मध्य पूर्व संघर्ष से जुड़ी ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण लागत पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कोरियन एयर ने आपातकालीन प्रबंधन मोड की घोषणा की है। एयरलाइन अप्रैल से गैर-जरूरी खर्चों में चरणबद्ध कटौती करने की योजना बना रही है, हालांकि विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसने संभावित उड़ान कटौती की पुष्टि नहीं की है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एयरलाइन ने कहा कि अप्रैल में ईंधन का खर्च पहले के वार्षिक अनुमानों से दोगुने से भी अधिक होने का अनुमान है, जो बढ़ते वित्तीय दबाव को दर्शाता है।
दुबई के पास ईरानी हमले के बाद कुवैती तेल टैंकर में लगी आग पर काबू पा लिया गया
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने बताया कि दुबई तट के पास ईरानी हमले के बाद अल सालमी तेल टैंकर पर लगी आग को चालक दल के सदस्यों ने बुझा दिया। रॉयटर्स के अनुसार, टैंकर पर सवार 24 कर्मियों में से किसी को भी तेल रिसाव या चोट की सूचना नहीं मिली है।
लावरोव ने अमेरिका और इज़राइल पर ईरान के साथ सामान्य संबंधों का विरोध करने का आरोप लगाया
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल ईरान और उसके पड़ोसी देशों के साथ सामान्य संबंध स्थापित करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। रॉयटर्स से बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के प्रयास तेल और गैस संसाधनों पर नियंत्रण पाने की इच्छा से प्रेरित हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, लावरोव ने यह भी चेतावनी दी कि मध्य पूर्व का संकट एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील हो सकता है।
लावरोव का दावा है कि अमेरिकी सत्ता परिवर्तन के प्रयास तेल हितों से प्रेरित हैं
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आरोप लगाया कि ईरान और वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका के प्रयास तेल और गैस संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वाशिंगटन और इज़राइल ईरान और उसके पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को सामान्य बनाने का विरोध करते हैं, और चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इज़राइल ने दी है।
इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में लिटानी नदी तक बफर जोन बनाने की योजना बनाई
रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा कि इसराइल दक्षिणी लेबनान में लिटानी नदी तक एक बफर ज़ोन स्थापित करने का इरादा रखता है। उन्होंने संकेत दिया कि विस्थापित निवासियों को तब तक वापस लौटने की अनुमति नहीं दी जाएगी जब तक उत्तरी इसराइल सुरक्षित नहीं हो जाता, और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित घरों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम इसराइल द्वारा तेज किए गए हमलों के बाद उठाया गया है, जिसमें लिटानी नदी पर बने पुलों पर हमले भी शामिल हैं, जिन्हें लेबनान के राष्ट्रपति ने जमीनी आक्रमण की संभावित तैयारी बताया है।
अमेरिकी आक्रमण के खिलाफ ईरानी सेना के साथ हाथ मिलाने को तैयार चेचन सेना
रमजान कादिरोव के प्रति वफादार चेचन सैन्य इकाइयों ने ईरानी सशस्त्र बलों के समर्थन में ईरान में तैनात होने की अपनी तत्परता घोषित कर दी है। यह घोषणा एक तीव्र होते संघर्ष के बीच आई है, जिसे चेचन नेतृत्व अमेरिकी और सहयोगी बलों के खिलाफ एक धार्मिक युद्ध के रूप में वर्णित करता है। कादिरोव के नेतृत्व वाली सेनाओं ने अपने संभावित हस्तक्षेप को इस्लामी गणराज्य की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसे वे अच्छाई बनाम बुराई की लड़ाई बताते हैं। ये घटनाक्रम कई हफ्तों से चल रहे अमेरिकी-इजरायली हवाई अभियान के बाद सामने आए हैं, और हालिया खुफिया जानकारी से पता चलता है कि अमेरिकी सेनाएं - राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर - जमीनी आक्रमण की ओर बढ़ सकती हैं क्योंकि प्रारंभिक हवाई अभियानों को रणनीतिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
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लेबनान से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई। जहां इजराइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष के दौरान यूनाइटेड नेशंस के शांति सैनिकों यानी कि यूएन पीसकीपर्स पर हमला हो गया। और अब इस हमले को लेकर भारत का कड़ा रुख सामने आया है। जहां भारत ने इस हमले की कड़ी शब्दों में निंदा की है और इस हमले के दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग भारत ने की है। दरअसल 29 मार्च को दक्षिणी लेबनान में यूएन मिशन के तहत तैनात सैनिकों पर एक प्रोजेक्टाइल का हमला हुआ। यह हमला यूनिफिल के एक पोस्ट पर हुआ जिसमें एक इंडोनेशियाई सैनिक की मौत हो गई। जबकि एक अन्य सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। जहां शांति के लिए तैनात सैनिकों को निशाना बनाना एक चिंता का विषय है।
आपको बता दें ये घटना इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी भीषण संघर्ष के दौरान हुआ है। भारत ने इस हमले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे कायराना और अस्वीकार्य बताया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने बयान जारी करते हुए कहा कि हम यूएन शांति सैनिकों पर इस हमले की कड़ी निंदा करते हैं और सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वह शांति सैनिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। साथ ही में भारत ने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी दी है। आपको बता दें कि इस हमले पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेज ने कड़ी निंदा की और उन्होंने कहा कि यूएन कर्मियों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है और इसे वॉर क्राइम यानी कि युद्ध अपराध भी माना जा सकता है। उन्होंने दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की मांग की है और सभी पक्षों से हिंसा रोकने की अपील की है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इज़राइल और हिज़बुल्ला के बीच तनाव लगातार बढ़ा है और इस बढ़ते संघर्ष का सीधा असर यूएन शांति मिशनों पर देखने को मिल रहा है। जिससे वहां तैनात सैनिकों की सुरक्षा खतरे में है।
भारत ने इस मौके पर अपनी भूमिका को याद दिलाया है। आपको बता दें कि भारत दुनिया के उन देशों में से एक है जो सबसे ज्यादा यूएन पीस कीपर्स भेजता है। अभी यूएन फील्ड में करीब 7500 सैनिक 48 देशों से तैनात हैं। जिनमें से 600 से भी ज्यादा भारतीय सैनिक शामिल है। जो यह दिखाता है कि भारत वैश्विक शांति को बनाए रखने में कितना बड़ा योगदान देता है। भारत ने खासतौर पर यूनाइटेड नेशन सिक्योरिटी काउंसिल के रेोल्यूशन 2589 का भी जिक्र किया जिसे साल 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान पास किया गया था। इस प्रस्ताव में साफ कहा गया कि शांति सैनिकों पर हमला करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। भारत के प्रतिनिधि पर्वत नैनी हरीश ने कहा कि शांति सैनिक बहुत कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और वे मल्टीटरिज्म इन एक्शन यानी कि वैश्विक सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण है।
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