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फ्यूल संकट के बीच भारत की मदद से भूटान गदगद, पीओएल- एलपीजी आपूर्ति के लिए जताया आभार

थिंपू, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष का असर हिमालयी देश भूटान पर भी पड़ा है। सरकार का मानना है कि अब हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं, और यही कारण है कि उन्हें ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। वहीं, सरकार ने पीओएल- एलपीजी आपूर्ति के लिए पड़ोसी देश भारत का आभार जताया है।

प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के कार्यालय से 1 अप्रैल को एक एक बयान जारी कर जनता को बढ़ी कीमतों की वजह बताई। इस बयान के जरिए कार्बन-नेगेटिव भूटान ने जनता से गुजारिश की है कि दूर की यात्रा पर आने-जाने से बचें।

सरकारी सब्सिडी के बावजूद 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के बाद से पेट्रोल की कीमत 60 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। फरवरी से यह लगभग 65 न्गुलट्रम (एनयू) (0.70 अमेरिकी डॉलर) से बढ़कर 1 अप्रैल को नई सरकारी सब्सिडी वाली तय कीमत तक 95 न्गुलट्रम हो गई है।

नए सरकारी आदेश के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 की आधी रात से, थिंपू में पेट्रोल के लिए खुदरा कीमतें बढ़कर 114.31 एनयू प्रति लीटर और डीजल के लिए 174.13 एनयू प्रति लीटर हो गई हैं। हालांकि, फ्यूल सब्सिडी के साथ, पेट्रोल के लिए कीमतें 98.00 एनयू प्रति लीटर और डीजल के लिए 98.31 एनयू प्रति लीटर तय की गई हैं।

प्रधानमंत्री ऑफिस ने बयान में कहा, “हाल के हफ्तों में दुनिया भर में फ्यूल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है और ये हमारे कंट्रोल से बाहर है।

भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच मौजूद भूटान ने 21 मार्च को “घरों और इकॉनमी पर पड़ने वाले असर को कम करने” के लिए सरकारी फ्यूल सब्सिडी शुरू की थी। सरकार ने कहा, घरों और इकॉनमी पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए 21 मार्च 2026 को नेशनल फ्यूल प्राइस स्मूथनिंग फ्रेमवर्क (एनएफपीएसएफ) के जरिए फ्यूल सब्सिडी शुरू की गई थी।

फ्यूल की कीमतें बढ़ने पर सरकार ने जनता से मदद की अपील की है।

सरकार ने आगे कहा, “देश के खजाने पर पड़ रहे भारी बोझ को देखते हुए, सभी पब्लिक सर्विस एजेंसियों को फ्यूल की खपत कम करने के उपाय करने का निर्देश दिया गया है, जैसे काम पर पैदल जाना, गैर-जरूरी यात्रा से बचना और वर्क फ्रॉम होम को तवज्जो देना।”

इसके साथ ही सरकार ने भारत का अंत आभार जताते हुए कहा, भूटान सरकार, ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद पीओएल और एलपीजी की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद कहना चाहती है।

बता दें, कि लगभग 800,000 की आबादी वाला देश भारत के जरिए अपना फ्यूल आयात करता है।

--आईएएनएस

केआर/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत में सिस्टमैटिक क्रेडिट ग्रोथ वित्त वर्ष 27 में 13.5 प्रतिशत रहने का अनुमान : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत की सिस्टमैटिक क्रेडिट ग्रोथ (मार्च 15 तक) 13.8 प्रतिशत रही है और इसके वित्त वर्ष 27 13.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसे लिक्विडिटी और जीएसटी में कटौती के बाद उपभोग आधारित खपत से सपोर्ट मिल रहा है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों के पास अपने क्रेडिट-टू-डिपॉजिट (सीडी) अनुपात को और बढ़ाने की गुंजाइश है क्योंकि जमा वृद्धि 10.8 प्रतिशत पर स्थिर है जबकि तेज क्रेडिट वृद्धि के साथ सीडी अनुपात बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि डिपॉजिट दर के कम रहने से बैंकों को कम ब्याज दरों पर फंड जुटाना एक चुनौती बन रहा है। इस कारण से हमें उम्मीद है कि सावधि जमा (एफडी) पर ब्याज दरें समान रहेंगी।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि कैश रिजर्व रेशियो में कटौती और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एलसीआर-एनएसएफआर ढांचे के समर्थन से सीडी अनुपात में विस्तार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अधिक लाभ होने की संभावना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिस्टमैटिक क्रेडिट ग्रोथ वित्त वर्ष 27 में 13.5 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है। वहीं, डिपॉजिट ग्रोथ 11.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

शुद्ध ब्याज मार्जिन सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है, जिसमें मध्यम आकार के बैंकों के मार्जिन में वृद्धि दर्ज करने की बेहतर संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है, दिसंबर 2025 में रेपो दर में 25 बीपीएस की कटौती का असर चौथी तिमाही में ऋण दर संचरण में पूरी तरह से दिखने की उम्मीद है। परिणामस्वरूप, वित्तपोषण लागत अधिक बनी हुई है, और अधिकांश बैंकों ने हालिया दर कटौती के बाद अपनी टीडी/एसए दरों में कमी नहीं की है।

कुछ बड़े निजी बैंकों के चौथी तिमाही के परिणामों में मार्जिन स्थिर रहने की संभावना है। परिसंपत्ति गुणवत्ता मोटे तौर पर स्थिर पाई गई, हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए नकदी प्रवाह और इनपुट लागत से संबंधित जोखिम पैदा कर दिया है, जिससे इस क्षेत्र में कुछ तनाव उत्पन्न हो सकता है।

निजी बैंकों में परिसंपत्ति गुणवत्ता के संबंध में, रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य पूर्व संघर्ष के बीच व्यावसायिक ऋण और सीवी जैसे क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है, हालांकि निकट भविष्य में इसका प्रभाव सीमित प्रतीत होता है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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