थायरॉइड की गड़बड़ी दिमाग पर डालती है असर, जानें कैसे बनती है डिप्रेशन और एंग्जायटी की वजह
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर थकान, मूड स्विंग या चिंता को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे वजह सिर्फ मानसिक तनाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर हो रही कोई हार्मोनल गड़बड़ी भी हो सकती है।
मेडिकल रिसर्च बताती है कि थायरॉइड ग्रंथि में असंतुलन वजन को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह सीधे हमारे दिमाग और भावनाओं पर भी असर डाल सकता है। यही कारण है कि कई लोग बिना वजह उदासी, घबराहट या ध्यान की कमी महसूस करते हैं, लेकिन असली कारण समझ नहीं पाते।
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, थायरॉइड एक छोटी सी ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने वाले हिस्से में स्थित होती है। यह ग्रंथि ऐसे हार्मोन बनाती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, दिल की धड़कन, शरीर के तापमान और ऊर्जा के स्तर को नियंत्रित करते हैं। ये हार्मोन दिमाग के केमिकल बैलेंस को भी प्रभावित करते हैं, जिससे हमारी सोचने की क्षमता और भावनाएं संतुलित रहती हैं।
जब थायरॉइड सही तरीके से काम नहीं करता, तो इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगता है। अगर शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम हो जाए, जिसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है, तो व्यक्ति को लगातार थकान, उदासी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। ऐसे लोगों को अक्सर काम करने का मन नहीं करता, सोचने की गति धीमी हो जाती है और याददाश्त पर भी असर पड़ सकता है।
डॉक्टरों का मानना है कि थायरॉइड हार्मोन सीधे तौर पर दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और डोपामाइन को प्रभावित करते हैं। ये वही केमिकल्स हैं, जो हमारे मूड को नियंत्रित करते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के मानसिक परेशानी होने लगती है।
थायरॉइड की गड़बड़ी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार, ऑटोइम्यून बीमारियां जैसे हाशिमोटो और ग्रेव्स डिजीज इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा, शरीर में आयोडीन की कमी या अधिकता, लगातार तनाव, हार्मोनल बदलाव, प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के बाद होने वाले बदलाव भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से थायरॉइड की समस्या रही हो, उनमें इसका खतरा ज्यादा होता है।
--आईएएनएस
पीके/एबीएम
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सलमान खान संग विवेक वासवानी ने क्यों नहीं की 35 साल से कोई फिल्म, अब बताई वजह
Viveck Vaswani Salman Khan: एक्टर, प्रोड्यूसर और राइटर विवेक वासवानी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सुपरस्टार सलमान खान के साथ अपने कामकाजी अनुभव और लंबे समय से उनके साथ दोबारा काम न करने की वजह पर खुलकर बात की. दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने 1991 की फिल्म पत्थर के फूल में साथ काम किया था, लेकिन उसके बाद बीते लगभग 35 सालों में उन्होंने फिर कभी साथ काम नहीं किया.
35 साल से साथ काम न करने की वजह
विवेक वासवानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके लिए काम का माहौल बेहद मायने रखता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं ऐसे माहौल में काम नहीं कर सकता जहां शराब हो या जहां लोग अनुशासनहीन तरीके से काम करते हों. यह मेरे काम करने के तरीके के खिलाफ है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उन्हें वही सलमान खान मिलें, जिन्हें उन्होंने संजय लीला भंसाली और सूरज बड़जात्या जैसे फिल्ममेकर्स के साथ काम करते देखा है, जहां वह पूरी तरह प्रोफेशनल और अनुशासित रहते हैं तो वो दोबारा उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं.
किन शर्तों पर करेंगे दोबारा काम?
विवेक वासवानी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह सिर्फ “स्टार सलमान खान” के साथ नहीं, बल्कि “एक्टर सलमान खान” के साथ काम करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, “जब मुझे सलमान एक एक्टर के रूप में मिलेंगे, तभी मैं उनके साथ काम करूंगा. बड़े बैनर वाले फिल्ममेकर्स उन्हें उसी सम्मान और गंभीरता से ट्रीट करते हैं, जिसकी वजह से उनका बेस्ट सामने आता है.” उन्होंने अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि अगर शूटिंग का समय सुबह 9 बजे है, तो कलाकार का समय पर पहुंचना जरूरी है- देरी या लापरवाही उन्हें बिल्कुल स्वीकार नहीं.
सलीम खान के साथ मतभेद
विवेक वासवानी ने इंटरव्यू में सलमान खान के पिता सलीम खान के साथ अपने रिश्तों पर भी बात की. चूंकि Patthar Ke Phool की कहानी सलीम खान ने लिखी थी, इसलिए स्क्रिप्ट में बदलाव करना आसान नहीं था. उन्होंने बताया कि समय के साथ कुछ मतभेद जरूर हुए, खासकर तब जब सलमान खान बड़े स्टार बन गए और कई फिल्मों में व्यस्त रहने लगे, जिससे डेट्स की समस्या पैदा हुई. हालांकि, विवेक ने इन मतभेदों को छोटा बताते हुए कहा कि उनके मन में सलीम खान के लिए काफी सम्मान है.
सलीम खान के घर की मेहमाननवाजी
विवेक वासवानी ने सलीम खान के परिवार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके घर पर स्क्रिप्ट डिस्कशन के दौरान शानदार मेहमाननवाजी होती थी. वहां का खाना और माहौल उन्हें बेहद पसंद था और हर मीटिंग एक यादगार अनुभव बन जाती थी.
फिल्म ‘पत्थर के फूल’ और उसका असर
साल 1991 में रिलीज हुई पत्थर के फूल का निर्देशन अनंत बलानी ने किया था. ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही. इसी फिल्म से रवीना टंडन ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था.
विवेक वासवानी का करियर
विवेक वासवानी ने अपने करियर में 100 से ज्यादा फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया है और करीब 10 फिल्मों का निर्माण भी किया है. उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1985 में टीवी शो खानदान से की थी. इसके अलावा उन्होंने Raju Ban Gaya Gentleman, Aatish: Feel the Fire और Gawaahi जैसी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.
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