'हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, कोई चिंता नहीं', होर्मुज स्ट्रेट तनाव के बीच ईरानी दूतावास का आश्वासन
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भीषण संघर्ष दूसरे महीने में आ चुका है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान और ईरानी ताकत को पूरी तरह से कमजोर कर दिया गया है, वहीं ईरान भी लगातार हमले तेज कर रहा है। इन सबके बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। मौजूदा हालात के बीच भारत में ईरानी दूतावास ने कहा है कि भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं।
दरअसल, दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य सिर्फ ईरान और ओमान ही तय करेंगे। आप सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं। इसे रिपोस्ट कर भारत में ईरानी दूतावास ने लिखा, होर्मुज स्ट्रेट का भविष्य सिर्फ ईरान और ओमान ही तय करेंगे। आप सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं।
तेहरान के मेयर के प्रवक्ता अब्दुलमोहर मोहम्मदखानी ने कहा कि हाउसिंग यूनिट्स को हुए नुकसान में कांच, दरवाजे और खिड़कियों जैसी छोटी-मोटी मरम्मत से लेकर बड़े रीकंस्ट्रक्शन या पूरे रेनोवेशन तक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 1,869 परिवारों को घर की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि करीब 1,245 परिवारों को 23 रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट किया गया है।
मोहम्मदखानी ने आगे कहा कि अब तक 4,000 से ज्यादा रेजिडेंशियल यूनिट्स की मरम्मत शुरू हो चुकी है, जिन्हें नगर निकाय ने या तो किया है या वित्तीय समर्थन दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्रंप के भाषण के जवाब में एक बयान जारी किया है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी कि ईरान को दो से तीन हफ्ते के अंदर एक समझौते के लिए सहमत होना होगा या अपने हर पावर प्लांट पर हमले का सामना करना होगा।
ट्रंप की इस धमकी को लेकर इस्माइल बघाई ने कहा, हम युद्ध, बातचीत, सीजफायर और फिर उसी पैटर्न को दोहराने के इस बुरे चक्र को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने चल रहे संघर्ष को न केवल ईरान के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और उससे आगे के लिए विनाशकारी बताया।
बघाई ने कहा कि जब तक अमेरिकी-इजरायली हमले जारी रहेंगे, ईरान जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। तेहरान अपने खाड़ी पड़ोसियों को दुश्मन नहीं मानता।
उन्होंने कहा, हमने बार-बार कहा है कि हम उन सभी के साथ अपने अच्छे पड़ोसी वाले संबंध जारी रखने के लिए पक्के इरादे वाले हैं। समस्या यह है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ अपने सैन्य हमले को अंजाम देने के लिए उनके इलाकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया टेक साझेदारी बातचीत से आगे बढ़कर वास्तविकता बनी : रिपोर्ट
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-इंडिया टेक्नोलॉजी और इनोवेशन (एसीआईटीआई) पार्टनरशिप अब केवल बातचीत के आगे बढ़कर वास्तविकता बन रही है, जिसमें नई त्रिपक्षीय प्रतिबद्धताओं और कनाडा-भारत की 13 यूनिवर्सिटी में समझौते के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम रिसर्च और सेमीकंडक्टर्स में कॉरपोरेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
वन वर्ल्ड आउटलुक की रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों देश साझेदारी में पूरक क्षमताएं लाते हैं, जहां भारत इंजीनियरिंग प्रतिभा, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और व्यावहारिक तैनाती में व्यापक क्षमता प्रदान करता है।
कनाडा बुनियादी एआई रिसर्च और विश्वसनीय संस्थानों का योगदान देता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया डीप-टेक रिसर्च क्षमता प्रदान करता है।
रिपोर्ट में कहा गया, नीतिगत दृष्टि से, पूरक शक्तियों के कारण एसीआईटीआई एक प्रतीकात्मक गठबंधन से कहीं अधिक लोकतांत्रिक टेक्नोलॉजी सहयोग के लिए शक्तियों के विभाजन का मॉडल बन गया है।
समझौते में एआई, सेमीकंडक्टर और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर व्यावहारिक कार्य योजनाएं शामिल हैं और इसने पहले ही विश्वविद्यालयों के बीच मजबूत संबंध और छात्रवृत्ति निधि प्रदान की है, जिससे क्रॉस-बॉर्डर रिसर्च, प्रतिभा की गतिशीलता और व्यावसायीकरण में तेजी आई है।
कनाडा-भारत यूनिवर्सिटी साझेदारी में छात्र गतिशीलता, संकाय विनिमय, अनुप्रयुक्त अनुसंधान और क्षेत्र-विशिष्ट सहयोग शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को एआई के समान नीतिगत ढांचे में शामिल करके, समझौते ने दिखाया कि कंप्यूटिंग क्षमता, चिप तक पहुंच और घटकों की लचीली आपूर्ति अब अलग-अलग औद्योगिक चिंताओं के बजाय नवाचार नीति के मुख्य मुद्दे हैं।
कार्य-एकीकृत शिक्षा के माध्यम से भारतीय इंजीनियर कनाडाई एआई संस्थानों में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं और कनाडाई शोधकर्ताओं को भारत के बड़े पैमाने पर डिजिटल अनुप्रयोगों से परिचित करा सकते हैं। इस रणनीति में टोरंटो विश्वविद्यालय के माध्यम से प्रशासित कनाडा में भारतीय छात्रों के लिए 274 से अधिक छात्रवृत्तियों के लिए 25 मिलियन कनाडाई डॉलर तक की धनराशि का समर्थन शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है, हालांकि छात्रवृत्तियां अकेले नवाचार परिणामों की गारंटी नहीं देती हैं, लेकिन वे स्नातक शोधकर्ताओं, संस्थापकों और तकनीकी रूप से कुशल श्रमिकों की संख्या बढ़ाती हैं जो कनाडा में सहयोगी एआई और डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रख सकते हैं।
मीडिया हाउस ने इस बात पर जोर दिया कि क्रियान्वयन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप्स, निवेशकों और आव्रजन मार्गों को इतनी तेजी से जोड़ा जाए कि त्रिपक्षीय सद्भावना को कंपनियों, उत्पादों और उच्च मूल्य वाली नौकरियों में परिवर्तित किया जा सके।
--आईएएनएस
एबीएस/
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