ग्वालियर TMZ को मिले 1550 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव, सीएम मोहन यादव बोले- ‘मेक इन MP’ को मिल रही सफलता
राज्य की दूरदर्शी औद्योगिक नीतियों और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए देश का सबसे भरोसेमंद और आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है। इसी कड़ी में, मुंबई में आयोजित इन्वेस्टर राउंड टेबल मीटिंग में ग्वालियर में विकसित हो रहे देश के पहले टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) के लिए ₹1550 करोड़ के महत्वपूर्ण निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि प्रदेश की सशक्त औद्योगिक क्षमता और निवेशकों के बढ़ते विश्वास को रेखांकित करती है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति दे रही हैं। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश की उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण पिछले ढाई वर्षों में मध्यप्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश मिला है और यह सकारात्मक सिलसिला निरंतर जारी है। यह दर्शाता है कि मध्यप्रदेश न केवल निवेश के लिए आदर्श राज्य बन रहा है, बल्कि निवेशकों के लिए एक स्थायी और विश्वसनीय गंतव्य भी है।
नई औद्योगिक नीतियों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए अनेक नई और आकर्षक नीतियां लागू की हैं, जिनसे देश-विदेश के उद्योग समूहों का विश्वास मध्यप्रदेश पर सुदृढ़ हुआ है। प्रदेश में सस्ती बिजली, पर्याप्त भूमि, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और कुशल श्रमिक सहजता से उपलब्ध हैं, जो औद्योगिक विकास के लिए मूलभूत आवश्यकताएं हैं। इसके अतिरिक्त, रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार 5 से 10 वर्ष तक वेतन सहायता भी प्रदान करती है, जिससे रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है और स्थानीय युवाओं के लिए अवसर बढ़ते हैं।
सीएम मोहन यादव ने ‘मेक इन MP’ अभियान की सफलता पर दिया जोर
डॉ. मोहन यादव ने ‘मेक इन MP’ अभियान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि दिल्ली में आयोजित पहली राउंड टेबल बैठक में ₹3500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनसे लगभग 12 हजार नए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार देशभर में रोड शो आयोजित कर निवेशकों को मध्यप्रदेश की असीमित औद्योगिक संभावनाओं से अवगत करा रही है। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि जो उद्योगपति एक बार मध्यप्रदेश आते हैं, वे यहां की उत्कृष्ट सुविधाओं और पारदर्शी व्यवस्था से प्रभावित होकर पुनः निवेश करने के लिए प्रेरित होते हैं, जो प्रदेश की निवेशक-मैत्री छवि का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन को प्रदेश के लिए एक बड़ी औद्योगिक सौगात बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के समीप स्थित होने के कारण यह ज़ोन निवेशकों के लिए एक अत्यंत बेहतर विकल्प सिद्ध होगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रदेश में एमएसएमई, इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसे अनेक क्षेत्रों में निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है, जो प्रदेश की विविधतापूर्ण औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है।
उद्योगों की स्थापना से लेकर विस्तार तक सरकार बनेगी भागीदार
डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश सरकार केवल उद्योग स्थापित कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके विस्तार और सतत विकास में भी एक सक्रिय भागीदार के रूप में कार्य करती है। यही कारण है कि प्रदेश के औद्योगिक पार्कों और क्लस्टर्स को उद्योग जगत से अभूतपूर्व प्रतिसाद मिल रहा है। उन्होंने सभी उद्योगपतियों से मध्यप्रदेश में निवेश कर ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय सहभागी बनने का आह्वान किया, जिससे प्रदेश और देश दोनों की प्रगति सुनिश्चित हो सके।
सिंधिया ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर में हुई प्रगति की सराहना की
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस अवसर पर भारत के टेलीकॉम सेक्टर में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत टेलीकॉम और डिजिटल क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ा है। आज देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलीकॉम बाजार बन चुका है और प्रतिवर्ष 33 करोड़ से अधिक मोबाइल फोन का निर्माण हो रहा है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि ग्वालियर TMZ देश का एक आधुनिक टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा, जहां निवेशकों को ‘प्लग-एंड-प्ले’ सुविधाएं और एक विश्वस्तरीय इकोसिस्टम उपलब्ध होगा, जिससे वे बिना किसी बाधा के अपना व्यवसाय स्थापित और विकसित कर सकेंगे।
पांच कंपनियों ने 1550 करोड़ के निवेश प्रस्ताव किए प्रस्तुत
मुंबई रोडशो में कुल पांच कंपनियों ने ₹1550 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं। इनमें एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स ₹700 करोड़, अनंत सिस्टम्स ₹400 करोड़, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज़ ₹200 करोड़, वीएनटी ₹150 करोड़ और टेसकॉम ₹100 करोड़ का निवेश करने जा रही हैं। इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं से प्रदेश में हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होने की आशा है, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और गति प्रदान करेंगे।
राज्य सरकार ग्वालियर TMZ में निवेश करने वाली कंपनियों को विशेष प्रोत्साहन और सुविधाएं प्रदान करेगी। इनमें 50% तक पूंजी अनुदान, अनुसंधान एवं विकास सहायता, प्रशिक्षण और रोजगार प्रोत्साहन, निर्यात मालभाड़ा सहायता, हरित विनिर्माण प्रोत्साहन, ₹1 की प्रतीकात्मक दर पर भूमि प्रीमियम, रियायती लीज, स्टाम्प शुल्क की 100% प्रतिपूर्ति, 2 रुपये प्रति यूनिट बिजली रियायत और रियायती जल शुल्क जैसी अनेक महत्वपूर्ण रियायतें शामिल हैं। इन व्यापक प्रोत्साहनों के माध्यम से ग्वालियर TMZ को देश के सबसे आकर्षक और अग्रणी औद्योगिक निवेश केंद्रों में से एक के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सके।
Gold Price Today: सोना-चांदी की कीमतों में फिर उछाल, चांदी ₹2,130 बढ़कर ₹2.19 लाख और सोना ₹1.43 लाख के पार
Gold Silver Price Today (4 August 2026): आज यानी 4 अगस्त को सोने और चांदी के भाव में तेजी देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, चांदी की कीमत में ₹2,130 प्रति किलोग्राम का उछाल आया है, जिसके बाद इसका भाव बढ़कर ₹2.19 लाख प्रति किलो पर पहुंच गया है। वहीं, 24 कैरेट सोने की कीमत में ₹381 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद सोना ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।
आज के सोने के भाव की बात करें तो 14 कैरेट सोने की कीमत ₹83,619 प्रति 10 ग्राम, 18 कैरेट सोने का भाव ₹1,07,204 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत ₹1,30,931 प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। आइए अब देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट गोल्ड के ताजा भाव जानें।
प्रमुख शहरों में प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोने की कीमत (सोर्स- Goodreturns)
| शहर | कीमत |
| दिल्ली | 1,32,150 |
| मुंबई | 1,32,000 |
| कोलकाता | 1,32,000 |
| चेन्नई | 1,32,000 |
| रायपुर | 1,32,000 |
| भोपाल | 1,32,050 |
| लखनऊ | 1,32,150 |
| जयपुर | 1,32,150 |
| अहमदाबाद | 1,32,050 |
अलग-अलग शहरों में सोने के दाम क्यों होते हैं अलग? जानें 4 प्रमुख वजहें
सोने की कीमतें पूरे देश में एक जैसी नहीं होतीं। अलग-अलग शहरों में सोने के रेट में फर्क देखने को मिलता है। इसके पीछे कई व्यावहारिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार होते हैं।
1. ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी खर्च
सोने को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा पर खर्च आता है। जैसे-जैसे दूरी बढ़ती है, यह लागत भी बढ़ती जाती है, जिसका असर अंतिम कीमत पर पड़ता है।
2. खरीदारी की मात्रा (डिमांड फैक्टर)
दक्षिण भारत में सोने की खपत देश में सबसे ज्यादा होती है। यहां कुल मांग का लगभग 40% हिस्सा है। बड़ी खरीदारी के बावजूद स्थानीय बाजार में छूट सीमित रहती है, जिससे कीमतों में फर्क आता है।
3. ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका
हर राज्य और शहर में ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग और आपूर्ति के आधार पर रेट तय करते हैं। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में सोने के भाव अलग हो जाते हैं।
4. पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य
ज्वेलर्स ने सोना किस कीमत पर खरीदा है, यह भी बिक्री मूल्य तय करने में अहम भूमिका निभाता है। पुराना स्टॉक महंगा या सस्ता खरीदा गया हो तो उसका असर ग्राहकों को मिलने वाले रेट पर पड़ता है।
सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें खास
1. सिर्फ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें
हमेशा BIS (Bureau of Indian Standards) हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है, जैसे अल्फान्यूमेरिक कोड (AZ4524)।
2. कीमत जरूर क्रॉस चेक करें
खरीदने से पहले सोने का भाव अलग-अलग स्रोतों जैसे IBJA (India Bullion and Jewellers Association) से जरूर जांचें। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है।
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