नक्सलवाद बस्तर में ही क्यों पनपा? बलिया और सहरसा में क्यों नहीं, अमित शाह ने लोकसभा में खोली वामपंथ की पोल
लोकसभा में अमित शाह ने आंकड़ों से सिद्ध किया कि नक्सलवाद का कारण गरीबी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा और कठिन भूगोल है. उन्होंने बस्तर और बलिया (यूपी) की तुलना करते हुए बताया कि समान पिछड़ेपन के बावजूद बलिया में जंगल न होने के कारण उग्रवाद नहीं पनपा. गृह मंत्री ने साफ किया कि नक्सलियों ने जानबूझकर स्कूल-बैंक जलाए ताकि आदिवासी 'गुलाम' बने रहें. अब मोदी सरकार में बस्तर लाल आतंक से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है.
1970-2026 तक के खूनी खेल का होगा हिसाब, लाल गलियारे का होगा सफाया, लोकसभा में अमित शाह की दहाड़
Amit Shah on Naxalism: गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद पर ऐतिहासिक चर्चा की. इस दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को कभी रेड कॉरिडोर के नाम से जाना जाता था, वह 12 राज्यों, देश की 70 प्रतिशत भूमि और 20 करोड़ की आबादी तक फैला हुआ था. उन्होंने नक्सली अत्याचारों पर खुलकर चर्चा होने पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय तक इस विभीषिका पर बात करने की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन अब 1970 से लेकर 2026 तक के खूनी घटनाक्रमों का पूरा हिसाब देश के सामने रखा जा रहा है. शाह ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के कारण अब नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में खौफ के साम्राज्य को खत्म कर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है.
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