कौन है IAS रिंकू सिंह, जिन्होंने अचानक दिया अपने पद से इस्तीफा
उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने अपने पद से इस्तीफा देकर एक बार फिर सुर्खियां बटोर ली हैं. उनका यह फैसला जितना चौंकाने वाला है, उतनी ही प्रेरणादायक उनकी जिंदगी की कहानी भी रही है. एक साधारण परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाले रिंकू सिंह का सफर संघर्ष, साहस और विवादों से भरा रहा है.
साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर
रिंकू सिंह राही का जन्म 20 मई 1982 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में हुआ था. उनके पिता एक छोटी आटा चक्की चलाते थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की और 12वीं में अच्छे अंक लाकर स्कॉलरशिप हासिल की.
इसके बाद उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट से बीटेक की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी. साल 2004 में उन्होंने यूपीपीसीएस परीक्षा पास की और 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने.
घोटाले का खुलासा और जानलेवा हमला
रिंकू सिंह उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने 2009 में मुजफ्फरनगर में करीब 100 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप घोटाले का पर्दाफाश किया. इस घोटाले में फर्जी खातों के जरिए सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा था.
इस खुलासे के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ. बैडमिंटन खेलते समय उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं, जिसमें उन्हें सात गोलियां लगीं. इस हमले में उनका चेहरा बुरी तरह घायल हुआ, एक आंख की रोशनी चली गई और सुनने की क्षमता भी प्रभावित हुई. लंबे इलाज और कई सर्जरी के बाद उन्होंने जिंदगी की जंग जीती और हार नहीं मानी.
IAS बनने का सपना हुआ पूरा
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. लगातार प्रयास के बाद उन्होंने 2021 में UPSC परीक्षा पास की और 683वीं रैंक हासिल की. इसके बाद 2022 बैच के IAS अधिकारी बने.
विवादों में घिरा कार्यकाल
उनका प्रशासनिक कार्यकाल भी विवादों से अछूता नहीं रहा. 24 जुलाई 2025 को उन्हें शाहजहांपुर में SDM के पद पर तैनात किया गया. यहां निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक व्यक्ति को खुले में पेशाब करते देख उठक-बैठक लगवाई.
जब वकीलों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने खुद भी कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद उन्हें पद से हटाकर लखनऊ स्थित राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया.
इस्तीफे के पीछे क्या संकेत?
करीब 20 साल के प्रशासनिक अनुभव और कई उतार-चढ़ाव के बाद रिंकू सिंह राही का इस्तीफा कई सवाल खड़े करता है. हालांकि उन्होंने इस्तीफे के कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके फैसले को उनके करियर के एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है.
प्रेरणा और संदेश
रिंकू सिंह राही की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियां भी किसी के हौसले को नहीं तोड़ सकतीं. एक साधारण परिवार से निकलकर, जानलेवा हमले का सामना करते हुए भी उन्होंने देश की सर्वोच्च सेवाओं में जगह बनाई. उनका जीवन संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है—जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा.
होर्मुज के रास्ते नहीं मिल रहा तो अमेरिका से खरीदें तेल: ट्रंप
वाशिंगटन, 31 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एक प्रस्ताव रखा है। मंगलवार को ट्रुथ पोस्ट में उन्होंने जेट ईंधन की कमी से जूझ रहे देशों से कहा की कि अगर होर्मुज से तेल नहीं मिल पा रहा तो अमेरिका का रुख कर सकते हैं। दो अलग-अलग पोस्ट्स में उन्होंने फ्रांस और ब्रिटेन को जबरदस्त फटकार भी लगाई है।
ट्रंप ने तेल को लेकर कहा, ब्रिटेन जैसे देश (जिसने ईरान को सत्ताच्युत करने की कार्रवाई में शामिल होने से इनकार कर दिया था) और जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जेट फ्यूल नहीं हासिल कर पा रहे हैं, उनको मैं दो नसीहत दूंगा।
इसके बाद ट्रंप ने वो दो नसीहतें देते हैं। उन्होंने आगे लिखा, पहली, चाहूंगा कि उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दूसरी नसीहत हौसला और हिम्मत दिखाने की कही। लिखा कि मेरी दूसरी सलाह है कि देर से ही सही लेकिन थोड़ी हिम्मत दिखाएं, होर्मुज जाएं और अपना हक ले लें।
ट्रंप आगे लिखते हैं कि आपको खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। दावा किया कि हमेशा अमेरिका उनका साथ देने के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप उसके साथ खड़े नहीं हैं।
दुनिया को ललकारते और अपनी पीठ थपथपाते हुए ट्रंप ने अंत में लिखा, ईरान कमजोर हो चुका है, वो तबाह कर दिया गया है। सबसे मुश्किल काम हमने कर दिया है। अब आप जाकर अपना तेल हासिल करने का हौसला दिखाना चाहिए।
इसकी अगली पोस्ट में ट्रंप ने फ्रांस को फटकार लगाई है। नाराजगी जाहिर करते हुए उसे कोसा है। लिखा- फ्रांस ने इजरायल जा रहे उन विमानों को अपने इलाके के ऊपर से उड़ने नहीं दिया, जो सैन्य सामान से लदे हुए थे। ईरान के कसाई को खत्म करने के मामले में फ्रांस बिल्कुल भी मददगार साबित नहीं हुआ, जिसे आखिरकार हमने मार गिराया और इस रवैए को अमेरिका याद रखेगा!!!
ट्रंप ने उन यूरोपीय सहयोगियों के प्रति अपनी नाराजगी लगातार जाहिर की है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है—खास तौर पर तब, जब उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए फिर से खोलने के बेहद खतरनाक प्रयासों में शामिल होने को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त की थीं।
--आईएएनएस
केआर/
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