इजराइल में फिलिस्तीनी अपराधियों को बिना सुनवाई मौत की सजा:बिल पास, 90 दिन में फांसी होगी; मंत्रियों ने संसद में शैंपेन खोल जश्न मनाया
इजराइल की संसद (नैसेट) ने सोमवार को फिलिस्तीनी अपराधियों को सजा देने वाला बिल पास कर दिया है। इसके तहत वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनियों को इजराइली नागरिकों की हत्या करने या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने पर मौत की सजा दी जा सकेगी। यह कानून राष्ट्रवादी या आतंकवादी इरादे से की गई हत्याओं पर लागू होगा। इस कानून के अनुसार, फिलिस्तीनियों पर अगर इजराइली लोगों की हत्या का दोषी पाया गया तो उन्हें सीधे फांसी की सजा दे दी जाएगी। इसमें अपील का भी कोई अधिकार नहीं होगा। हालांकि, अदालत को विशेष कारणों के आधार पर उम्रकैद की सजा देने का भी अधिकार होगा। यह बिल राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इत्तमार बेन ग्विर ने आगे बढ़ाया गया था। बिल पास होने के बाद बेन ग्विर और दूसरे सांसदों ने संसद में ही शैंपेन की बोतल खोलकर जश्न मनाया। उन्होंने कहा, “आज इजराइल खेल के नियम बदल रहा है, जो यहूदियों की हत्या करेगा, वह सांस नहीं ले सकेगा।” बेन ग्विर ने पहले धमकी दी थी कि अगर बिल पर वोट नहीं कराया गया तो उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। कानून के तहत 90 दिनों के अंदर फांसी दी जाएगी कानून में कहा गया है कि सजा सुनाए जाने के 90 दिनों के अंदर फांसी दी जाएगी। इस बिल की मांग इजराइल के चरमपंथी दक्षिणपंथी गुट लंबे समय से करते आ रहे थे। वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों पर मिलिट्री कानून लागू होता है। इस बिल के जरिए मिलिट्री कोर्ट के नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अब जज बिना सर्वसम्मति के भी मौत की सजा सुना सकेंगे। दूसरी ओर, इजराइली यहूदी बस्ती निवासी जो वेस्ट बैंक में रहते हैं, उनपर इजराइली सिविलियन कानून लागू होता है। इसका मतलब है कि उनका मुकदमा सामान्य इजराइली नागरिक अदालतों में चलता है। इसका नतीजा यह है कि एक ही इलाके में दो लोग एक ही तरह का अपराध करें, तो उन्हें अलग-अलग सजा दी जाएगी। इससे फिलिस्तीनियों के लिए मौत की सजा की आशंका बढ़ जाएगी। इजराइली संगठनों ने बिल को भेदभाव वाला बताया मानवाधिकार संगठनों ने इसे नस्लीय भेदभावपूर्ण और बदला लेने वाली नीति बताया है। इस बिल का विरोध करते हुए इजराइल के मानवाधिकार और नागरिक समाज संगठनों ने कहा कि यह कानून फिलिस्तीनियों के खिलाफ नस्लीय हिंसा को बढ़ावा देंगे। संगठनों ने इसे फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने वाला और इजराइलियों को छूट देने वाला बताया। विपक्षी नेता यायर लापिद ने बिल की आलोचना करते हुए इसे हमास के सामने समर्पण बताया। उन्होंने कहा, “हम हमास जैसे नहीं हैं, हम हमास के बिल्कुल उलट हैं।” बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर बिल पास होने के तुरंत बाद इस बिल के खिलाफ इजराइल के सिविल राइट्स संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। साथ ही इसे असंवैधानिक बताते हुए खारिज करने की मांग की है। विपक्षी सदस्यों और आलोचकों का मानना है कि इजराइल का सुप्रीम कोर्च इस कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले इस बिल का विरोध किया था, लेकिन गाजा सीजफायर लागू होने के बाद उन्होंने अपना रुख बदल लिया और अंतिम वोट में इसका समर्थन किया। इजराइल में अब तक सिर्फ दो बार ही मौत की सजा दी गई इजराइल के पूरे इतिहास में केवल दो बार ही मौत की सजा दी गई। पहला मामला 1948 के अरब-इजराइली युद्ध के दौरान का है। इजराइली सेना के कैप्टन मेयर टोबियान्स्की को जासूसी के आरोप में एक सैन्य अदालत में दोषी ठहराया गया और उसी दिन फायरिंग स्क्वाड से गोली मारकर सजा दी गई। बाद में जांच में पता चला कि वे निर्दोष थे। 1950 के दशक में उन्हें मरणोपरांत बरी कर दिया गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ फिर से दफनाया गया। दूसरा मामला 1962 का है, जब होलोकॉस्ट के प्रमुख वास्तुकार एडोल्फ आइचमैन को फांसी दी गई। 1960 में आइचमैन को इजराइली खुफिया एजेंटों ने अर्जेंटीना से पकड़ा था। यरुशलम में लंबे सार्वजनिक मुकदमे के बाद उन्हें नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी पाया गया। इजराइल की सर्वोच्च अदालत ने अपील खारिज कर दी और 31 मई 1962 की रात को उन्हें यरुशलम की जेल में फांसी दी गई। इसके बाद इजराइल में मौत की सजा लगभग पूरी तरह से बंद रही। जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ने बिल पर चिंता जताई इस बिल को लेकर जर्मनी, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि यह कानून इजराइल के लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र पहले ही वेस्ट बैंक के सैन्य अदालतों की आलोचना कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह फिलिस्तीनियों के लिए सही जांच प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारों का उल्लंघन है। यह कानून 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में शामिल आतंकियों पर लागू नहीं होगा, इसके लिए सरकार एक अलग ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव कर रही है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट-अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी: ट्रम्प 10 हजार एक्स्ट्रा सैनिक भेज रहे, अप्रैल तक जंग खत्म करना मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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UP News: मायावती ने अचानक बुलाई बैठक, 2027 चुनाव की तैयारियों पर चर्चा | BSP | Latest Updates #upnews #bahujansamajparty #mayawati #2027assemblyelection मायावती ने बैठक बुलाई है. मायावती की अध्यक्षता में बसपा की बैठक हो रही है. इस मीटिंग में 2027 विधानसभा चुनाव की चर्चा होनी है. देखिए पूरी खबर... news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है|
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