वजन घटाने के बाद फिर क्यों लौट आता है फैट? दवा छोड़ने पर शरीर में होते हैं ये बड़े बदलाव
Weight Loss Medicine Side Effects: आजकल लोग वजन कम करने के लिए कई प्रकार की दवाएं ले रहे हैं, जो उन्हें तुरंत वजन घटाने में तो मदद करती है. मगर जैसे ही लोग दवा छोड़ते हैं उनका वजन फिर से बढ़ जाता है. GLP-1 receptor agonists जैसे इंजेक्शन और दवाओं का इस्तेमाल इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है. ये दवाएं न सिर्फ भूख को कम करती हैं बल्कि ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी काफी मददगार साबित हो रही है. लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि जब कोई व्यक्ति इन दवाओं को लेना बंद कर देता है, तो उसके शरीर में क्या-क्या बदलाव होते हैं?
क्या काम करती है दवा?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, GLP-1 जैसी दवाएं शरीर में एक हार्मोन की तरह काम करती हैं, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखता है और दिमाग को पेट के फुल होने का सिग्नल भेजता है. इससे व्यक्ति कम खाना खाता है और वजन घटता है. लेकिन जैसे ही दवा बंद होती है, यह प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है.
दवा बंद करने के बाद क्या होता है?
आकाश हेल्थकेयर की एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोनिका शर्मा बताती है कि ऐसी दवाएं जब तक ली जाए तब तक असर करती है. मगर इन्हें शुरू करने से पहले एक बार उसके साइड-इफेक्ट्स और असर के बारे में भी जरूर जान लेना चाहिए.
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दवा बंद करने के बाद शरीर में होने वाले बदलाव
1.भूख फिर से बढ़ सकती है
GLP-1 दवाएं भूख को दबाने का काम करती हैं. इन्हें बंद करने के बाद शरीर का नेचुरल हंगर मैकेनिज्म वापस एक्टिव हो जाता है, जिससे व्यक्ति को पहले की तुलना में ज्यादा भूख लगने लगती है.
2.वजन दोबारा बढ़ने का खतरा
कई स्टडीज में पाया गया है कि दवा बंद करने के बाद कुछ लोगों का वजन धीरे-धीरे वापस बढ़ने लगता है. अगर लाइफस्टाइल में बदलाव नहीं किए गए हैं तो वजन पहले जैसे हो जाना आम बात है.
3.मेटाबॉलिज्म पर असर
जब हम ये दवाएं लेते हैं तो वजन कम होने के दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म भी एडजस्ट होता है. दवा बंद करने के बाद शरीर ऊर्जा को बचाने की कोशिश करता है, जिससे कैलोरी बर्न होने की दर कम हो सकती है.
4.ब्लड शुगर में बदलाव
जो लोग टाइप-2 डायबिटीज के लिए यह दवा ले रहे थे, उनमें दवा बंद करने के बाद ब्लड शुगर लेवल भी फिर से बढ़ सकता है. इसलिए, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद करना भी जोखिम भरा हो सकता है.
क्या ये दवाएं स्थायी समाधान हैं?
दरअसल, डॉक्टरों का मानना है कि GLP-1 दवाएं वजन घटाने में प्रभावी होती हैं, लेकिन यह 'मैजिक क्योर' नहीं हैं. इनका असर तब तक रहता है, जब तक दवा ली जा रही हो. वजन कम करने के लिए सही लाइफस्टाइल को अपनाना भी जरूरी होता है.
डॉक्टर क्या कहते हैं?
इस विषय पर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट बताती हैं कि GLP-1 जैसी दवाएं वजन घटाने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में काफी असरदार हैं लेकिन इन्हें लॉन्गटर्म टूल की तरह ही यूज करना चाहिए, ये अस्थायी रूप से वजन को घटाती है. जब मरीज दवा बंद करता है, तो शरीर की भूख नियंत्रित करने वाली प्रक्रिया फिर से पहले जैसी हो जाती है, जिससे वजन वापस बढ़ने का जोखिम रहता है. इसलिए, दवा शुरू करने से पहले और बंद करने के बाद, दोनों ही स्थितियों में लाइफस्टाइल को मॉडिफाई करना जरूरी होता है. संतुलित आहार, नियमित रूप से एक्सरसाइज और नींद की कमी न होने देना भी वजन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं.
क्या करें ताकि वजन वापस न बढ़े?
- संतुलित और पोषण से भरपूर डाइट का सेवन करें.
- नियमित रबप से एक्सरसाइज को अपने रूटीन में शामिल करें.
- प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी फूड से दूरी बनाएं.
- पर्याप्त नींद लें.
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर दवा बंद करने के बाद अचानक वजन बढ़ने लगे, भूख बहुत ज्यादा बढ़ जाए या ब्लड शुगर अनियंत्रित हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
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कौन है IAS रिंकू सिंह, जिन्होंने अचानक दिया अपने पद से इस्तीफा
उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा देकर एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं. उनका यह फैसला जितना चौंकाने वाला है, उतनी ही प्रेरणादायक उनकी जिंदगी की कहानी भी रही है. एक साधारण परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाले रिंकू सिंह का सफर संघर्ष, साहस और विवादों से भरा रहा है.
साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर
रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई 1982 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में हुआ था. उनके पिता एक छोटी आटा चक्की चलाते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की और 12वीं में अच्छे अंक लाकर स्कॉलरशिप हासिल की.
इसके बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी. साल 2004 में उन्होंने यूपीपीसीएस परीक्षा पास की और 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने.
घोटाले का खुलासा और जानलेवा हमला
रिंकू सिंह उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने 2009 में मुजफ्फरनगर में करीब 100 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का पर्दाफाश किया. इस घोटाले में फर्जी खातों के जरिए सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा था.
इस खुलासे के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ. बैडमिंटन खेलते समय उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं. इस हमले में उनका चेहरा बुरी तरह घायल हुआ, एक आंख की रोशनी चली गई और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई. लंबे इलाज और कई सर्जरी के बाद उन्होंने जिंदगी की जंग जीती और हार नहीं मानी.
IAS बनने का सपना हुआ पूरा
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. लगातार प्रयास के बाद उन्होंने 2021 में UPSC परीक्षा पास की और 683वीं रैंक हासिल की. इसके बाद 2022 बैच के IAS अधिकारी बने.
विवादों में घिरा कार्यकाल
उनका प्रशासनिक कार्यकाल भी विवादों से अछूता नहीं रहा. 24 जुलाई 2025 को उन्हें शाहजहांपुर में SDM के पद पर तैनात किया गया. यहां निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को खुले में पेशाब करते देख उठक-बैठक लगवाई.
जब वकीलों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने खुद भी कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद उन्हें पद से हटाकर लखनऊ स्थित राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया.
इस्तीफे के पीछे क्या संकेत?
करीब 20 साल के प्रशासनिक अनुभव और कई उतार-चढ़ाव के बाद रिंकू सिंह राही का इस्तीफा कई सवाल खड़े करता है. हालांकि उन्होंने इस्तीफे के कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके फैसले को उनके करियर के एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.
प्रेरणा और संदेश
रिंकू सिंह राही की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां भी किसी के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं. एक साधारण परिवार से निकलकर, जानलेवा हमले का सामना करते हुए भी उन्होंने देश की सर्वोच्च सेवाओं में जगह बनाई. उनका जीवन संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है—जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा.
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