भारत में सुबह 6:30 बजे का वक्त था अमेरिका में रात के 9:00 बज रहे थे। डोनाल्ड ट्रंप आते हैं 20 मिनट तक अपना बखान करते हैं और कुछ दावे करते हैं। कुछ एनालिस्ट्स को और इन्वेस्टर्स को भी ऐसी उम्मीद थी कि शायद ट्रंप ऐसा कह दें कि ईरान जंग हम खत्म करने वाले हैं या बहुत जल्द खत्म करने वाले हैं। कुछ दिनों में खत्म करने वाले हैं। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। जो सारी चीजें वो लगातार ट्रुथ सोशल पर कह रहे थे, लगातार बयान दे रहे थे। उन्हीं सारी चीजों को कंपाइल करके एक 19 मिनट की स्पीच बना दी है। हां ये अच्छा है कि 19 मिनट की जो ये स्पीच थी इसमें उन्होंने बहुत सारी चीजें ऐसी बताई कि हम इसलिए जंग जंग हमने इसलिए छेड़ी है। हमारा मकसद ये था। बहुत तमाम चीजें। 28 फरवरी को जब उन्होंने जंग छेड़ी थी तब 8 मिनट की स्पीच दी थी। बाकायदे इस तरह की स्पीच तो उस दिन होनी चाहिए थी जो अभी हुई है। हम इसलिए जंग छेड़े थे, ये किए थे हमने हम और उस स्पीच की शुरुआत ही ऐसी हुई है कि हम मतलब हमारी निर्णायक जीत हो रही है। डिसाइसिव विक्ट्री ओवरवेल्मिंग विक्ट्री हम ले रहे हैं। मतलब उसकी शुरुआत ही उन्होंने जीत के ऐलान के साथ किया है।
ट्रंप ने फिर से दोहराया है कि ईरान जो है न्यूक्लियर हथियार बनाने के बहुत करीब था। यह बात उनकी खुफिया एजेंसीज यह बात नहीं मानती हैं। उनका कहना है कि एकदम वो कुछ ही वक्त दूर था। बहुत जल्द वो परमाणु बम बनाने वाला था। यही चीज जून 2025 में भी इन लोगों ने बोली थी। लेकिन उसको भी खुफिया एजेंसियों ने गलत ठहराया था।
अगर ईरान करीब भी है अगर ऐसा मान भी लिया जाए तो भी खुफिया एजेंसीज जैसा पश्चिमी खुफिया एजेंसीज कहती हैं कि वो कुछ महीने कुछ एक साल से ज्यादा समय लग सकता है। अगर वो बनाना चाहे तो ये भी हमें नहीं पता है कि वो वाकई बनाना चाहता है या नहीं। अगर वो बनाना भी चाहे तो उसके पास जो यूरेनियम है तभी भी उसे साल से ज्यादा से ज्यादा का समय लगेगा। तो ये क्लियर नहीं है कि क्यों आपने जंग छेड़ी बार-बार हम वहीं पे आगे पहुंच गए हैं। न्यूक्लियर वाले में एक और पॉइंट है कि ऐसा माना जाता है कि ईरान के पास 440 किलो यूरेनियम है। तो ये एक अंदेशा जताया जा रहा था कि इस जंग में उस यूरेनियम को निकालने के लिए अमेरिका कोई ऑपरेशन चलाएगा। यह यूरेनियम कहा जाता है कि ईरान के जो न्यूक्लियर प्लांट्स हैं नतान और इसहान उसमें अंडर ग्राउंड बंकर्स में रखा गया है। तो कुछ दिनों से ऐसी खबरें चल रही थी कि अमेरिका अपने स्पेशल कमांडोज़ वहां पर भेजेगा और वो लोग वहां से उसे चुरा कर लाएंगे।
एक दावा और ट्रंप ने फिर से दोहराया कि ईरान ने अपने 45,000 लोगों का कत्ल कर दिया। जी। इसके पहले 28 फरवरी को जब उन्होंने जंग शुरू की थी तब बोला था कि हमने कि 35,000 लोगों का कत्ल कर दिया। उसके पहले उन्होंने कोई और फिगर दिया था। तो वो लगातार अपने मन मुताबिक जो है ये फिगर बदलते रहते हैं क्योंकि वो उन्हें वो वाली इमेज भी पेश करनी है कि एक मसीहा के तौर पर कि हम लोकतंत्र ले आएंगे। ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि आप डील करिए। अगर आप डील नहीं करेंगे तो हमले और तेजी से बढ़ते चले जाएंगे। एक पॉइंट उन्होंने ये कहा है कि अगर आपने डील नहीं की तो हम सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पे बमबारी करेंगे। हम इलेक्ट्रिक ग्रिड जो है पावर ग्रिड जो है उन उस पे हमला करेंगे। अगर आप पावर ग्रिड पे हमला करेंगे तो जाहिर जाहिर सी बात है कि आप उस आवाम को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उसी जनता को जिसको आप ये दावा करते हैं कि आप उन्हें आजाद करने आए थे। पानी को लेकर भी कल बोल आज पानी को लेकर तो उन्होंने नहीं बोला लेकिन इसके पहले दो दिन पहले उन्होंने पानी पानी को लेकर बोला था कि डिसलिनेशन प्लांट्स जो हैं डिसलिनेशन प्लांट्स जिससे जो है समंदर का जो पानी है उसे पीने लायक बनाया जाता है। ये गल्फ स्टेट्स जो है इनको इस उनको इसका इस्तेमाल जो है काफी हद तक पड़ता है। सऊदी अरब और कतर जैसे जो स्टेट्स हैं ईरान ईरान में खुद सूखे की समस्या है। पानी की समस्या है।
ट्रंप के भाषण की 10 बड़ी बातें
ईरान की सैन्य ताकत कमजोर – अमेरिका का दावा है कि ईरान की नौसेना और वायुसेना काफी हद तक नष्ट हो चुकी है और उसके कई बड़े नेता मारे गए हैं।
रिवोल्यूशनरी गार्ड को बड़ा नुकसान – कहा गया कि ईरान के मिसाइल, ड्रोन और हथियार बनाने की क्षमता बहुत कम हो गई है और उनकी फैक्ट्रियां तबाह की जा रही हैं।
मुख्य लक्ष्य लगभग पूरे – अमेरिका का कहना है कि ईरान को आतंकवादी संगठनों की मदद करने और परमाणु हथियार बनाने से रोकना उनका मुख्य उद्देश्य है, जो लगभग पूरा हो चुका है।
आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी – अमेरिका ने कहा कि आने वाले 2–3 हफ्तों में ईरान पर और सख्त हमले किए जा सकते हैं।
जरूरत पड़ी तो बिजली और तेल पर हमला – चेतावनी दी गई कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बिजली संयंत्र और तेल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है।
तेल की कीमत बढ़ने का कारण – अमेरिका का कहना है कि ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर हमलों की वजह से पेट्रोल की कीमतों में अस्थायी बढ़ोतरी हुई है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम – अमेरिका का दावा है कि वह इस मार्ग से बहुत कम तेल लेता है और भविष्य में भी इसकी जरूरत कम रहेगी।
ओबामा का परमाणु समझौता खत्म किया – ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ हुआ पुराना परमाणु समझौता खत्म किया क्योंकि वह खतरनाक था।
शेयर बाजार में सुधार का भरोसा – उन्होंने कहा कि शेयर बाजार में थोड़ी गिरावट आई थी लेकिन अब फिर तेजी आने की उम्मीद है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत – ट्रंप के अनुसार देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और जल्द ही पहले से बेहतर स्तर पर पहुंच जाएगी।
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समंदर के बीच फंसा एक जहाज ऊपर से गुजरती मिसाइलें और हर पल मौत का खतरा और फिर भी 27 भारतीय अपनी जान दांव पर लगाकर डटे रहे। यह कहानी है उस भारतीय गैस टैंकर की जो यूएई से चला था। लेकिन जंग के बीच 23 दिन तक यह फंसा रहा और फिर एक खतरनाक रास्ते से निकलकर यह भारत पहुंचा। दरअसल बता दें कि पाइन गैस टैंकर 27 फरवरी 2026 को यूएई के रूएस पोर्ट से 45,000 मेट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत के लिए रवाना होने वाला था। जहाज में 27 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे। जिन्हें यह उम्मीद थी कि बस एक हफ्ते में यह घर पहुंच जाएंगे। लेकिन 28 फरवरी को इजराइल और यूनाइटेड स्टेट्स यानी कि अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया और सब कुछ ही सेकंड में बदल गया। जंग शुरू हो गई और दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता यानी कि स्टेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से बंद हो गया। ईरान ने वहां पर माइंस बिछा दिए। जहाजों की आवाजाही रोक दी गई और यही वो जगह थी जहां पर भारतीय जहाज फंस गया।
बता दें कि 23 दिन यह जहाज समंदर के बीच खड़ा रहा। चीफ ऑफिसर इस पूरे घटना को लेकर यह बताते हैं कि हर दिन सिर के ऊपर से मिसाइलें और ड्रोन गुजरते थे। सोचिए चारों तरफ जंग बीच समंदर और कोई मदद नहीं। कहावत है कि जाको राखे सया मार सके ना कोई लेकिन यहां हालात इतने खतरनाक थे कि हर पल डर बना हुआ था। फिर इसके बाद 11 मार्च को उम्मीद जगी। भारतीय अधिकारियों ने यह कहा तैयार रहो निकल सकते हो। लेकिन जंग और भी ज्यादा तेज हो गई और इंतजार लंबा हो गया। फिर आखिरकार 23 मार्च का दिन आता है। 23 मार्च को रास्ता मिला लेकिन यह रास्ता आसान नहीं था क्योंकि स्टेट ऑफ हॉरर्मूस माइंस से भरा हुआ था। तब ईरान की सेना यानी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स मदद के लिए आगे आती है। सामने आती है। उन्होंने एक नया बेहद सकरा और जोखिम भरा रास्ता सुझाया और यह रास्ता था लाख आइलैंड के पास से गुजरने वाला। जब यहां सबसे बड़ा फैसला जो लेना था वो यह था कि कंपनी ने यह साफ कहा कि जब तक हर क्रू मेंबर हां नहीं करेगा जहाज आगे नहीं बढ़ेगा।
27 जिंदगियां और एक फैसला और फिर सभी ने एक साथ कहा हम तैयार हैं। इसके बाद शुरू हुआ मौत के साए से बाहर निकलने का मिशन। ईरान ने ना कोई फीस ली ना जहाज पर चढ़कर कोई भी जांच की। और जैसे ही जहाज़ स्टेट ऑफ हॉरर्मूस पार कर गया। इंडियन नेवी पहले से ही वहां पर मौजूद थी। भारतीय युद्ध पोतों ने करीब 20 घंटे तक जहाज को एस्कॉट किया और आखिरकार बता दें कि जहाज सुरक्षित तरीके से भारत पहुंच गया। यह सिर्फ बता दें कि एक जहाज की कहानी नहीं है। आज भी करीब 18 भारतीय जहाज और 450 से ज्यादा नाविक उसी खाड़ी में फंसे हुए हैं। भारत जैसे देश के लिए जहां करोड़ों घर एलपीजी पर निर्भर है। ऐसी सप्लाई लाइफ लाइन होती है। कहते हैं हीरो वो नहीं जो दिखता है। हीरो वो है जो हालात से लड़ता है। और इस कहानी के असली हीरो है वो 27 क्रू मेंबर्स। भारतीय नौसेना के वो लोग जो हर हाल में सप्लाई चेन को जिंदा रखते हैं।
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