'पाकिस्तान से असली आतंकवादी बुलाएं...', 'Dhurandhar 2' में टेररिस्ट बने इस एक्टर ने ट्रोलिंग पर तोड़ी चुप्पी
Dhurandhar 2 Actor Vivek Sinha: Dhurandhar 2: निर्देशक आदित्य धर (Aditya Dhar) की फिल्म 'धुरंधर 2 द रिवेंज' (Dhurandhar: The Revenge) सिनेमाघरों में 19 मार्च को रिलीज की गई थी. तब से ही ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाए हुए हैं. फिल्म में रणवीर सिंह (Ranveer Singh) से लेकर हर एक कलाकार की लोग तारीफ कर रहे हैं. हालांकि वो सेलेब्स जिन्होंने पाकिस्तानी का रोल प्ले किया है, उन्हें ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ रहा है. इनमें से ही एक एक्टर है विवेक सिन्हा, जिन्हें आतंकवादी का रोल प्ले करने की वजह से ट्रोल किया जा रहा है.
डायलॉग के लिए झेलनी पड़ रही आलोचना
धुरंधर 2 के पहले पार्ट में एक्टर विवेक सिन्हा ने आतंकवादी हाइजैकर जहूर मिस्त्री का रोल प्ले किया था. लेकिन इन दिनों उन्होंने अपने रोल की वजह से काफी ट्रोल किया जा रहा है. लोग उन्होंने सोशल मीडिया पर खरी-खोटी सुना रहे हैं. खासतौर पर फिल्म में उनका एक डायलॉग था,'हिंदू एक डरपोक कौम होती है...', इसे लेकर तो उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ रही है. हाल ही में PTI संग बातचीत में विवेक सिन्हा ने ट्रोलिंग को लेकर खुलकर बात की.
विवेक सिन्हा ने ट्रोल्स को दिया जवाब
विवेक सिन्हा ने कहा- 'कुछ दिनों पहले मुझे इंस्टाग्राम पर एक मैसेज मिलता है. कोई लेडी मुझे लिख रही है- 'आपको शर्म आनी चाहिए कि एक हिंदू होकर चंद पैसों के लिए आप एक हिंदू के लिए ऐसा बोल रहे हैं.' मेरा मन किया कि रिप्लाई करूं, फिर सोचा कि छोड़ो, नहीं करते. फिर मुझे लगा कि नहीं, करना चाहिए रिप्लाई. एक बार मैं उसको अपनी बात पहुंचा दूं.' एक्टर ने आगे कहा- 'मैंने उसे एक वॉइस नोट छोड़ा और मैं ये बात कहना भी चाहता हूं कि फिल्में समाज का आईना हैं. दिखाते हैं कि कैसे कैरेक्टर होते हैं.'
VIDEO | “We can’t call a terrorist from Pakistan to act in the film,” says actor Vivek Sinha on essaying the role of a terrorist in 'Dhurandhar'.
— Press Trust of India (@PTI_News) March 30, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/V0rfFP2Kgr
ये भी पढ़ें- Dhurandhar 2 Box Office Collection: 12वें दिन ‘धुरंधर 2’ की कमाई में गिरावट, फिर भी 'KGF 2' के कलेक्शन को दे डाली मात
एक्टर ने किरदार के बारे में बताया
धुरंधर एक्टर विवेक सिन्हा ने आगे अपने किरदार को विस्तार में बताते हुए कहा- 'अगर पाकिस्तान का एक आतंकवादी, जो अपनी जान की परवाह ना करते हुए इंडिया में घुस गया है और कहेगा कि मुझे मार दो, लेकिन मैं तो जो करूंगा, करूंगा ही. एक ऐसे इंसान का कैरेक्टर अगर हमें दिखाना होगा कि कैसे पाकिस्तान से एक आदमी आया है. ऐसे धमका रहा है लोगों को, गन पॉइंट पर रखकर बात कर रहा है, अगर ये दिखाना होगा, उनकी सोच दिखानी होगी कि वो क्या सोच लेकर इंडिया में घुसा तो हिंदू डरपोक कौम है, उसने बोला, ये फील है उनका. हिंदू-मुस्लिम, यही तो चल रहा है. उसका फील है वो.'
'पाकिस्तान से आतंकवादी बुलाकर लाएं...'
विवेक सिन्हा ने इस बारे में बात करते हुए आगे कहा- 'तो मैंने उस लेडी को यही वॉइस नोट छोड़ा कि अगर हमें दिखाना है ऐसे इंसान के बारे में, तो क्या पाकिस्तान से आतंकवादी बुलाकर लाएं शूटिंग के लिए. किसी आतंकवादी को फोन किया जाए कि भाई जरा एक शूटिंग के लिए आजा. हमें ही तो करना पड़ेगा ना. हम एक्टर्स में से किसी को वो कैरेक्टर करना पड़ेगा ताकि आपको बात तो पचा चले कि वो क्या कहना चाह रहा है. अगर कोई भी विलेन का रोल कर रहा है, तो हम ये दिखाना चाह रहे हैं, ना कि एक विलेन किस हद तक क्रूर हो सकता है.अगर फिल्म में कोई मर्डर कर रहा है तो क्या इसके लिए जेल से असली मर्डरर को बुलाएं. मैंने उस लेडी को ये वॉइस नोट भेजा, और अभी तक कोई जवाब नहीं आया.'
धुरंधर 2 का 12वें दिन का कलेक्शन
पहले हफ्ते में दमदार कलेक्शन करने के बाद, फिल्म धुरंधर 2 ने दूसरे वीकेंड में भी बेहतरीन कमाई की. हालांकि रिलीज के 12वें दिन यानी दूसरे मंडे को इसकी कमाई में पहली बार बड़ी गिरावट देखने को मिली है. फिल्म ने 11वें दिन 68.10 करोड़ का कलेक्शन किया था, जो अगले दिन काफी ज्यादा गिर गया. सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक 'धुरंधर 2' ने रिलीज के 12वें दिन (Dhurandhar 2 Box Office Collection Day 12) यानी दूसरे मंडे को 25.30 करोड़ कमाए हैं. इसी के साथ 'धुरंधर 2' का भारत में अब तक की कुल कमाई 872.17 करोड़ रुपये हो गई है.
ये भी पढ़ें- कटे सिर से खेला फुटबॉल, असली है 'Dhurandhar 2' का ये सीन, शूटिंग के वक्त सहम गए थे एक्टर
50 हजार के झगड़े से हुआ करोड़ों के किडनी रैकेट का खुलासा, कानपुर में 90 लाख तक बिक रही थी जिंदगी
Kanpur Kidney Racket Busted: कानपुर में एक मामूली से 50,000 के भुगतान विवाद ने एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश कर दिया है. यह मामला अब करोड़ों रुपये के अवैध अंग व्यापार से जुड़ा सामने आ रहा है, जिसमें कई अस्पतालों, दलालों और डॉक्टरों की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है.
कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक किडनी डोनर ने पुलिस से शिकायत की कि उसे तय रकम से 50,000 कम दिए गए और बाकी पैसे देने में लगातार टालमटोल की जा रही है. डोनर को किडनी देने के बदले 10 लाख रुपए का वादा किया गया था, लेकिन उसे पूरी रकम नहीं मिली. परेशान होकर उसने पुलिस का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे एक संगठित नेटवर्क का खुलासा होने लगा.
कैसे लोग बने निशाना?
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया. उन्हें भावनात्मक रूप से बहलाकर या झूठे बहाने देकर किडनी दान के लिए तैयार किया जाता था. एक मामले में, उत्तराखंड के एक युवक को यह कहकर राजी किया गया कि किडनी किसी रिश्तेदार के लिए चाहिए. आर्थिक तंगी के कारण उसने हामी भर दी.
10 लाख में खरीदा और 90 लाख से ज्यादा में बेचा
इसके बाद कानपुर के रावतपुर स्थित एक निजी अस्पताल में उसका ऑपरेशन किया गया और किडनी निकाल ली गई. चौंकाने वाली बात यह है कि जिस किडनी के बदले डोनर को 10 लाख रुपए देने का वादा किया गया था, उसी किडनी को मुजफ्फरनगर की एक महिला के परिवार को 90 लाख रुपए से ज्यादा में बेचा गया. डोनर को केवल 6 लाख रुपए नकद और 3.5 लाख रुपए चेक के जरिए दिए गए.
खुद को बचाने के लिए अपनाया ये फॉर्मूला
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस रैकेट ने पकड़े जाने से बचने के लिए ‘तीन अस्पताल मॉडल’ अपनाया था. किडनी निकालने के बाद डोनर और मरीज को एक दिन के लिए एक ही अस्पताल में रखा जाता था, फिर उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया जाता था. इससे किसी एक अस्पताल के पास पूरी जानकारी नहीं रहती थी और जांच से बचना आसान हो जाता था.
डोनर को बाद में दूसरी पहचान के साथ दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि रिसीवर को कहीं और भेज दिया गया. यह तरीका इस पूरे नेटवर्क की सुनियोजित कार्यप्रणाली को दर्शाता है.
आर्थिक रूप से कमजोर युवा बनते थे शिकार
जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट के निशाने पर छात्र और आर्थिक रूप से कमजोर युवा थे. एक डोनर, जिसने खुद को MBA छात्र बताया, ने शुरुआत में 4 लाख रुपए में किडनी देने की बात स्वीकार की थी. वहीं, एक अन्य मामले में एक छात्रा से 4 लाख रुपए में किडनी ली गई, जिसे बाद में 45-50 लाख रुपए में बेचे जाने की आशंका है.
क्या संगठित गिरोह का है काम?
पुलिस का मानना है कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह है जिसमें दलाल, अस्पताल संचालक और डॉक्टर शामिल हैं. दलाल डोनर तलाशते थे, अस्पताल ऑपरेशन की सुविधा देते थे और डॉक्टर ट्रांसप्लांट करते थे.
इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
इस मामले में शिवम अग्रवाल और अस्पताल संचालक सुरजीत सिंह आहूजा को हिरासत में लिया गया है. इसके अलावा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने कई अस्पतालों पर छापेमारी की, जिनमें प्रिया हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल शामिल हैं. ट्रांसप्लांट से जुड़े रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है.
डॉक्टर दंपति भी हिरासत में
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में एक डॉक्टर दंपति समेत कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और अलग-अलग जगहों से डोनर और मरीजों को जोड़कर यह अवैध कारोबार किया जा रहा था. फिलहाल, जांच जारी है और अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
यह भी पढ़ें: हैदराबाद अवैध सरोगेसी रैकेट: ईडी ने 29.76 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation

















