महंगे सोने से बदला ट्रेंड: ज्वेलरी से हटकर निवेश की ओर बढ़ रहा भारतीय बाजार
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। देश का गोल्ड मार्केट अब धीरे-धीरे निवेश की ओर शिफ्ट हो रहा है, क्योंकि बढ़ती कीमतों के कारण ज्वेलरी की मांग पर असर पड़ रहा है। आईसीआरए और एसोचैम की संयुक्त रिपोर्ट में शुक्रवार को यह जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में सोने के गहनों की मांग सालाना आधार पर करीब 26 प्रतिशत घट गई। हालांकि, इसी दौरान गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे कुछ हद तक गिरावट की भरपाई हुई।
वैश्विक स्तर पर भी यही ट्रेंड देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2025 में सोने के गहनों की खपत 15 प्रतिशत घटी और वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में यह 17 प्रतिशत और गिर गई, जिसका मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें हैं।
दूसरी ओर, निवेश के रूप में सोने की मांग तेजी से बढ़ी है। गोल्ड बार, सिक्के और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेश सालाना आधार पर क्रमशः 74 प्रतिशत और 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे भी ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी की मांग पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन निवेश की बढ़ती मांग, संगठित कंपनियों का विस्तार और फाइनेंशियलाइजेशन के कारण मध्यम अवधि में सेक्टर को सहारा मिलेगा।
भारत ने वित्त वर्ष 2025 में चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा सोने के गहनों का उपभोक्ता बनने का स्थान हासिल किया, जिसमें वैश्विक मांग का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा शामिल रहा। इसका कारण शादियों और त्योहारों से जुड़ी मजबूत सांस्कृतिक मांग है।
केंद्रीय बैंकों ने भी हाल के वर्षों में सोने की खरीद बढ़ाई है। वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2025 के बीच हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोना खरीदा गया, जिससे वैश्विक अनिश्चितता के बीच कीमतों को सहारा मिला।
सोने की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। वित्त वर्ष 2025 में कीमतें करीब 33 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि चालू वित्त वर्ष में अब तक 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है। इसके पीछे केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव और रुपए की कमजोरी जैसे कारण हैं।
आपूर्ति के मामले में भारत अब भी आयात पर काफी निर्भर है। देश की कुल जरूरत का करीब 85-88 प्रतिशत सोना आयात किया जाता है, क्योंकि घरेलू खनन सीमित है।
हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर खनन उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर रहा है और आपूर्ति का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। वहीं, भारत में हाल के वर्षों में सोने की रीसाइक्लिंग भी बढ़ी है, जिससे आपूर्ति को कुछ मदद मिली है।
रिपोर्ट में बताया गया कि अनिवार्य हॉलमार्किंग से सोने की शुद्धता सुनिश्चित करने और रीसाइक्लिंग को बेहतर बनाने में मदद मिली है। साथ ही इंडिया गुड डिलीवरी स्टैंडर्ड्स (आईजीडीएस) ने घरेलू रिफाइनिंग को मजबूत किया है और भारतीय सोने को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया है।
फिलहाल, गोल्ड ज्वेलरी बाजार में संगठित सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। ये कंपनियां फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए विस्तार कर रही हैं और छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
जी-7 बैठक में एस. जयशंकर ने वैश्विक आर्थिक सुरक्षा, नौवहन स्वतंत्रता और नार्को-आतंकवाद पर जताई चिंता
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। फ्रांस में आयोजित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अपने समकक्षों से मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
साथ ही बैठक में नार्को-आतंकवाद के बढ़ते संबंधों से उत्पन्न चुनौतियों पर चिंता जताई गई। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और सहयोग बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की गई, जो वैश्विक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माने जा रहे हैं।
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा, आज जी-7 विदेश मंत्रियों की मीटिंग में सत्र में विभिन्न खतरों और संप्रभुता पर चर्चा की। वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिए नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। साथ ही नार्को-आतंकवाद के बीच संबंधों से उत्पन्न खतरे को भी रेखांकित किया। महत्वपूर्ण खनिजों के संबंध में, उनकी मूल्य श्रृंखला के विस्तार हेतु सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे मौजूदा कदमों की सराहना की।
डॉ. जयशंकर दो दिन की जी7 विदेश मंत्रियों की मीटिंग के लिए गुरुवार को फ्रांस पहुंचे। यहां उन्होंने दक्षिण कोरिया, कनाडा और जापान के अपने समकक्षों से मुलाकात की। बैठक में, विदेश मंत्री और उनकी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद ने दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया के हालातों पर चर्चा की।
उन्होंने फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक संपर्क को मजबूत करने में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से मजबूत व्यापार रूट और सुरक्षित सप्लाई चेन की जरूरत और ज्यादा हो गई है। सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय यूनियन, यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) और ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता समेत बड़े वैश्विक साझेदारी के साथ भारत के बढ़ते व्यापार समझौते ने आईएमईसी में काफी वैल्यू जोड़ी है।
बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कनेक्टिविटी पहल को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच बढ़ते उत्साह की भी सराहना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की जरूरत पर जोर दिया और वैश्विक दक्षिण के सामने आने वाली चुनौतियों पर जोर डाला।
उन्होंने बताया, “यूएनएससी सुधारों की जरूरत, शांति अभियानों को आसान बनाने और मानवीय सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया। खास तौर पर ऊर्जा चुनौतियों, खाद आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा को लेकर ग्लोबल साउथ की चिंताओं को उठाया।”
--आईएएनएस
एवाई/एबीएम
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