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सरकार ने 29 इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग प्रस्तावों को दी मंजूरी; 7,104 करोड़ रुपए के निवेश से पैदा होंगी 14,000 से ज्यादा नौकरियां

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 29 नए आवेदनों को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य देश के इलेक्ट्रॉनिक्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, इन नए प्रस्तावों में कुल 7,104 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि इस नए निवेश से लगभग 14,246 रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।

कृष्णन ने यह भी कहा कि स्वीकृत परियोजनाओं से 84,515 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन होगा।

उन्होंने कहा, “इससे वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी।”

मौजूदा मंजूरी के साथ, इस योजना के तहत स्वीकृत आवेदनों की कुल संख्या अब 75 हो गई है।

वहीं, पिछले वर्ष, शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, जो 2010 से पहले देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 6-7 प्रतिशत थी और 2014 तक दोगुनी हो गई थी, अब समग्र अर्थव्यवस्था की तुलना में दोगुनी गति से बढ़ रही है।

पिछले वर्ष दिसंबर में नागालैंड डिजिटल उद्यमिता और स्टार्टअप महोत्सव को संबोधित करते हुए, कृष्णन ने नागा युवाओं की अपार प्रतिभा, विशेष रूप से उनकी रचनात्मकता और अंग्रेजी भाषा में दक्षता पर प्रकाश डाला और इस क्षमता को पोषित करने में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) जैसे संस्थानों की भूमिका पर बल दिया।

उन्होंने बताया, “भारत में एनआईईएलआईटी के 55 केंद्रों में से 20 पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित हैं।”

कृष्णन ने कहा, “डिजिटल अर्थव्यवस्था समग्र अर्थव्यवस्था की तुलना में दोगुनी गति से बढ़ रही है।”

साइबर सुरक्षा पर बोलते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकता।

उन्होंने एनआईईएलआईटी कोहिमा स्थित साइबर सुरक्षा प्रयोगशाला को अत्याधुनिक और देश की सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशालाओं में से एक बताया, जो साइबर पुलिसिंग में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

--आईएएनएस

एबीएस

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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भारत में प्रोडक्ट डिजाइन नहीं करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकारी फायदा: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को साफ कर दिया कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) में शामिल कंपनियों को सरकारी सहायता तभी मिलेगी, जब वे भारत में प्रोडक्ट डिजाइन पर गंभीरता से निवेश करेंगी।

राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रोत्साहन और समर्थन अब इस बात से जुड़े होंगे कि कंपनियां देश में डिजाइन, क्वालिटी और इंजीनियरिंग क्षमताओं को कितना विकसित कर रही हैं।

मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर कंपनियां सरकार की चार प्रमुख मांगों पर काम नहीं करती हैं, तो वह अगली इंडस्ट्री मीटिंग में शामिल भी नहीं होंगी।

वैष्णव ने कहा कि कंपनियों द्वारा डिजाइन और क्वालिटी क्षमताओं को विकसित करने की गति से वे निराश हैं, और अगर सुधार नहीं हुआ तो सरकार कड़े फैसले लेने को तैयार है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, अगर इंडस्ट्री हमारी अपेक्षाओं के मुताबिक कदम नहीं उठाती है, तो हम आगे की मंजूरी और फंडिंग रोक सकते हैं।

सरकार की अपेक्षाओं को बताते हुए मंत्री ने कहा कि कंपनियों को केवल असेंबली या बेसिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें कॉन्सेप्चुअल डिजाइन, इंजीनियरिंग डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग डिजाइन तक अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, उनमें भी अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो फंड जारी नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, जिन आवेदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, उनमें भी हम पैसा नहीं देंगे अगर हमारी शर्तें पूरी नहीं हुईं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने इस स्कीम के चौथे चरण में 29 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिनमें कुल 7,104 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है। ईसीएमएस के तहत कुल 59,350 करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य था, जबकि अब तक 61,671 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है।

वैष्णव ने कहा कि असली वैल्यू तभी बनती है, जब डिजाइन भारत में किया जाता है। उन्होंने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग जरूरी है, लेकिन डिजाइन का महत्व उससे ज्यादा है क्योंकि यह ज्यादा जटिल और रणनीतिक प्रक्रिया है।

वैश्विक गुणवत्ता मानकों की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि ग्लोबल स्तर की क्वालिटी के लिए सिक्स सिग्मा जैसी प्रक्रियाएं जरूरी हैं। उन्होंने कहा, यह होना ही चाहिए; इसके बिना प्रोडक्ट पूरा नहीं माना जाएगा। उन्होंने विश्वसनीयता, सटीकता और निरंतरता पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया।

मंत्री ने इंडस्ट्री से यह भी अपील की कि वे स्किल्ड मैनपावर तैयार करने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे इकोसिस्टम को सपोर्ट करेगी, लेकिन कंपनियों को खुद आगे आकर डिजाइन और इंजीनियरिंग में कुशल प्रतिभा तैयार करनी होगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

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आईपीएल 2026: पंत ने डीसी के खिलाफ करीबी हार के लिए 'अतिरिक्त रनों' को जिम्मेदार ठहराया

लखनऊ, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) को दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) के हाथों इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के पांचवें मुकाबले में 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। एलएसजी के कप्तान ऋषभ पंत ने अतिरिक्त रनों को हार का कारण बताया है। Wed, 1 Apr 2026 23:54:37 +0530

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