बांग्लादेश: राष्ट्रपति शहाबुद्दीन और प्रधानमंत्री रहमान ने स्वतंत्रता दिवस पर 1971 के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
ढाका, 26 मार्च (आईएएनएस)। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन और प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने गुरुवार को देश के 56वें स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्मारक पर फूल चढ़ाकर मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद, राष्ट्रपति और पीएम ने मुक्ति संग्राम के शहीदों की सम्मान में कुछ देर का मौन रखा।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि दोनों नेताओं ने स्मारक परिसर में विजिटर्स बुक पर हस्ताक्षर भी किए।
आजादी के लिए अपनी जान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में देश 26 मार्च को स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय दिवस मनाता है।
आजादी के लिए हथियारबंद संघर्ष 26 मार्च, 1971 की सुबह शुरू हुआ था, जब 25 मार्च, 1971 की रात को पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे बांग्लादेशियों पर बेरहमी से हमला किया था। इस दिन को नरसंहार दिवस के रूप में जाना जाता है।
बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी ने बताया कि बांग्लादेश को 16 दिसंबर, 1971 को नौ महीने के लंबे संघर्ष के बाद आजादी मिली, जिसमें 30 लाख लोगों की जान गई और दो लाख महिलाओं पर बड़े पैमाने पर अत्याचार हुआ।
स्वतंत्रता दिवस की बधाई देते हुए, पीएम रहमान ने नागरिकों से एक विकसित, खुशहाल और आलीशान बांग्लादेश बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
बुधवार को पीएम की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, 26 मार्च हमारे देश के जीवन का एक शानदार और ऐतिहासिक दिन है। इस दिन, मैं देश के उन सबसे अच्छे बेटों को बहुत सम्मान के साथ याद करता हूं, जिनकी कुर्बानियों की वजह से हम एक आजाद और संप्रभु बांग्लादेश बना पाए। साथ ही, मैं उन बहादुर लड़ाकों का भी बहुत शुक्रगुजार हूं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया, उन माताओं और बहनों का भी जिन्होंने ज़ुल्म सहा और उन सभी का जिन्होंने आजादी की लड़ाई में खुद को झोंक दिया। मैं सभी शहीदों की आत्मा की शांति के लिए दुआ करता हूं।
लोगों से देश की एकता, सद्भाव और देशभक्ति की भावना बनाए रखने की अपील करते हुए, पीएम ने कहा, आइए हम महान स्वतंत्रता और राष्ट्रीय दिवस के महत्व से प्रेरणा लें और अपने तरीके से देश की भलाई के लिए खुद को समर्पित करें। आइए हम सब मिलकर एक विकसित, खुशहाल और आलीशान बांग्लादेश बनाने के लिए काम करें।
इस बीच, शोर है कि कई ताकतें अभी भी लिबरेशन वॉर के आदर्शों और सिद्धांतों को कमजोर करने की कोशिश में लिप्त हैं। कहा जा रहा है कि मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के अठारह महीने के कार्यकाल के दौरान इसे बढ़ावा मिला।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी इस मुद्दे पर पिछली अंतरिम सरकार की आलोचना की, और आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान, कई युद्ध अपराधियों के ट्रायल की प्रक्रिया रोक दी गई थी, और कई दोषी लोगों को रिहा कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, एक मौत की सजा पाए युद्ध अपराधी को राष्ट्रीय संसद का सदस्य भी बना दिया गया, जिससे लाखों शहीदों के बलिदान का अपमान हुआ।
हसीना ने आगे कहा कि इस ट्रेंड को जारी रखते हुए, शहीदों की यादों को जानबूझकर मिटाने और पाकिस्तानी सेना के सहयोगियों को अलग-अलग तरीकों से फिर से बसाने की कोशिशें जारी हैं।
उन्होंने कहा, यह न केवल इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश है, बल्कि आजादी की लड़ाई की भावना पर भी हमला है।
--आईएएनएस
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गांव में या शहर में गैस की सबसे जल्दी डिलिवरी कहां होती है? ईरान युद्ध के बीच जानें जवाब
ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी युद्ध का आज 27वां दिन है. युद्ध जब से शुरू हुआ है, तब से रसोई गैस को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है कि आखिर पहले शहर में सिलेंडर मिलेगा या फिर गांव में. सरकार ने गैस की बढ़ती मांग और नए-नए बदलावों के बीच बुकिंग और गैस की सप्लाई को लेकर कुछ नियम बनाएं हैं. ये नियम ये सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि हर किसी के पास बराबरी से गैस पहुंच सके. ऐसे मामले में आपका ये जानना आवश्यक है कि शहर और गांव में असली फर्क क्या होता है और किसे कब गैस मिलती है.
शहर में क्या है नियम?
शहरी इलाकों में गैसों की सप्लाई गांव की तुलना में तेज और व्यवस्थित ढंग से होती है. यहां गैस के कनेक्शन ज्यादा हैं और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी मजबूत हैं, जिस वजह से डिलीवरी में ज्यादा परेशानी नहीं होती है. अगली बुकिंग के लिए शहरों में कम से कम 25 दिनों का इंतजार करना पड़ता है. आम तौर पर बुकिंग के बाद दो-तीन दिन में डिलीवरी हो ही जाती है.
शहरों में सप्लाई चेन मजबूत होने से लेट कम होता है. आसान भाषा में बताएं तो शहरों में सिलेंडर मिलने की स्पीड अधिक होती है. आपने अगर समय पर बुकिंग की है तो आपको अधिक इंतजार नहीं करना होगा. इसी वजह से शहरी उपभोक्ताओं को आसानी से गैस सप्लाई मिल जाती है.
गांव में लगता है ज्यादा समय?
दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्थिति थोड़ी सी अलग होती है. यहां का डिलीवरी नेटवर्क उतना मजबूत नहीं है और ट्रांसपोर्टेशन भी एक बड़ा फैक्टर बन जाता है. शहरी इलाकों में जैसे 25 दिन का गैप होता है ठीक वैसे ही ग्रामीण इलाकों में अगली बुकिंग के लिए 45 दिनों का गैप जरूरी है. ग्रामीण इलाकों में कई जगह सड़कें अच्छी नहीं होती, जिस वजह से डिलीवरी में देरी होती है.
सप्लाई सीमित होने पर प्रायोरिटी भी तय की जाती है.
ट्रांसपोर्टेशन और खराब सड़कों की वजह से ऐसा नहीं है कि गांवों में गैस नहीं मिलती. सरकार ने बस सप्लाई सीमित होने की वजह से प्रायरिटी भी तय की है. चूकिं स्मूद तरीके से गैस की सप्लाई नहीं हो पा रही है और सरकार सप्लाई को बैलेंस्ड रखने के लिए ऐसे फैसले कर रही है. सरकार के फैसले का उद्देश्य हर क्षेत्र में गैस की पहुंच सुनिश्चित करना और ब्लैक मार्केटिंग को रोकना है.
तो आखिर पहले किसे मिलता है सिलेंडर?
आसान भाषा में बोलें तो शहरों में गैस जल्दी पहुंचती है. इसका मतलब ये नहीं है कि गांवों को पीछे रखा जाता है. देरी की वजह नियम और लॉजिस्टिक्स हैं. सरकार का पूरा फोकस अभी बराबरी से गैस के वितरण करने पर है, जिससे शहरी या ग्रामीण किसी भी इलाके में गैस की कमी न हो.
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