ईरान से जंग के बीच ब्रिटेन के पीएम स्टॉर्मर की यूएस राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक, ये हमारी लड़ाई नहीं
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को एक नई अनिश्चितता में डाल दिया है. इसी बीच कीर स्टार्मर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़ा यह संघर्ष ब्रिटेन के भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यूनाइटेड किंगडम इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा, क्योंकि यह देश के हित में नहीं है.
'तूफान का सामना करने को तैयार'
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हालात भले ही गंभीर हों, लेकिन उनका देश किसी भी आर्थिक या रणनीतिक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. उन्होंने इसे एक “तूफान” की संज्ञा देते हुए भरोसा जताया कि ब्रिटेन इस संकट से उबरने में सक्षम है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और ऊर्जा कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट: संकट का केंद्र
स्टार्मर ने खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. यदि यहां बाधा आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है, जिससे आम लोगों की जीवन-यापन लागत बढ़ जाती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्ट्रेट को खुला रखना और क्षेत्र में तनाव कम करना ही मौजूदा समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
कूटनीति पर जोर, सैन्य हस्तक्षेप से दूरी
ब्रिटेन ने इस संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी है. विदेश सचिव और चांसलर पहले ही G7 देशों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं, जबकि रक्षा सचिव मध्य पूर्व के सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
इसके अलावा, यूके ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए 35 देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया है. यह पहल दर्शाती है कि ब्रिटेन सैन्य कार्रवाई के बजाय सामूहिक सहयोग और संवाद के जरिए समाधान चाहता है.
ऑस्ट्रेलिया की भी चिंता बढ़ी
इस संकट को लेकर एंथनी अल्बनीज ने भी अपने देशवासियों को चेताया है. उन्होंने कहा कि आने वाले महीने आसान नहीं होंगे और कोई भी सरकार इस युद्ध के आर्थिक प्रभावों से पूरी तरह बचाव का वादा नहीं कर सकती.
हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार ऑस्ट्रेलिया को इस संकट के सबसे बुरे प्रभावों से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी.
महंगाई और आम जनता पर असर
मिडिल-ईस्ट में तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार और महंगाई पर पड़ता है. तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों पर पड़ता है. ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों ने स्वीकार किया है कि यह संकट आम नागरिकों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई देश पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं.
एकजुटता ही समाधान
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अनिश्चित समय में वैश्विक सहयोग और एकजुटता बेहद जरूरी है. कूटनीति, संवाद और साझेदारी के जरिए ही इस संकट को कम किया जा सकता है. अंततः, मिडिल-ईस्ट का यह तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि विश्व शक्तियां इस चुनौती का सामना किस तरह करती हैं और क्या वे वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में सफल हो पाती हैं.
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ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने ट्रंप की 'धमकी' को बताया 'शोर', होर्मुज पर सहयोगी देशों से बातचीत का दिलाया भरोसा
लंदन, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर वैश्विक चिंता के बीच ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने साफ किया है कि उनकी सरकार का फोकस देश के आर्थिक हित, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक समाधान पर है। उन्होंने कहा कि वह समझते हैं कि लोग बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्च को लेकर क्यों चिंतित हैं, और इसी से निपटने के लिए सरकार पहले ही एक पांच-पॉइंट प्लान पर काम कर रही है।
स्टार्मर ने भरोसा दिलाया कि हालात के बावजूद लोगों को तुरंत राहत मिलेगी। उन्होंने कहा, आज आपके एनर्जी बिल कम होंगे, क्योंकि बजट में हमने जो कदम उठाए हैं, उनका असर दिखेगा। और ईरान में जो भी हो, कीमतें फिलहाल जुलाई तक फिक्स हैं। उनका यह बयान सीधे उस डर को संबोधित करता है, जो होर्मुज में तनाव के चलते वैश्विक तेल कीमतों में उछाल को लेकर बना हुआ है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाटो से बाहर निकलने की संभावित चेतावनी पर भी स्टार्मर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दबाव बनाने की कोशिश और शोर बताते हुए कहा कि नाटो अब तक का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन है और ब्रिटेन इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, चाहे कितना भी प्रेशर या शोर हो, मैं हर फैसला अपने देशहित को ध्यान में रखकर ही लूंगा।”
साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं होगा। “यह हमारी लड़ाई नहीं है, और हम इसमें नहीं फंसेंगे,” उन्होंने कहा, लेकिन साथ ही जोड़ा कि रक्षा, सुरक्षा और आर्थिक भविष्य को देखते हुए यूरोप के साथ करीबी संबंध बनाना जरूरी है।
होर्मुज संकट पर स्टार्मर ने कूटनीतिक पहल की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन इस हफ्ते के आखिर में उन देशों के साथ एक अहम बैठक की मेजबानी करेगा, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सहयोग करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यवेट कूपर इस बैठक की अध्यक्षता करेंगी, जिसमें नेविगेशन की आजादी बहाल करने, फंसे जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरी सामानों की आवाजाही फिर से शुरू करने पर चर्चा होगी।
स्टार्मर के मुताबिक, ब्रिटेन पहले ही इस दिशा में सक्रिय है। विदेश मंत्री और चांसलर जी7 देशों के समकक्षों से बातचीत कर चुके हैं, जबकि रक्षा मंत्री मिडिल ईस्ट के साझेदारों के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि यूके ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए 35 देशों को एक साझा पहल के तहत साथ लाया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि “ब्रिटेन में रहने के खर्च को कम करने का सबसे असरदार तरीका मिडिल ईस्ट में तनाव कम करना और होर्मुज को फिर से खोलना है,” और इसके लिए हर संभव कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाएगा।
--आईएएनएस
केआर/
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