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अमेरिका ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति पर लगे प्रतिबंध हटाए

वॉशिंगटन, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका के वित्त विभाग की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक अपडेट के अनुसार, यूएस ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज पर से बैन हटा दिए हैं।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने स्थानीय समयानुसार बुधवार को कहा कि रोड्रिगेज को उसकी प्रतिबंधित लिस्ट से हटा दिया गया है, लेकिन इस फैसले के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, रोड्रिगेज ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे आपसी संबंधों को सामान्य और मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि आर्थिक विकास और सहयोग का समर्थन करने के लिए वेनेजुएला पर लगे और प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं।

उन्होंने पोस्ट किया, राष्ट्रपति ट्रंप का फैसला हमारे देशों के बीच संबंधों को सामान्य और मजबूत करने की सही दिशा में एक अहम कदम है। हमें भरोसा है कि इस प्रक्रिया और पक्के इरादे से आखिरकार हमारे देश पर लगे और सक्रिय प्रतिबंध हट जाएंगे।

रोड्रिगेज ने कहा, इससे हमारे लोगों के फायदे के लिए तेजी से आर्थिक विकास, निवेश और एक असरदार द्विपक्षीय सहयोग एजेंडा बन सकेगा। आइए, सभी के लिए एक खुशहाल वेनेजुएला बनाने की दिशा में काम करते रहें।

रोड्रिगेज पहले राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के नेतृत्व में उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं और 2018 में उनकी सरकार के सदस्यों को टारगेट करने के लिए अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

अमेरिकी सैन्य बल ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर ऑपरेशन शुरू किया और राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को जबरदस्ती पकड़कर न्यूयॉर्क ले गए। इसके बाद रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली और तब से वॉशिंगटन उनकी सरकार के साथ लगातार संपर्क में है।

अमेरिका-वेनेजुएला के संबंध लंबे समय से खराब रहे हैं। हाल के महीनों में अमेरिका ने कुछ पाबंदियों में ढील दी है, खासकर ऊर्जा सेक्टर में। वेनेजुएला के पास दुनिया के कुछ सबसे बड़े तेल के भंडार हैं और वह ग्लोबल एनर्जी लैंडस्केप में एक अहम खिलाड़ी बना हुआ है।

सोमवार को, काराकस में अमेरिकी दूतावास ने सात साल तक बंद रहने के बाद फिर से काम करना शुरू कर दिया।

--आईएएनएस

केके/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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फ्यूल संकट के बीच भारत की मदद से भूटान गदगद, पीओएल- एलपीजी आपूर्ति के लिए जताया आभार

थिंपू, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया संघर्ष का असर हिमालयी देश भूटान पर भी पड़ा है। सरकार का मानना है कि अब हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं, और यही कारण है कि उन्हें ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। वहीं, सरकार ने पीओएल- एलपीजी आपूर्ति के लिए पड़ोसी देश भारत का आभार जताया है।

प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के कार्यालय से 1 अप्रैल को एक एक बयान जारी कर जनता को बढ़ी कीमतों की वजह बताई। इस बयान के जरिए कार्बन-नेगेटिव भूटान ने जनता से गुजारिश की है कि दूर की यात्रा पर आने-जाने से बचें।

सरकारी सब्सिडी के बावजूद 28 फरवरी को मिडिल ईस्ट संघर्ष शुरू होने के बाद से पेट्रोल की कीमत 60 फीसदी से ज्यादा बढ़ गई है। फरवरी से यह लगभग 65 न्गुलट्रम (एनयू) (0.70 अमेरिकी डॉलर) से बढ़कर 1 अप्रैल को नई सरकारी सब्सिडी वाली तय कीमत तक 95 न्गुलट्रम हो गई है।

नए सरकारी आदेश के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 की आधी रात से, थिंपू में पेट्रोल के लिए खुदरा कीमतें बढ़कर 114.31 एनयू प्रति लीटर और डीजल के लिए 174.13 एनयू प्रति लीटर हो गई हैं। हालांकि, फ्यूल सब्सिडी के साथ, पेट्रोल के लिए कीमतें 98.00 एनयू प्रति लीटर और डीजल के लिए 98.31 एनयू प्रति लीटर तय की गई हैं।

प्रधानमंत्री ऑफिस ने बयान में कहा, “हाल के हफ्तों में दुनिया भर में फ्यूल की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है और ये हमारे कंट्रोल से बाहर है।

भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच मौजूद भूटान ने 21 मार्च को “घरों और इकॉनमी पर पड़ने वाले असर को कम करने” के लिए सरकारी फ्यूल सब्सिडी शुरू की थी। सरकार ने कहा, घरों और इकॉनमी पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए 21 मार्च 2026 को नेशनल फ्यूल प्राइस स्मूथनिंग फ्रेमवर्क (एनएफपीएसएफ) के जरिए फ्यूल सब्सिडी शुरू की गई थी।

फ्यूल की कीमतें बढ़ने पर सरकार ने जनता से मदद की अपील की है।

सरकार ने आगे कहा, “देश के खजाने पर पड़ रहे भारी बोझ को देखते हुए, सभी पब्लिक सर्विस एजेंसियों को फ्यूल की खपत कम करने के उपाय करने का निर्देश दिया गया है, जैसे काम पर पैदल जाना, गैर-जरूरी यात्रा से बचना और वर्क फ्रॉम होम को तवज्जो देना।”

इसके साथ ही सरकार ने भारत का अंत आभार जताते हुए कहा, भूटान सरकार, ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद पीओएल और एलपीजी की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद कहना चाहती है।

बता दें, कि लगभग 800,000 की आबादी वाला देश भारत के जरिए अपना फ्यूल आयात करता है।

--आईएएनएस

केआर/

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