जापान में दो ठिकानों पर लंबी दूरी की मिसाइलें तैनात, हमले के डर से देशभर में विरोध शुरू
टोक्यो, 31 मार्च (आईएएनएस)। जापान के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि देश में पहली बार लंबी दूरी की काउंटर स्ट्राइक क्षमता वाली मिसाइलों को ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स के दो ठिकानों पर तैनात किया गया है। इस कदम से देश के भीतर विरोध शुरू हो गया है।
सिन्हुआ ने क्योडो न्यूज के हवाले से बताया कि दक्षिण-पश्चिमी जापान के कुमामोटो प्रांत में कैंप केंगुन और मध्य जापान के शिजुओका प्रांत के कैंप फूजी में इन मिसाइलों की तैनाती, देश की उस पुरानी और पूरी तरह से रक्षा-उन्मुख नीति से एक बड़ा बदलाव है, जो उसके युद्ध-त्यागी संविधान के तहत चली आ रही थी।
कैंप केंगुन को अपग्रेड की गई टाइप 12 जमीन से जहाज पर मार करने वाली गाइडेड मिसाइल के जमीन से लॉन्च होने वाले संस्करण से लैस किया गया है। यह मिसाइल लगभग 1,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकती है, जो जापान की क्षेत्रीय सीमाओं से कहीं ज्यादा है और इसे व्यापक रूप से स्पष्ट रूप से आक्रामक क्षमता वाली मिसाइल माना जाता है।
इस बीच कैंप फूजी में एक प्रशिक्षण इकाई को हाइपर वेलोसिटी ग्लाइडिंग प्रोजेक्टाइल से लैस किया गया है। द्वीपों की रक्षा के लिए डिजाइन किए गए इस तैनात मॉडल की मारक क्षमता कई सौ किलोमीटर है और मंत्रालय इसे लगभग 2,000 किलोमीटर तक अपग्रेड करने पर काम कर रहा है।
क्योडो न्यूज के अनुसार, दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने की क्षमता का मतलब है कि यदि जापान को लगे कि उस पर हमला होने वाला है, तो वह पहले ही दुश्मन के ठिकानों पर जवाबी हमला कर सकता है। हालांकि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि गलत आकलन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर सकता है, क्योंकि इसे पहले से किया गया हमला (प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक) माना जा सकता है।
जापान की यामागुची यूनिवर्सिटी के एमेरिटस प्रोफेसर अत्सुशी कोकेत्सु ने सिन्हुआ को बताया कि सरकार इस क्षमता को रोक लगाने के साधन के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से आत्मरक्षा के दायरे से बाहर है।
क्योडो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को कुमामोटो के स्थानीय निवासियों ने कैंप केंगुन के पास विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखा था, तैनाती का विरोध करो और मिसाइलों की कोई जरूरत नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर चिंता जताई कि इस तैनाती से यह इलाका एक संभावित सैन्य निशाना बन सकता है। उन्होंने रक्षा मंत्रालय से बार-बार सार्वजनिक ब्रीफ़िंग आयोजित करने की अपील की है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई ब्रीफिंग नहीं हुई है।
इसके अलावा, सोमवार को टोक्यो में 12 से ज्यादा नागरिक प्रतिनिधियों ने रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने सरकार से सैन्य विस्तार के उपायों को रोकने का आग्रह किया, जिसमें कुमामोटो में मिसाइलों की तैनाती भी शामिल है। भाग लेने वालों ने अधिकारियों की आलोचना की कि वे अस्पष्ट जवाब दे रहे थे और अक्सर पारदर्शिता से बच रहे थे।
नागरिक प्रतिनिधि कुजिराई ने बैठक के बाद कहा कि सरकार के जवाब “रूटीन पैटर्न” का पालन करते हैं और अब अक्सर “गोपनीयता” का हवाला देकर सवालों से बचा जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की जापान को मजबूत और समृद्ध बनाने की नीति की भी आलोचना की और इसे बिना पर्याप्त जन जवाबदेही के बड़े पैमाने पर सैन्य विस्तार बताया।
एक अन्य प्रतिनिधि अकीरा सैतो ने कहा कि अधिकारियों की प्रतिक्रिया बहुत सीमित रही। उन्होंने कहा कि आगे चलकर संसद में ताकाइची से सीधे सवाल करने के साथ-साथ नागरिक आंदोलनों के जरिए अपनी आवाज को लगातार मजबूत करना जरूरी है।
--आईएएनएस
एवाई/वीसी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
उमरा वीजा के बहाने यूरोप जाने की कोशिश, मुल्तान एयरपोर्ट पर दो यात्री उतारे गए
इस्लामाबाद, 31 मार्च (आईएएनएस)। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) ने मुल्तान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दो यात्रियों को विमान से उतार दिया। दोनों पर उमरा वीजा का इस्तेमाल करके यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश का संदेह था।
पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन के अनुसार, एफआईए के एक प्रवक्ता ने बताया कि इमिग्रेशन स्टाफ ने मुल्तान एयरपोर्ट पर बाहर जाने वाले यात्रियों की रूटीन स्क्रीनिंग के दौरान यह कार्रवाई की। दो पाकिस्तानी नागरिक सिकंदर आलम और नूर इस्लाम उमरा करने के लिए सऊदी अरब जा रहे थे। हालांकि, शुरुआती जांच में कुछ शक पैदा हुआ, जिसके बाद अधिकारियों ने उन्हें विस्तृत प्रोफाइलिंग के लिए सेकेंडरी स्क्रीनिंग के लिए भेज दिया।
आगे की जांच के दौरान, अधिकारियों को आलम और इस्लाम के पासपोर्ट पर मोरक्को के वीजा लगे मिले। पूछताछ के बाद, सिकंदर आलम और नूर इस्लाम ने बताया कि उनकी असली मंजिल सऊदी अरब नहीं, बल्कि स्पेन थी।
एफआईए अधिकारियों ने कहा कि यह मामला हाल के उन अलर्ट्स से मेल खाता है, जिनमें बताया गया है कि लोग उमरा वीजा का इस्तेमाल करके मोरक्को के रास्ते अवैध रूप से यूरोप में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद दोनों यात्रियों को विमान से उतार लिया गया और आगे की जांच के लिए मुल्तान स्थित एफआईए कॉम्पोजिट सर्कल में ले जाया गया।
जनवरी में एक रिपोर्ट में ऐसे ही एक मामले का उल्लेख किया गया था, जिसमें दो पाकिस्तानी व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों के सहारे फ्रांस जाने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले का खुलासा इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एफआईए ने किया था, जिसने इमिग्रेशन धोखाधड़ी, सरकारी अधिकारों के दुरुपयोग और अवैध प्रवासन की समस्या को उजागर किया था।
पाकिस्तान के अखबार ‘बिजनेस रिकॉर्डर’ में प्रकाशित एक संपादकीय के अनुसार, शुरुआत में यह मामला दो व्यक्तियों के फर्जी दस्तावेजों के सहारे फ्रांस जाने की कोशिश से जुड़ा था, लेकिन इसके प्रभाव एक सामान्य एयरपोर्ट जांच से कहीं अधिक हैं। यह मामला संस्थागत कमजोरियों की ओर इशारा करता है और शासन, जवाबदेही तथा एक महत्वपूर्ण नियामक संस्था में सार्वजनिक पद के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाता है।
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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