सोनाक्षी-जहीर की शादी पर फिर बोले शत्रुघ्न सिन्हा, कहा- 'जब मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी'
Shatrughan Sinha on Sonakshi Marriage to Zaheer Iqbal: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा एक बार फिर अपनी बेटी सोनाक्षी सिन्हा और दामाद जहीर इकबाल की शादी के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं. उन्होंने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में न केवल इस इंटरफेथ वेडिंग का बचाव किया, बल्कि इसे आपसी समझ, सम्मान और खुशी पर आधारित एक मजबूत रिश्ता बताया.
परिवार की खुशी सबसे ऊपर
हाल ही में एक मीडिया हाउस से बातचीत के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने बेबाक स्टाइल में कहा कि उनके लिए परिवार की खुशी ही सर्वोपरि है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें अपनी बेटी के फैसले पर पूरा भरोसा है और वो इस शादी से बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा, “हम बहुत खुश हैं. सोनाक्षी की जो शादी हुई है, मानो दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं." साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के युवा अपने फैसले खुद लेने में सक्षम हैं और माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उनका साथ दें. उनके शब्दों में, “अगर मियां-बीवी राजी, तो क्या करेगा काजी. हमें पूरे दिल से, चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा होना चाहिए.”
स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की थी शादी
गौरतलब है कि सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल ने साल 2024 में स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी की थी. यह कानून भारत में अलग-अलग धर्मों के लोगों को बिना धर्म परिवर्तन के शादी करने की अनुमति देता है. एक चर्चित सेलिब्रिटी जोड़ी होने के कारण उनकी शादी ने देशभर में अंतरधार्मिक विवाह को लेकर चल रही बहसों के बीच खासा ध्यान आकर्षित किया.
लंबे रिश्ते के बाद शादी का फैसला
सोनाक्षी और जहीर की पहली मुलाकात साल 2016 में एक पार्टी के दौरान हुई थी, जिसकी मेजबानी सलमान खान ने की थी. यहीं से दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई, जो धीरे-धीरे गहरे रिश्ते में बदल गई. करीब 7 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने 2024 में शादी का फैसला लिया. इस दौरान वो कई बार साथ नजर आए और सोशल मीडिया पर भी उनकी बॉन्डिंग चर्चा में रही.
‘डबल एक्सएल’ से मजबूत हुई केमिस्ट्री
साल 2022 में दोनों ने फिल्म Double XL में साथ काम किया. इस फिल्म में उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने पसंद किया और रियल लाइफ में भी उनकी नजदीकियां साफ तौर पर झलकने लगीं.
आलोचनाओं के बीच पिता का मजबूत साथ
जब उनकी शादी की खबर सामने आई थी, तब सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं. हालांकि उस समय भी शत्रुघ्न सिन्हा अपनी बेटी और दामाद के समर्थन में मजबूती से खड़े रहे. उन्होंने पहले दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके परिवार को बेवजह निशाना बनाया गया. उनके शब्दों में, “हमने जिंदगी में बड़े-बड़े संकट देखे हैं, यह तो कुछ भी नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अंतरधार्मिक विवाह कोई नई बात नहीं है और इसे अनावश्यक रूप से विवाद का विषय बनाया गया.
“उसकी खुशी ही हमारी खुशी है”
शत्रुघ्न सिन्हा ने यह भी भरोसा जताया कि जहीर इकबाल उनकी बेटी का पूरा ख्याल रखेंगे. उन्होंने कहा, “उसकी खुशी हमारी खुशी है. हम उसे खुश देखकर खुश हैं और मुझे पूरा यकीन है कि जहीर उसे हमेशा खुश रखेगा.”
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महंगे सोने से बदला ट्रेंड: ज्वेलरी से हटकर निवेश की ओर बढ़ रहा भारतीय बाजार
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। देश का गोल्ड मार्केट अब धीरे-धीरे निवेश की ओर शिफ्ट हो रहा है, क्योंकि बढ़ती कीमतों के कारण ज्वेलरी की मांग पर असर पड़ रहा है। आईसीआरए और एसोचैम की संयुक्त रिपोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सोने के गहनों की मांग सालाना आधार पर करीब 26 प्रतिशत घट गई। हालांकि, इसी दौरान गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे कुछ हद तक गिरावट की भरपाई हुई।
वैश्विक स्तर पर भी यही ट्रेंड देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025 में सोने के गहनों की खपत 15 प्रतिशत घटी और वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में यह 17 प्रतिशत और गिर गई, जिसका मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें हैं।
दूसरी ओर, निवेश के रूप में सोने की मांग तेजी से बढ़ी है। गोल्ड बार, सिक्के और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश सालाना आधार पर क्रमशः 74 प्रतिशत और 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे भी ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी की मांग पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन निवेश की बढ़ती मांग, संगठित कंपनियों का विस्तार और फाइनेंशियलाइजेशन के कारण मध्यम अवधि में सेक्टर को सहारा मिलेगा।
भारत ने वित्त वर्ष 2025 में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा सोने के गहनों का उपभोक्ता बनने का स्थान हासिल किया, जिसमें वैश्विक मांग का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा शामिल रहा। इसका कारण शादियों और त्योहारों से जुड़ी मजबूत सांस्कृतिक मांग है।
केंद्रीय बैंकों ने भी हाल के वर्षों में सोने की खरीद बढ़ाई है। वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2025 के बीच हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा गया, जिससे वैश्विक अनिश्चितता के बीच कीमतों को सहारा मिला।
सोने की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। वित्त वर्ष 2025 में कीमतें करीब 33 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि चालू वित्त वर्ष में अब तक 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है। इसके पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव और रुपए की कमजोरी जैसे कारण हैं।
आपूर्ति के मामले में भारत अब भी आयात पर काफी निर्भर है। देश की कुल जरूरत का करीब 85-88 प्रतिशत सोना आयात किया जाता है, क्योंकि घरेलू खनन सीमित है।
हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर खनन उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर रहा है और आपूर्ति का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। वहीं, भारत में हाल के वर्षों में सोने की रीसाइक्लिंग भी बढ़ी है, जिससे आपूर्ति को कुछ मदद मिली है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अनिवार्य हॉलमार्किंग से सोने की शुद्धता सुनिश्चित करने और रीसाइक्लिंग को बेहतर बनाने में मदद मिली है। साथ ही इंडिया गुड डिलीवरी स्टैंडर्ड्स (आईजीडीएस) ने घरेलू रिफाइनिंग को मजबूत किया है और भारतीय सोने को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया है।
फिलहाल, गोल्ड ज्वेलरी बाजार में संगठित सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। ये कंपनियां फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार कर रही हैं और छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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