Kerala Election 2026: ये 10 सीटें बदल सकती हैं सरकार, यहां होगा सबसे बड़ा मुकाबला...
Kerala Assembly Election 2026: केरल में होने वाले 2026 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच माना जा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश में है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में कुछ ऐसी सीटें हैं जो पूरी सरकार की दिशा तय कर सकती हैं. इन सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा रहने की संभावना है.
Thiruvananthapuram, Keralam: BJP State President Rajeev Chandrasekhar says, "...What we are putting forward is a vision for a bright new future for Kerala and none of this propaganda will impact that. But it is clear that given that the Congress party and CPM has nothing to say,… pic.twitter.com/ztNATV8BvO
— IANS (@ians_india) April 1, 2026
केरल में कुल कितनी सीटें
केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए किसी भी गठबंधन को कम से कम 71 सीटों का आंकड़ा पार करना होगा. पिछली बार वाम मोर्चा ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर इतिहास बनाया था.
ये 10 सीटें बन सकती हैं चुनाव की सबसे अहम लड़ाई
1. तिरुवनंतपुरम
राजधानी सीट होने के कारण यहां का मुकाबला हमेशा हाई प्रोफाइल रहता है. कांग्रेस, वाम दल और भाजपा तीनों यहां पूरी ताकत लगा रखी है.
2. त्रिशूर
यह सीट पिछले कुछ वर्षों से भाजपा के लिए भी अहम मानी जा रही है. यहां का चुनावी परिणाम पूरे राज्य की राजनीति पर असर डालता है.
3. पलक्कड़
पलक्कड़ को भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है. यहां कांग्रेस और वाम मोर्चा के साथ त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है.
4. कोझिकोड
उत्तरी केरल की यह सीट परंपरागत रूप से वाम दलों के प्रभाव में रही है, लेकिन इस बार यहां कड़ा मुकाबला दिख रहा है.
5. कन्नूर
कन्नूर वाम राजनीति का गढ़ माना जाता है. यहां का चुनाव हमेशा चर्चा में रहता है.
6. एर्नाकुलम
व्यापारिक केंद्र होने के कारण इस सीट का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है.
7. मलप्पुरम
मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां UDF की मजबूत पकड़ मानी जाती है, लेकिन अन्य दल भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं.
8. कोट्टायम
यह सीट ईसाई वोट बैंक के कारण काफी अहम मानी जाती है.
9. कोल्लम
यहां वाम दलों और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है.
10. अट्टिंगल
राजधानी क्षेत्र के करीब होने की वजह से यहां का चुनाव भी काफी दिलचस्प हो सकता है.
इस चुनाव के बड़े मुद्दे
केरल विधानसभा चुनाव में इस बार कई बड़े मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहने वाले हैं. इनमें बेरोजगारी, महंगाई, राज्य की आर्थिक स्थिति, कल्याणकारी योजनाएं और विकास परियोजनाएं प्रमुख हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है.
क्या तीसरी बार सत्ता में आएगा वाम मोर्चा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर वाम मोर्चा फिर से सत्ता में आता है तो यह केरल की राजनीति में एक बड़ा रिकॉर्ड होगा. वहीं कांग्रेस गठबंधन सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रहा है. दूसरी तरफ भाजपा भी राज्य में अपना वोट शेयर बढ़ाने और कुछ सीटों पर जीत दर्ज करने की रणनीति पर काम कर रही है.
A press release by the Election Commission of India reads, “General Elections to Legislative Assemblies and bye-elections 2026, second randomisation of EVM-VVPATs for Assam, Kerala and Puducherry completed.” pic.twitter.com/D81wRoJ7F8
— Press Trust of India (@PTI_News) March 31, 2026
FAQ
Q1. केरल विधानसभा में कुल कितनी सीटें हैं?
उत्तर: केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं.
Q2.केरल में सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?
उत्तर: सरकार बनाने के लिए कम से कम 71 सीटों का आंकड़ा जरूरी है.
Q3. केरल में मुख्य मुकाबला किन दलों के बीच है?
उत्तर: मुख्य मुकाबला LDF और UDF के बीच माना जा रहा है, जबकि भाजपा भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
Q4.केरल चुनाव में कौन सी सीटें सबसे अहम हैं?
उत्तर: तिरुवनंतपुरम, त्रिशूर, पलक्कड़, कन्नूर, एर्नाकुलम और कोझिकोड जैसी सीटें सबसे अहम मानी जा रही हैं.
बांग्लादेश: खसरे से 44 की मौत, महज 24 घंटे में चार बच्चों ने गंवाई जान
ढाका, 1 अप्रैल (आईएएनएस) बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप तेजी से फैल रहा है और बीते 24 घंटों में संदिग्ध मामलों और जटिलताओं से चार बच्चों की मौत हो गई है। इसके साथ ही इस साल मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 44 हो गई है, जिससे देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
राजशाही मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के प्रवक्ता शंकर के. बिस्वास के अनुसार, पिछले 24 घंटों में दो बच्चों की मौत (संदिग्ध मामला) खसरे से हुई, जिससे अस्पताल में इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या तीन हो गई है। उन्होंने बताया कि मंगलवार तक अस्पताल में खसरे के लक्षण वाले 98 मरीज भर्ती हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
वहीं, इंफेक्शियस डिजिज हॉस्पिटल (आईडीएच) की अधीक्षक तंजिना जहां ने बताया कि इसी अवधि में एक और बच्चे की मौत हुई, जिससे इस अस्पताल में खसरे से संबंधित मौतों की संख्या 25 तक पहुंच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी से अब तक यहां 617 संदिग्ध मरीजों का इलाज किया जा चुका है।
इसी बीच चटोग्राम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भी साढ़े पांच महीने के एक शिशु की मौत हो गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह संक्रमण शिशुओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकोप की सबसे बड़ी वजह टीकाकरण में आई कमी है। कई बच्चे या तो एक्सपेंडेड प्रोग्राम ऑन इम्युनाइजेशन (ईपीआई) के दायरे से बाहर रह गए या उन्होंने पूरा टीकाकरण नहीं कराया, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर रह गई।
खसरा एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जिसमें एक संक्रमित व्यक्ति 16 से 18 लोगों को संक्रमित कर सकता है।
वैक्सीन आपूर्ति में देरी स्थिति को और गंभीर बनाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के दौरान लिए गए कुछ फैसलों के कारण वैक्सीन खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई। हालांकि खसरा-रूबेला वैक्सीन उपलब्ध हो चुकी है, लेकिन सिरिंज अभी तक नहीं पहुंची हैं, जिसके चलते राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान डेढ़ से दो महीने तक टल गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस देरी को गंभीर लापरवाही बताते हुए चेतावनी दी है कि यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो यह प्रकोप और बड़े स्तर पर फैल सकता है। उनका कहना है कि वैक्सीन खरीद और वितरण में हुई देरी ने देश को एक टाले जा सकने वाले संकट की ओर धकेल दिया है।
सरकार से अब तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की जा रही है, ताकि इस तेजी से फैलते संक्रमण को रोका जा सके और बच्चों की जान बचाई जा सके।
--आईएएनएस
केआर/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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