Hanuman Jayanti 2026: क्यों बेड़ियों में कैद हैं हनुमान जी? जानिए इस रहस्यमयी मंदिर का रहस्य
Hanuman Jayanti 2026: आज यानी 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जयंती यानी हनुमान जन्मोत्सव का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. हनुमान जी श्रीराम जी के परम भक्त है. उन्होंने महादेव का रुद्रावतार कहा जाता है और महादेव की कृपा से ही माता अंजनी के गर्भ में वह आए थे. हनुमान जी की रामायण से जुड़ी लीलाओं के बारे में आपने सुना होगा. उसमें एक घटना बहुत लोकप्रिय है, जब हनुमान जी सीता माता से मिलने रावण की लंका में स्थित अशोक वाटिका पहुंचते हैं. उनके उधम से रावण ने हनुमान जी को बेड़ियों से बांधने का आदेश दिया था. हालांकि, तब ऐसा सफल नहीं हो पाया था और हनुमान जी ने सोने की लंका को ही आग के हवाले कर दिया था.
मगर क्या आप जानते हैं भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां हनुमान जी बेड़ियों और जंजीरों से बंधे हुए हैं. वे इस स्वरूप में ही भक्तों को दर्शन देते हैं. हनुमान जी को यहां कोई दंड नहीं मिला हुआ है बल्कि वे अपने आराध्य देव के आदेश का पालन कर रहे हैं. जी हां, यह मंदिर ओडिशा के पुरी में स्थित है. इसे बेड़ी हनुमान कहा जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में और क्यों यहां हनुमान जी को बांधा गया है.
क्यों बेड़ियों से बंधे हैं हनुमान जी? (Bedi Hanuman Mandir Story)
पौराणिक कथा के अनुसार, बेड़ी हनुमान मंदिर की स्थापना बड़ी अनोखी है. दरअसल, पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में हर कोई दर्शन करने कभी भी आ सकता है. मनुष्य, देवी-देवता और गंधर्व. जब से प्रभु जगन्नाथ वहां स्थित है तब से समुद्र देव भी हमेशा वहां उनके दर्शन के लिए मंदिर आ जाते थे. मगर जब भी समुद्र देव आते थे तो अपनी ऊंची लहरों से मंदिर और पुरी का नुकसान कर देते थे. पुरी में रहने वाले लोगों को समंदर की इन उफनती लहरों से भय होने लगा. दूसरे भक्तों के लिए भी समुद्र देव परेशानी का कारण बन गए थे.
ये भी पढ़ें- Hanuman Ji Ki Aarti: आज हनुमान जयंती पर जरूर करें बजरंगबली की आरती, पाएं शक्ति और सफलता का आशीर्वाद
समुद्र देव को रोकने के लिए स्थापित हुए हनुमान जी
इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए जगन्नाथ जी ने हनुमान जी को आदेश दिया कि वे मंदिर की रक्षा के लिए वहां हमेशा खड़े रहे. बता दें कि जगन्नाथ जी विष्णु का ही स्वरूप है जिनकी पूजा कलियुग में की जा रही है. विष्णु जी के स्वरूप श्रीराम के हनुमान जी परम भक्त है, इसलिए उनका आदेश मानना हनुमान जी के लिए जरूरी था. हालांकि, इसमें भी काफी समस्याएं आई क्योंकि हनुमान जी ने कुछ समय तक तो अपनी इस जिम्मेदारी को अच्छे से निभाया. मगर कुछ दिनों बाद वह भी खुद प्रभु के दर्शन करने के लिए बार-बार मंदिर में प्रवेश कर जाते थे. दूसरी ओर मौका पाते ही समुद्र भी मंदिर में प्रवेश कर लेते थे.
तो इसलिए हनुमान जी बांधे गए थे
हनुमान जी अपने दायित्व को सही से पूरा नहीं कर पा रहे थे और बार-बार मंदिर आ जाते थे. ऐसे में भगवान जगन्नाथ जी ने हनुमान जी को पुरी धाम की सुरक्षा में चुक न हो इससे बचने के लिए उन्हें समुद्र तट पर बेड़ियों से बांध दिया ताकि वे अपने कर्तव्य का पालन सही तरीके से कर सकें.
दंड नहीं सही अर्थ समझें
जगन्नाथ पुरी ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर स्थित है. समुद्र देव स्वयं भगवान जगन्नाथ के ससुर है क्योंकि उन्होंने माता लक्ष्मी से विवाह किया है. ऐसे में भगवान जगन्नाथ अपने पिता तुल्य को रोक नहीं सकते थे. मगर हनुमान जी भी बार-बार अपने कर्तव्य से पीछे हट रहे थे. इसलिए, हनुमान जी को वहां बेड़ियों से बांध दिया था ताकि वे सदा-सदा के लिए मंदिर और पुरी की रक्षा कर सके. इसे दंड नहीं बल्कि हनुमान जी का अपने वचन पर अटल रहने का निश्चय है.
भक्तों ने किया मंदिर स्थापित
इसके बाद इस स्थान पर बेड़ी हनुमान मंदिर को स्थापित किया गया. मान्यता है कि इस जब भी कोई जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं तो उन्हें बेड़ी हनुमान मंदिर के भी दर्शन करने चाहिए. इस मंदिर को दरिया महावीर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.
बेड़ी हनुमान मंदिर की वास्तुकला बेहद खास
हनुमान जी के इस मंदिर की वास्तुकला भी बेहद खास है. इस मंजिर में दो भुजाओं वाले हनुमान जी हैं, जिनके एक हाथ में लड्डू है और दूसरे हाथ में गदा है. मंदिर के बाहर दिवारों पर अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं. दक्षिणी दीवार पर श्रीगणेश की प्रतिमा है और पश्चिमी दिवार पर माता अंजना की छवि है.
ये भी पढ़ें- Hanuman Jayanti 2026 Shubh Muhurat: आज है हनुमान जयंती, नोट करें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और उपाय
भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2026 में 62 प्रतिशत की बड़ी उछाल, 80 से ज्यादा देशों तक हुआ विस्तार
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। सरकार ने गुरुवार को बताया कि भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपए के मुकाबले 62.66 प्रतिशत ज्यादा है।
सरकार के अनुसार, इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) और निजी क्षेत्र, दोनों का अहम योगदान रहा। कुल निर्यात में डीपीएसयू का हिस्सा 54.84 प्रतिशत और निजी कंपनियों का 45.16 प्रतिशत रहा।
रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि यह उपलब्धि भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातक देशों में शामिल करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप है।
डीपीएसयू के निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 151 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निजी क्षेत्र ने भी 14 प्रतिशत की बढ़त हासिल कर अपनी मजबूत मौजूदगी दिखाई।
मूल्य के हिसाब से देखें तो निजी क्षेत्र ने 17,353 करोड़ रुपए का निर्यात किया, जबकि डीपीएसयू का योगदान 21,071 करोड़ रुपए रहा। पिछले वित्त वर्ष में ये आंकड़े क्रमशः 15,233 करोड़ रुपए और 8,389 करोड़ रुपए थे।
भारत अब केवल रक्षा प्रणालियों और उप-प्रणालियों का भरोसेमंद वैश्विक साझेदार ही नहीं है, बल्कि वित्त वर्ष 2026 तक 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। साथ ही, निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 128 से 145 हो गई है, जो 13.3 प्रतिशत की वृद्धि है।
यह दर्शाता है कि भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक स्तर पर तेजी से स्वीकार किया जा रहा है और यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में अपनी जगह मजबूत कर रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस शानदार प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि भारत रक्षा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में एक वैश्विक हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक नई सफलता की कहानी लिख रहा है।
सरकार के अनुसार, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यानी व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने और निर्यातकों को सुविधाएं देने के लगातार प्रयासों से भारत का रक्षा उद्योग अब अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन-आधारित बन गया है।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation






















