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पटना हाई कोर्ट में टेक्निकल असिस्टेंट की बंपर भर्ती, 92,300 रुपये तक मिलेगी सैलरी

बिहार के युवाओं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है. अगर आप कंप्यूटर और तकनीकी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो पटना हाई कोर्ट ने आपके लिए दरवाजे खोल दिए हैं. पटना हाई कोर्ट ने टेक्निकल असिस्टेंट (ग्रुप सी) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 53 पदों को भरा जाना है. खास बात यह है कि इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया आज यानी 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो गई है. योग्य उम्मीदवार समय रहते इस मौके का फायदा उठा सकते हैं और अपना आवेदन जमा कर सकते हैं.

आवेदन की महत्वपूर्ण तारीखें

जो भी उम्मीदवार इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, वे 30 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. हालांकि, फीस जमा करने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय दिया गया है, उम्मीदवार 2 मई 2026 तक अपनी एप्लीकेशन फीस जमा कर पाएंगे. जानकारों का कहना है कि उम्मीदवारों को आखिरी समय की भीड़ से बचने के लिए जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कर लेना चाहिए.

क्या होनी चाहिए योग्यता और उम्र?

इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स या कम्युनिकेशन जैसे विषयों में आईटीआई या डिप्लोमा होना अनिवार्य है. उम्र सीमा की बात करें तो न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष तय की गई है. सरकारी नियमों के अनुसार आरक्षित वर्गों जैसे एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांग उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी.

चयन प्रक्रिया और परीक्षा का पैटर्न

टेक्निकल असिस्टेंट के पद पर चयनित होने के लिए उम्मीदवारों को एक लिखित परीक्षा देनी होगी. यह परीक्षा कुल 100 नंबर की होगी और इसे पूरा करने के लिए दो घंटे का समय मिलेगा. परीक्षा में सामान्य जागरूकता, रीजनिंग, गणितीय योग्यता, अंग्रेजी और कंप्यूटर से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे. परीक्षा पास करने के लिए कम से कम 40 अंक लाना जरूरी है. लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को स्किल टेस्ट और फिर इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा.

आवेदन फीस और सैलरी स्ट्रक्चर

आवेदन करने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को 1100 रुपये की फीस देनी होगी. वहीं, एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह फीस 550 रुपये तय की गई है. यह फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही जमा की जाएगी. वेतन की बात करें तो चयनित उम्मीदवारों को हर महीने 29,200 रुपये से लेकर 92,300 रुपये तक सैलरी मिलेगी. इसके अलावा सरकार की ओर से मिलने वाले अन्य भत्ते भी नियमों के हिसाब से दिए जाएंगे, जो इस नौकरी को युवाओं के लिए और भी आकर्षक बनाते हैं.

कैसे करें अप्लाई?

इच्छुक उम्मीदवार पटना हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. फॉर्म भरते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि अपनी सभी जानकारी बिल्कुल सही-सही भरें और मांगे गए जरूरी डॉक्यूमेंट्स को सही फॉर्मेट में अपलोड करें. आवेदन पूरा होने के बाद उसका एक प्रिंट आउट जरूर निकाल लें ताकि फ्यूचर में कोई दिक्कत न हो. भर्ती से जुड़ी अन्य विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर मौजूद आधिकारिक नोटिफिकेशन में देखी जा सकती है.

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ईरान से जंग के बीच ब्रिटेन के पीएम स्टॉर्मर की यूएस राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक, ये हमारी लड़ाई नहीं

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को एक नई अनिश्चितता में डाल दिया है. इसी बीच कीर स्टार्मर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़ा यह संघर्ष ब्रिटेन के भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि यूनाइटेड किंगडम इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होगा, क्योंकि यह देश के हित में नहीं है.

'तूफान का सामना करने को तैयार'

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हालात भले ही गंभीर हों, लेकिन उनका देश किसी भी आर्थिक या रणनीतिक चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. उन्होंने इसे एक “तूफान” की संज्ञा देते हुए भरोसा जताया कि ब्रिटेन इस संकट से उबरने में सक्षम है. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और ऊर्जा कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है.

होर्मुज स्ट्रेट: संकट का केंद्र

स्टार्मर ने खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का जिक्र करते हुए कहा कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है. यदि यहां बाधा आती है, तो इसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ता है, जिससे आम लोगों की जीवन-यापन लागत बढ़ जाती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस स्ट्रेट को खुला रखना और क्षेत्र में तनाव कम करना ही मौजूदा समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

कूटनीति पर जोर, सैन्य हस्तक्षेप से दूरी

ब्रिटेन ने इस संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी है. विदेश सचिव और चांसलर पहले ही G7 देशों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं, जबकि रक्षा सचिव मध्य पूर्व के सहयोगियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.

इसके अलावा, यूके ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए 35 देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया है. यह पहल दर्शाती है कि ब्रिटेन सैन्य कार्रवाई के बजाय सामूहिक सहयोग और संवाद के जरिए समाधान चाहता है.

ऑस्ट्रेलिया की भी चिंता बढ़ी

इस संकट को लेकर एंथनी अल्बनीज ने भी अपने देशवासियों को चेताया है. उन्होंने कहा कि आने वाले महीने आसान नहीं होंगे और कोई भी सरकार इस युद्ध के आर्थिक प्रभावों से पूरी तरह बचाव का वादा नहीं कर सकती.

हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार ऑस्ट्रेलिया को इस संकट के सबसे बुरे प्रभावों से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी.

महंगाई और आम जनता पर असर

मिडिल-ईस्ट में तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार और महंगाई पर पड़ता है. तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों पर पड़ता है. ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों ने स्वीकार किया है कि यह संकट आम नागरिकों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब कई देश पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं.

एकजुटता ही समाधान

दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अनिश्चित समय में वैश्विक सहयोग और एकजुटता बेहद जरूरी है. कूटनीति, संवाद और साझेदारी के जरिए ही इस संकट को कम किया जा सकता है. अंततः, मिडिल-ईस्ट का यह तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि विश्व शक्तियां इस चुनौती का सामना किस तरह करती हैं और क्या वे वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में सफल हो पाती हैं.

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