चलेगा। इसके अलावा, अपशिष्ट जल के उपचार और पुन: उपयोग को बढ़ावा देना होगा।
जनता के बीच पानी की कीमत को लेकर जागरूकता बढ़ाना और अवैध बोरिंग पर भारी जुर्माना लगाना ही दिल्ली-एनसीआर को 'जीरो वाटर डे' की स्थिति से बचा सकता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi













/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)



