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ईरान में किसकी सरकार? युद्ध के बीच देश की राजनीति कैसे चल रही, समझिए पूरा सिस्टम...

Iran Government System: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Israel के साथ टकराव के बीच Iran की आंतरिक राजनीति भी चर्चा में है. दुनिया भर में लोग यह जानना चाह रहे हैं कि इस समय ईरान में किसकी सरकार है और वहां की सत्ता व्यवस्था कैसे काम करती है?

ईरान में किसके हाथ में सत्ता?

ईरान एक इस्लामिक रिपब्लिक है, जहां सबसे शक्तिशाली पद सुप्रीम लीडर का होता है. पहले यह पद Ali Khamenei के पास था, उनकी मौत के बाद ये पद अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ये जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इसके अलावा मौजूदा राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian हैं, जो सरकार चलाने और आर्थिक-प्रशासनिक फैसले लेने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं.

अली खामेनेई की मौत के बाद इन तीनों ने संभाला था मोर्चा 

ईरान न्यायपालिका के प्रमुख घोलामहुसैन मोहसेनी एजेई (Gholamhossein Mohseni Ejei) हैं और अलीरेजा आराफी (Alireza Arafi) यहां वरिष्ठ धर्मगुरु हैं. अली खामेनेई की मौत के तुरंत बाद देश इन तीनों की अंतरिम लीडरशिप काउंसिल के रूप में कुछ दिनों तक काम संभाला था. जिसके बाद से अब मोजतबा खामेनेई सुप्रीम लीडर देश की कमान संभाल रहे हैं.

अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित, लोग हैं परेशान

देश की सत्ता में IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) का बहुत बड़ा रोल है, उन्होंने मोजतबा के चयन में दबाव डाला और हार्डलाइन (कठोर) नीतियां जारी रखीं हैं. देश की अंदरूनी स्थिति की बात करें तो हालत खराब हैं. देश आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है, महंगाई और बेरोजगारी से लोग परेशान हैं. अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है. तेल निर्यात, मुद्रास्फीति और प्रतिबंध बढ़ सकते हैं.

आगे क्या हो सकता है? 

आगे क्या हो सकता है? इस पर बात करें तो अभी तो युद्ध जारी है. अगर अमेरिका-इजराइल हमले बढ़ाए तो ईरान मिसाइल हमलों और क्षेत्रीय प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह आदि) से जवाब दे सकता है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दबाव का हथियार बनाया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि IRGC और आइडियोलॉजी की वजह से पूरा सिस्टम टूटने की संभावना कम है. कोई बड़ा विद्रोह अभी दिख नहीं रहा. आगे IRGC का प्रभाव और बढ़ सकता है. अगर मोजतबा खामेनेई कमजोर साबित हुए तो हार्डलाइनर्स और प्रैग्मेटिस्ट्स  के बीच टकराव हो सकता है.  

संसद और सत्ता का ढांचा

ईरान की संसद को मजलिस कहा जाता है. यहां चुने हुए सांसद कानून बनाते हैं और सरकार की नीतियों पर चर्चा करते हैं. हालांकि अंतिम निर्णय कई मामलों में सुप्रीम लीडर और सुरक्षा संस्थाओं के प्रभाव में ही होता है राजनीतिक व्यवस्था में गार्डियन काउंसिल भी अहम भूमिका निभाती है, जो चुनाव और कानूनों की निगरानी करती है.

अभी ईरान में लोग क्या देख रहे हैं

इजरायल के साथ तनाव और क्षेत्रीय हालात के कारण ईरान के भीतर सुरक्षा और विदेश नीति सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. देश में कई लोग सरकार के कड़े रुख का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ वर्ग आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों को लेकर चिंता भी जता रहे हैं. तेल निर्यात, डॉलर की कीमत और महंगाई जैसे आर्थिक मुद्दे भी आम लोगों के बीच चर्चा में हैं.

आगे सरकार में क्या संभावित बदलाव हो सकते हैं

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में ईरान की सरकार सुरक्षा और सैन्य रणनीति पर ज्यादा फोकस कर सकती है. अगर क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक चलता है तो विदेश नीति और रक्षा बजट में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं. इसके अलावा पश्चिमी देशों के साथ रिश्तों और प्रतिबंधों को लेकर भी आने वाले महीनों में नए राजनीतिक फैसले सामने आ सकते हैं.

FAQ

Q1. ईरान में सबसे शक्तिशाली नेता कौन है?
ईरान में सबसे शक्तिशाली पद सुप्रीम लीडर का होता है, जो अभी Mojtaba Khamenei है.

Q2. ईरान का राष्ट्रपति कौन है?
मौजूदा समय में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन हैं.

Q3. क्या ईरान में लोकतांत्रिक चुनाव होते हैं?
हां, राष्ट्रपति और संसद के लिए चुनाव होते हैं, लेकिन सुप्रीम लीडर और धार्मिक संस्थाओं का प्रभाव भी काफी मजबूत रहता है.

Q4. अभी ईरान में सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?
इजरायल के साथ तनाव, आर्थिक प्रतिबंध और महंगाई इस समय सबसे बड़े मुद्दों में शामिल हैं.

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Hanuman Jayanti 2026: क्यों बेड़ियों में कैद हैं हनुमान जी? जानिए इस रहस्यमयी मंदिर का रहस्य

Hanuman Jayanti 2026: आज यानी 2 अप्रैल 2026 को  हनुमान जयंती यानी हनुमान जन्मोत्सव का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. हनुमान जी श्रीराम जी के परम भक्त है. उन्होंने महादेव का रुद्रावतार कहा जाता है और महादेव की कृपा से ही माता अंजनी के गर्भ में वह आए थे. हनुमान जी की रामायण से जुड़ी लीलाओं के बारे में आपने सुना होगा. उसमें एक घटना बहुत लोकप्रिय है, जब हनुमान जी सीता माता से मिलने रावण की लंका में स्थित अशोक वाटिका पहुंचते हैं. उनके उधम से रावण ने हनुमान जी को बेड़ियों से बांधने का आदेश दिया था. हालांकि, तब ऐसा सफल नहीं हो पाया था और हनुमान जी ने सोने की लंका को ही आग के हवाले कर दिया था. 

मगर क्या आप जानते हैं भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां हनुमान जी बेड़ियों और जंजीरों से बंधे हुए हैं. वे इस स्वरूप में ही भक्तों को दर्शन देते हैं. हनुमान जी को यहां कोई दंड नहीं मिला हुआ है बल्कि वे अपने आराध्य देव के आदेश का पालन कर रहे हैं. जी हां, यह मंदिर ओडिशा के पुरी में स्थित है. इसे बेड़ी हनुमान कहा जाता है. आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में और क्यों यहां हनुमान जी को बांधा गया है.

क्यों बेड़ियों से बंधे हैं हनुमान जी? (Bedi Hanuman Mandir Story)

पौराणिक कथा के अनुसार, बेड़ी हनुमान मंदिर की स्थापना बड़ी अनोखी है. दरअसल, पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर में हर कोई दर्शन करने कभी भी आ सकता है. मनुष्य, देवी-देवता और गंधर्व. जब से प्रभु जगन्नाथ वहां स्थित है तब से समुद्र देव भी हमेशा वहां उनके दर्शन के लिए मंदिर आ जाते थे. मगर जब भी समुद्र देव आते थे तो अपनी ऊंची लहरों से मंदिर और पुरी का नुकसान कर देते थे. पुरी में रहने वाले लोगों को समंदर की इन उफनती लहरों से भय होने लगा. दूसरे भक्तों के लिए भी समुद्र देव परेशानी का कारण बन गए थे.

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समुद्र देव को रोकने के लिए स्थापित हुए हनुमान जी

इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए जगन्नाथ जी ने हनुमान जी को आदेश दिया कि वे मंदिर की रक्षा के लिए वहां हमेशा खड़े रहे. बता दें कि जगन्नाथ जी विष्णु का ही स्वरूप है जिनकी पूजा कलियुग में की जा रही है. विष्णु जी के स्वरूप श्रीराम के हनुमान जी परम भक्त है, इसलिए उनका आदेश मानना हनुमान जी के लिए जरूरी था. हालांकि, इसमें भी काफी समस्याएं आई क्योंकि हनुमान जी ने कुछ समय तक तो अपनी इस जिम्मेदारी को अच्छे से निभाया. मगर कुछ दिनों बाद वह भी खुद प्रभु के दर्शन करने के लिए बार-बार मंदिर में प्रवेश कर जाते थे. दूसरी ओर मौका पाते ही समुद्र भी मंदिर में प्रवेश कर लेते थे.

तो इसलिए हनुमान जी बांधे गए थे

हनुमान जी अपने दायित्व को सही से पूरा नहीं कर पा रहे थे और बार-बार मंदिर आ जाते थे. ऐसे में भगवान जगन्नाथ जी ने हनुमान जी को पुरी धाम की सुरक्षा में चुक न हो इससे बचने के लिए उन्हें समुद्र तट पर बेड़ियों से बांध दिया ताकि वे अपने कर्तव्य का पालन सही तरीके से कर सकें.

दंड नहीं सही अर्थ समझें

जगन्नाथ पुरी ओडिशा के पुरी समुद्र तट पर स्थित है. समुद्र देव स्वयं भगवान जगन्नाथ के ससुर है क्योंकि उन्होंने माता लक्ष्मी से विवाह किया है. ऐसे में भगवान जगन्नाथ अपने पिता तुल्य को रोक नहीं सकते थे. मगर हनुमान जी भी बार-बार अपने कर्तव्य से पीछे हट रहे थे. इसलिए, हनुमान जी को वहां बेड़ियों से बांध दिया था ताकि वे सदा-सदा के लिए मंदिर और पुरी की रक्षा कर सके. इसे दंड नहीं बल्कि हनुमान जी का अपने वचन पर अटल रहने का निश्चय है. 

भक्तों ने किया मंदिर स्थापित

इसके बाद इस स्थान पर बेड़ी हनुमान मंदिर को स्थापित किया गया. मान्यता है कि इस जब भी कोई जगन्नाथ मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं तो उन्हें बेड़ी हनुमान मंदिर के भी दर्शन करने चाहिए. इस मंदिर को दरिया महावीर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. 

बेड़ी हनुमान मंदिर की वास्तुकला बेहद खास

हनुमान जी के इस मंदिर की वास्तुकला भी बेहद खास है. इस मंजिर में दो भुजाओं वाले हनुमान जी हैं, जिनके एक हाथ में लड्डू है और दूसरे हाथ में गदा है. मंदिर के बाहर दिवारों पर अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं. दक्षिणी दीवार पर श्रीगणेश की प्रतिमा है और पश्चिमी दिवार पर माता अंजना की छवि है. 

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