SA vs NZ: आखिरी गेंद पर चाहिए थे 6 रन, डेब्यूटेंट ने छक्का जड़ साउथ अफ्रीका को दिला दी जीत
SA Women vs NZ Women ODI: महिला वनडे क्रिकेट में एक यादगार मुकाबले में कायला रेयनेके ने अपने डेब्यू को ऐतिहासिक बना दिया। हेग्ले ओवल में खेले गए पहले वनडे में साउथ अफ्रीका को आखिरी गेंद पर जीत दिलाकर उन्होंने सबका दिल जीत लिया। इस जीत के साथ साउथ अफ्रीका ने तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।
न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 268 रन बनाए थे, जो उस पिच पर चुनौतीपूर्ण स्कोर माना जा रहा था। लक्ष्य का पीछा करते हुए साउथ अफ्रीका की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए। लेकिन इसके बाद डर्कसेन (72) और सुन लुस (53) ने 123 रन की साझेदारी कर टीम को मैच में वापस ला दिया।
मैच के आखिरी ओवरों में मुकाबला पूरी तरह रोमांचक हो गया। साउथ अफ्रीका को जीत के लिए आखिरी ओवर में 14 रन चाहिए थे और क्रीज पर थीं डेब्यू कर रहीं रेयनेके। उन्होंने न सिर्फ दबाव संभाला, बल्कि आखिरी ओवर में 13 रन बना दिए। आखिरी गेंद पर 6 रन की जरूरत थी और रेयनेके ने लंबा छक्का जड़कर टीम को शानदार जीत दिला दी। उन्होंने 32 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाए, जिसमें 3 चौके और 2 छक्के शामिल रहे।
Second game in a row, Kayla Reyneke flexes her power hitting ???? #SonySportsNetwork #NZWvSAW pic.twitter.com/VeWrg5Er0F
— Sony Sports Network (@SonySportsNetwk) March 20, 2026
खास बात यह रही कि मैच के पहले 99 ओवर में एक भी छक्का नहीं लगा था, लेकिन 100वें ओवर में रेयनेके ने 2 छक्के जड़कर खेल का रुख ही बदल दिया। उन्होंने सूजी बेट्स के ओवर में ये कारनामा किया, जो न्यूजीलैंड की अनुभवी गेंदबाज हैं।
इससे पहले न्यूजीलैंड की ओर से मैडी ग्रीन ने 85 रन की अहम पारी खेली थी। वहीं साउथ अफ्रीका की तेज गेंदबाज अयाबोंगा खाका ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 6 विकेट लिए और न्यूजीलैंड को 268 रन पर रोकने में अहम भूमिका निभाई।
मैच के दौरान कई बार ऐसा लगा कि साउथ अफ्रीका हार की ओर बढ़ रहा है, लेकिन रेयनेके ने धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया। उन्होंने अंतिम ओवर में सिंगल लेने से भी इनकार किया ताकि स्ट्राइक उनके पास ही रहे, जो उनकी समझदारी को दिखाता है। इस जीत के साथ साउथ अफ्रीका ने सीरीज में बढ़त बना ली है और रेयनेके ने अपने डेब्यू को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।
New Year 2025: नए साल में शुरू करें ग्रैटिट्यूड प्रैक्टिस, बने रहते हैं रिश्ते
New Year 2025: हममें से अधिकांश लोगों के जीवन का एक बड़ा हिस्सा इस सोच और चिंता में गुजर जाता है कि हमारे पास किस-किस चीज की कमी है, दूसरों के पास जो चीजें हैं, वो हमारे पास क्यों नहीं हैं? हम हमेशा अपने पास कुछ ना कुछ कमी महसूस करते हैं। इसको लेकर तनाव में रहते हैं। लेकिन जिस दिन हम इस सोच को बदल कर अपने पास जो कुछ भी है, उसके लिए आभार व्यक्त करने लगेंगे, उस दिन से अपने जीवन को जीने का नजरिया बदल जाएगा। हम खुश रहेंगे। तो क्यों ना, इस नए साल के अपने रेजोल्यूशन लिस्ट में ग्रैटिट्यूड प्रैक्टिस को भी शामिल करें।
मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी:
आज हम जैसी भागम-भाग भरी तनावपूर्ण जिंदगी जी रहे हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं, ऐसे में ग्रैटिट्यूड यानी आभार जताना एक ऐसा माध्यम है, जिसे अपनाकर हम अपने तनाव को कम कर सकते हैं। यह हमारे मन को शांत रखेगा। किसी भी चीज के लिए, जो हमारे पास नहीं है, खुद को संतुष्ट कर लेना, ग्रैटिट्यूड प्रैक्टिस का ही हिस्सा है। आपके पास जो है, उसमें खुश रहना जीवन के प्रति आभार व्यक्त करना है।
बने रहते हैं रिश्ते:
कई बार छोटी-छोटी बातें हमारे नजदीकी संबंधों को कमजोर बना देती हैं, क्योंकि हम बातों को अनदेखा करना नहीं जानते। लेकिन जब हम उसी रिश्ते की अच्छी बातों को लेकर आभार प्रकट करने लगते हैं तो ना सिर्फ इससे मन हल्का होता है, टूटते रिश्ते बने रहते हैं।
बनती है पॉजिटिव सोच:
जब भी जीवन में हम किसी चीज को लेकर या किसी व्यक्ति के लिए आभार प्रकट करते हैं तो यह हमारी सोच को पॉजिटिविटी की तरफ ले जाता है। आज के समय में जब दूसरों के लिए मन बहुत जल्दी नफरत से भर जाता है, दिल जल्दी किसी को माफ करने को तैयार नहीं होता, ऐसे में ग्रैटिट्यूड प्रैक्टिस एक सरल माध्यम है, जिससे आप अपने को पॉजिटिव रख सकती हैं।
अपने अंदर की इंसानियत को रखें जिंदा:
आज समय ऐसा है, किसी अपने के ना रहने का गम, हमें सताता नहीं है। इसका मतलब यही है कि कहीं ना कहीं हमारे अंदर की पीड़ा-करुणा यानी इंसानियत के भाव मर गए हैं। आभार प्रकट करना जीवन जीने की एक कला है, यह हमारे अंदर की इंसानियत को कभी मरने नहीं देती है।
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बुशरा फातमा
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